एजेंसी, लंदन/कोपेनहेगन। अमेरिकी हमले से ग्रीनलैंड को बचाने के लिए यूरोपीय देशों ने कसम खाई है। इस कसम को पूरा करने के लिए ब्रिटेन ने अमेरिकी सैनिकों से लड़ने एक और नॉर्वे और फिनलैंड ने 2-2 सैनिकों को भेजा है। अब समझ सकते हैं कि यूरोपीय देशों का कसम कैसा है। जबकि यूरोप की बड़ी ताकतें डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर कंट्रोल का समर्थन कर रही हैं और सैनिकों को भेजने का ऐलान कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नीदरलैंड भी अपने एक सैनिक को ग्रीनलैंड को बचाने भेज रहा है। यानि कुल मिलाकर 6 सैनिक हुए हैं, जो एक विशाल ग्रीनलैंड को अमेरिकी हमले से बचाएंगे। फिलहाल के लिए यूरोपीय देशों ने इसे ‘जासूसी मिशन’ कहा है। जिसमें यूके, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड जैसे देश शामिल हैं। वहीं नाटो देश पोलैंड, इटली और तुर्की ने ग्रीनलैंड में सेना भेजने के अनुरोध को ठुकरा दिया है।
यानि ग्रीनलैंड को बचाने के लिए यूरोपीय देश कितने गंभीर हैं, वो इन सैनिकों की संख्या से पता चलता है। ये हाल तब है जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य विकल्पों के इस्तेमाल की बात कही है। ट्रम्प का कहना है कि ग्रीनलैंड को चीन और रूस से खतरा है। ट्रंप ने दावा किया है कि चीन और रूस के इस क्षेत्र में जहाजों की संख्या बढ़ गई है। हालांकि डेनमार्क के आर्कटिक कमांडर ने कहा कि ग्रीनलैंड के पास कोई रूसी या चीनी जहाज नहीं मिले हैं।
यूरोप के 6 सैनिक अमेरिका से ग्रीनलैंड बचाएंगे?
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के तेवर बने हुए हैं। उन्होंने डेनमार्क का समर्थन करने वाले देशों पर एक फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। यूरोपीय देश अगर पीछे नहीं हटते हैं तो 1 जून से टैरिफ को बढ़ाकर 26 प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। ट्रंप ने फिलहाल डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड जैसे देशों पर 10% टैरिफ लगाया है। ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद यूरोपीय संसद ने जुलाई में साइन किए गए एक बड़े ट्रांसअटलांटिक ट्रेड समझौते को रोक दिया। लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स वने डेनमार्क के आर्कटिक कमांडर, मेजर जनरल सोरेन एंडरसन के हवाले से कहा है कि नाटो सहयोगियों के बीच हथियारों से टकराव की संभावना नहीं है। उन्होंने अमेरिका और यूरोप के बीच जंग के हालात को “काल्पनिक” बताया है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई नाटो सहयोगी दूसरे नाटो सहयोगी पर हमला करेगा।”
ग्रीनलैंड को बचाने यूरोपीय देशों ने क्या कदम उठाए?
यूरोपीय सैनिकों को ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस के लिए भेजा गया है। जो डेनमार्क के नेतृत्व में एक नाटो मिलिट्री एक्सरसाइज है, जिसमें अमेरिका शामिल नहीं है। डेनमार्क ने इस युद्धाभ्यास की घोषणा ट्रंप के ग्रीनलैड छीनने के बयान के बाद की थी। ग्रीनलैंड में अब तक सैनिकों को भेजने की बात की जाए तो डेनमार्क, जो अभी ग्रीनलैंड को कंट्रोल करता है, उसने सबसे ज्यादा 150 सैनिक जॉइंट आर्कटिक कमांड के तहत ग्रीनलैंड में तैनात किए हैं। इसके अलावा डेनमार्क ने 14 सदस्यों वाली एलीट सीरियस डॉग स्लेड पेट्रोल भी भेजा है, जो लंबी दूरी की जासूसी पेट्रोलिंग करती है और उत्तरी और पूर्वी ग्रीनलैंड के आर्कटिक जंगल की रक्षा करती है। इसके अलावा, डेनिश वायु सेना ने अन्य यूरोपीय सैनिकों को तैनात करने में मदद करने के लिए कई सी-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट विमान भी दिए हैं।
इसके अलावा बीएफएम टीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि डेनमार्क के साथ-साथ फ्रांस ने भी अपनी 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री ब्रिगेड से 15 सैनिकों का एक दल भेजा है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि “फ्रांसीसी सैनिकों की एक शुरुआती टीम पहले से ही मौके पर है और आने वाले दिनों में जमीन, हवा और समुद्र के जरिए और मदद भेजी जाएगी।” माना जा रहा है कि फ्रांस अपने राफेल लड़ाकू विमानों को भेज सकता है। जबकि, जर्मन अखबार बिल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी ने जर्मन सशस्त्र बलों, बुंडेसवेहर से एक टोही टीम के हिस्से के रूप में 13 सैनिकों का एक दल भेजा है।


