एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला, आतिफ और फैसल को फांसी की सजा, माथे पर तिलक देख की थी शिक्षक की हत्या

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कानपुर| कानपुर में विष्णुपुरी क्षेत्र में रहनेवाले रमेश बाबू शुक्ला को लोग उनके नाम से कम ‘मास्टर साहब’ के नाम से ज्यादा जानते थे। रमेश जाजमऊ आत्म प्रकाश ब्रह्मचारी जूनियर हाईस्कूल के प्रिंसिपल थे। काम से इतनी दिलचस्पी रखते कि रिटायरमेंट के बाद भी वह बच्चों को रोज पढ़ाने कॉलेज पहुंच जाते। २४ अक्टूबर, २०१६ की शाम रमेश छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे। स्कूल से करीब ५०० मीटर दूर ही पहुंचे होंगे कि सामने दो लड़के खड़े दिखते हैं। वह अचानक साइकिल के आगे आ गए। रमेश हड़बड़ाकर साइकिल रोक देते हैं। वह कुछ समझ पाते इसके पहले ही दोनों ने पिस्टल निकाली रमेश के सीने में एक के बाद एक दो गोलियां दाग दीं। रमेश जमीन पर गिरे और तड़पने लगे।

कुछ देर बाद उनकी सांस थम गई। गोली की आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग रमेश की तरफ भागे। लेकिन तब तक हमलावर वहां से फरार हो चुके थे। रमेश की मौत के बाद ७ महीने तक पुलिस हत्यारों को खोजती रही। हत्या के २०० दिन बाद नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया, ‘रमेश बाबू को मारनेवाले कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि आइसिस के आतंकी आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल हैं।’ ४ सितंबर २०२३ को एटीएस/ एनआईए की विशेष अदालत ने रमेश बाबू की हत्या के मामले में आतंकी आतिफ और फैसल को दोषी करार दिया है। १४ सितंबर को कोर्ट इस मामले में सजा सुनाएगा। रमेश की मौत के ७ साल बाद उनके परिवार के लिए वह जख्म आज भी हरा है। हत्यारों को पकड़ने के लिए पुलिस ७ महीने तक हाथ-पैर मारती रही। तभी ७ मार्च २०१७ को यूपी एटीएस को सूचना मिली कि उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट की साजिश में शामिल आइसिस के आतंकी लखनऊ और कानपुर में छिपे हैं।

खुफिया इनपुट के आधार पर एटीएस ने काकोरी रोड के पास एक मकान को चारों तरफ से घेर लिया। इसी घर में आइसिस आतंकी सैफुल्लाह छिपा हुआ था। एटीएस ने ५ घंटे तक चली कार्रवाई में सैफुल्लाह को एनकाउंटर में मार गिराया। उसके ठिकाने से भारी मात्रा में हथियार, गोला बारूद व आईसिस से जुड़े आपत्तिजनक सामान बरामद हुए। फैसल ने पूछताछ में बताया कि उसके साथी आतिफ और सैफुल्लाह आतंकी संगठन आइसिस से जुड़े हुए थे। तीनों ने उत्तर भारत में जिहाद फैलाने की कसम खाई थी। उन्हें नए हथियार आइसिस नेटवर्क से मिले थे, जिनकी टेस्टिंग उन्होंने २४ अक्टूबर, २०१६ को राम बाबू शुक्ला की हत्या करके की। फैसल से पूछा गया कि जिहाद फैलाना था तो रमेश बाबू को क्यों मारा? जवाब में उसने बताया कि रमेश बाबू की पहचान उनके माथे पर तिलक और हाथ में कलावे से हो गई थी इसलिए उन्हें मार डाला।
आतंकियों के भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़
सुरक्षाबलों ने कश्‍मीर में आतंकियों के एक भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर तीन मददगारों को पकड़ा है, जबकि आतंकियों ने बारामुला मार्ग पर आईईडी प्‍लांट कर क्षेत्र को दहलाने की कोशिश की, जिसे नाकाम कर दिया गया। पुलिस ने बारामुला जिले में एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के तीन मददगारों को पकड़ा है। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं। तीनों जिले के चार युवकों को लश्कर में शामिल करानेवाले थे। बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि आतंकियों के पास से ३ हैंड ग्रेनेड और ३० एके-४७ लाइव राउंड सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। गिरफ्तार तीनों आतंकियों में दो पुरुष और एक महिला है, जिनकी पहचान लतीफ अहमद डार, शौकत अहमद लोन और इशरत रसूल के रूप में हुई है। ये तीनों चार स्थानीय युवकों का ब्रेनवॉश कर उसे आतंक की राह पर लाने की तैयारी में थे।
न्याय के इंतजार में परिवार
रमेश बाबू की पत्नी मीना शुक्ला बीते ७ साल से न्याय पाने की लड़ाई लड़ रही हैं। आतंकियों की सजा के एलान से पहले मीडिया से बोलीं- मेरे पति ने पूरी जिंदगी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा। फिर भी उन्हें बेरहमी से मार डाला गया। मुझे विश्वास है कि कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला सुनाएगा और आतंकियों को फांसी की सजा मिलेगी। दोनों के मरने के बाद ही कलेजे को ठंडक मिलेगी।

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