लखनऊ| कोरोना महामारी के प्रभाव से दुनिया अभी उबर ही रही थी कि एक नया वायरस फिर से दस्तक दे दी है। चीन से शुरू हुआ यह वायरस अब भारत में भी पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को एक महिला एचएमपीवी पॉजिटिव मिली है। अभी उसे लखनऊ के हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है।
डॉक्टर ने क्या कहा ?
यूपी के बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. एसआर चौधरी ने कहा कि ‘बलरामपुर अस्पताल में एचएमपीवी मरीज के होने की कोई भी बात पूरी तरह से झूठी है। यह मरीज डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉयड की मरीज है। 15-20 साल पहले वह हाइपरटेंशन से पीड़ित थी। पिछले 1-1.5 महीनों से, मरीज़ खांसी और सर्दी से पीड़ित थी, और चरक अस्पताल ने उसे एचएमपीवी पॉजिटिव बताया है। लेकिन, इस दावे का समर्थन करने वाली कोई रिपोर्ट नहीं है। मरीज को भर्ती कर लिया गया है और उसके सैंपल जांच के लिए जा रहे हैं।
क्या है ये वायरस?
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) एक प्रकार का वायरस है जो मुख्य रूप से इंसानों के श्वसन तंत्र (Respiratory System) को प्रभावित करता है। यह वायरस खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। यह वायरस फ्लू और आरएसवी जैसे लक्षण पैदा करता है।
पहली बार कब मिला ये वायरस?
एचएमपीवी वायरस पहली बार 2001 में नीदरलैंड में बच्चों में पहचाना गया था। यह पैरामाइक्सोविरिडे परिवार से संबंधित है, जो सांस की बीमारियों के लिए जिम्मेदार होता है। यह वायरस हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में इसका खतरा अधिक होता है।
क्या हैं एचएमपीवी के लक्षण?
एचएमपीवी वायरस के आम लक्षण हैं बुखार, नाक बंद या बहना, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, थकान और कमजोरी, सिने में जकड़न, घरघराहट (खासकर बच्चों में), बच्चों के खाने-पीने में दिक्कत, हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी। गंभीर मामलो में निमोनिया, ब्रोंकियोलाइटिस और ऑक्सीजन लेवल का गिरने जैसी समस्या हो सकती है।
क्या हैं इसके बचाव के उपाय?
एचएमपीवी वायरस से बचने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचें। बार-बार हाथ धोएं। मास्क पहनें। संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क से बचें और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखें।
क्या है भारत सरकार का रुख?
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तत्वावधान में संयुक्त निगरानी समूह की एक हालिया बैठक में कहा गया कि चीन में हालात “वर्तमान फ्लू के मौसम के मद्देनजर असामान्य नहीं है” और “इस मौसम के दौरान अपेक्षित सामान्य रोगजनक (पैथोजन)” श्वसन रोगों में मौजूदा वृद्धि का सबब हैं।
डॉक्टर्स ने क्या कहा?
एम्स दिल्ली के आंतरिक चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर, डॉ. नीराज निशल ने कहा कि इसे कोविड-19 से तुलना न करें क्योंकि कोविड एक पूरी तरह से नया वायरस था और हममें से किसी के पास इसके खिलाफ इम्युनिटी नहीं थी। एचएमपीवी को 2001 से पहले ही पहचाना गया था और प्रमाणों के आधार पर यह 1950 के दशक के अंत तक पाया जाता है। 10 साल की उम्र तक, अधिकांश बच्चों में इसके खिलाफ इम्युनिटी विकसित हो जाती है।
क्या फिर से हो सकता है लॉकडाउन?
केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अभी तक इस वायरस को लेकर कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। हालांकि सेंट्रल गवर्नमेंट ने एक सामान्य दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। जिसमे आम सावधानियां लेने की बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रहे हैं कि इस वायरस से सावधान रहने की जरूरत है।
ठंड में आसानी से फैलता है एचएमपीवी
जैसे कई श्वसन संक्रमणों के साथ होता है, एचएमपीवी सबसे अधिक सक्रिय देर से सर्दियों और वसंत के दौरान होता है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि ये वायरस ठंड में बेहतर तरीके से जीवित रहते हैं और जब लोग अधिकतर समय घर के अंदर रहते हैं तो ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलते हैं।
क्या है एचएमपीवीका इंटरनेशनल प्रजेंस
उत्तर चीन में वर्तमान में एचएमपीवी मामलों में वृद्धि ठंडे तापमान के साथ मेल खा रही है, जो मार्च तक बने रहने की संभावना है। वास्तव में, उत्तरी गोलार्ध के कई देशों में, जिनमें चीन भी शामिल है लेकिन केवल यही सीमित नहीं है, एचएमपीवी का प्रसार बढ़ रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट ने क्या कहा ?
ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय में पैंडेमिक साइंटिस्ट जैकलीन स्टीफेंस ने कहा कि हालांकि यह चिंताजनक है लेकिन बढ़ता हुआ केस संभवतः सर्दियों में देखी जाने वाली सामान्य वृद्धि है। अमेरिका और यूके में स्वास्थ्य अधिकारियों के डेटा से पता चलता है कि इन देशों में भी पिछले साल अक्टूबर से एचएमपीवी मामलों में वृद्धि हो रही है।


