कच्चे तेल

दुनियाभर में कच्चे तेल का संकट गहराया : आईईए ने घर से काम करने और हवाई यात्राएं कम करने की दी सलाह

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई पर भारी दबाव पड़ रहा है जिसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने तेल की खपत घटाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और हवाई सफर में कटौती जैसे कड़े सुझाव दिए हैं। इजरायल और अमेरिका की ईरान के साथ बढ़ती जंग के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से मंगवाता है इसलिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। इससे देश के चालू खाते का घाटा बढ़ने और रुपये की कीमत गिरने की आशंका है। हालांकि अभी पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं लेकिन रसोई गैस एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये प्रति सिलेंडर का बड़ा इजाफा किया गया है।

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आईईए की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना-जाना लगभग बंद होने से तेल बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट पैदा हुई है। सामान्य दिनों में इस रास्ते से दुनिया की कुल खपत का 20 प्रतिशत तेल गुजरता था। भारत के लिए यह मार्ग बेहद खास है क्योंकि उसका आधा कच्चा तेल और लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी जो अब काफी कम हो गई है। इसी कमी के चलते डीजल और एलपीजी जैसी चीजों के दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बढ़ गए हैं।

बढ़ती महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए आईईए ने सरकारों और आम जनता के लिए 10 मुख्य उपाय सुझाए हैं। एजेंसी का कहना है कि जहां भी संभव हो लोगों को हफ्ते में तीन दिन अतिरिक्त घर से काम करना चाहिए जिससे कारों में होने वाली तेल की खपत को 20 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है। इसके अलावा हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटा कम करने, सार्वजनिक बसों और ट्रेनों का इस्तेमाल बढ़ाने तथा बड़े शहरों में निजी गाड़ियों की आवाजाही पर लगाम लगाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में व्यावसायिक हवाई यात्राओं को कम करने और फैक्ट्रियों में ईंधन बचाने के तरीके अपनाने पर भी जोर दिया गया है। आईईए के अनुसार हवाई दौरों में कमी लाकर विमान ईंधन की मांग को 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। बाजार को स्थिर करने के लिए एजेंसी के सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल निकालने का फैसला किया है जो अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

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