पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत : असम मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े मामले में मिली अग्रिम जमानत

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एजेंसी, नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत : उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा की पत्नी के विरुद्ध कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी और आरोप लगाने के प्रकरण में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने पवन खेड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ अनिवार्य शर्तों के साथ उन्हें यह राहत दी। न्यायालय का यह आधिकारिक आदेश शुक्रवार को पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया, जबकि पीठ ने पूर्व में हुई सुनवाई के पश्चात अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करना होगा और साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ वर्जित होगी।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय के निर्णय पर शीर्ष अदालत की टिप्पणी

उच्चतम न्यायालय ने पवन खेड़ा की उस अपील को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 24 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियां उपलब्ध तथ्यों के सटीक आकलन पर आधारित प्रतीत नहीं होतीं। पीठ ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि आरोपी पर सबूत का बोझ डालना विधिक रूप से उचित नहीं लगता। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 339 के अंतर्गत किसी स्पष्ट अपराध के आरोप के बिना, केवल महाधिवक्ता के वक्तव्य के आधार पर की गई टिप्पणियां न्यायोचित नहीं हैं।

मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा दर्ज कराया गया आपराधिक मामला

यह संपूर्ण विवाद उस समय आरंभ हुआ जब असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा ने पवन खेड़ा और अन्य के विरुद्ध गुवाहाटी के अपराध शाखा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन पर मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एकाधिक पासपोर्ट होने और विदेशों में अघोषित संपत्तियां रखने संबंधी संगीन आरोप लगाने का दोष मढ़ा गया था। रिनिकी भुइयां शर्मा ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही की मांग की थी।

कानूनी यात्रा और उच्चतम न्यायालय की शर्तें

पवन खेड़ा के लिए अग्रिम जमानत प्राप्त करने की राह काफी जटिल रही है। इससे पूर्व उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय से सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत प्राप्त हुई थी, किंतु असम पुलिस ने इसके विरोध में उच्चतम न्यायालय का द्वार खटखटाया था। तब शीर्ष अदालत ने ट्रांजिट जमानत पर रोक लगाते हुए खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था। अब अंततः अग्रिम जमानत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं। इन शर्तों के अनुसार, खेड़ा संबंधित अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकेंगे। साथ ही, जांच अधिकारी की मांग पर उन्हें थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होगी ताकि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके।

जांच में सहयोग और साक्ष्यों का संरक्षण

न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि पवन खेड़ा को मुकदमे की प्रत्येक अवस्था में जांच एजेंसियों की सहायता करनी होगी। उन्हें कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे जांच या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। यदि अधीनस्थ न्यायालय आवश्यक समझता है, तो वह खेड़ा की जमानत पर अतिरिक्त प्रतिबंध या शर्तें भी आरोपित कर सकता है। इस निर्णय को कांग्रेस नेता के लिए एक बड़ी वैधानिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे उन पर गिरफ्तारी का तात्कालिक संकट टल गया है।

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