चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा, टेस्ट समेत सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास

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एजेंसी, नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के ‘टेस्ट स्पेशलिस्ट’ कहे जाने वाले दिग्गज बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए अपने इस शानदार सफर के अंत का ऐलान किया। पुजारा, जिन्हें उनकी रक्षात्मक शैली और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता के लिए जाना जाता था, उन्होंने एक ऐसे करियर को अलविदा कहा, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन टेस्ट बल्लेबाजों में से एक बनाया। अब वह कभी भी भारतीय टीम के लिए खेलते हुए फैंस को नजर नहीं आएंगे।

संन्यास को लेकर पुजारा ने कही ये बात
पुजारा ने इंस्टाग्राम के जरिए अपने संन्यास की जानकारी फैंस को दी। उन्होंने इमोशनल पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ‘राजकोट के एक छोटे से लड़के ने अपने माता-पिता के साथ सितारों तक पहुंचने का सपना देखा था और भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का ख्वाब संजोया था। तब मुझे नहीं पता था कि यह खेल मुझे इतना कुछ देगा। अनमोल मौके, अनुभव, उद्देश्य, प्यार और सबसे बढ़कर अपने राज्य और इस महान देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना और हर बार मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देना, इसे शब्दों में बयां करना असंभव है। लेकिन जैसा कि कहते हैं, हर अच्छी चीज का अंत होता है और मैं अपार कृतज्ञता के साथ भारतीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का फैसला कर चुका हूं।’

शानदार रहा पुजारा का करियर
अपने 13 साल के लंबे करियर में पुजारा ने कई यादगार पारियां खेलीं, खासकर विदेशी धरती पर। उन्होंने 103 टेस्ट मैचों में 43.60 की औसत से कुल 7195 रन बनाए, जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। वह भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में आठवें स्थान पर हैं। इसके अलावा, वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में भी एक महान खिलाड़ी रहे हैं, जहां उन्होंने 21301 रन बनाए, जो उनकी बेहतरीन तकनीक और धैर्य का प्रमाण है। पुजारा का करियर सिर्फ रनों के बारे में नहीं था, बल्कि यह धैर्य, साहस और टीम के लिए खेलने के समर्पण का भी प्रतीक था। 2018-19 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनके प्रदर्शन को हमेशा याद किया जाएगा, जब उन्होंने चार टेस्ट मैचों में तीन शतक लगाए और भारत को पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने में मदद की। उनका संन्यास भारतीय क्रिकेट में एक युग का अंत है और फैंस उन्हें हमेशा एक ऐसे योद्धा के रूप में याद रखेंगे, जिसने अपनी बल्लेबाजी से कई बार टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला।

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