एजेंसी, तेहरान/तेल अवीव। मध्य पूर्व से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है जहाँ इजराइल ने अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई का तर्क देते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों पर शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है और रक्षा विशेषज्ञों ने इसे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत के रूप में देखा है। स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी परामर्श जारी किया है जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे किसी भी स्थिति में अमेरिकी सैनिकों के अड्डों या उनके कैम्पों के पास न रहें क्योंकि ईरान की जवाबी कार्रवाई में इन ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
इजराइली रक्षा बलों ने यह साफ कर दिया है कि यह सैन्य कार्रवाई ईरान द्वारा पिछले दिनों किए गए उकसावे का परिणाम है। खबरों के मुताबिक इन मिसाइलों ने ईरान के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्रों को भारी नुकसान पहुँचाया है। हालांकि ईरान के रक्षा विभाग ने कुछ मिसाइलों को बीच हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है लेकिन जमीनी स्तर पर हुए नुकसान की रिपोर्ट काफी चिंताजनक स्थिति बयां कर रही हैं। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर बेहद डरा हुआ है कि क्या यह आपसी संघर्ष एक पूर्ण विश्व युद्ध का रूप ले लेगा।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर दी गई चेतावनी की हो रही है। खुफिया सूत्रों के अनुसार ऐसे संकेत मिले हैं कि ईरान अपने ऊपर हुए हमले का बदला लेने के लिए पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हमला कर सकता है। यही कारण है कि उन इलाकों को तुरंत खाली करने या वहां से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ अमेरिकी सेना की तैनाती है। फिलहाल पेंटागन इस स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है।
वैश्विक स्तर पर इस हमले के बाद भारी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। जहाँ अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है वहीं रूस और चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाए जाने की भी प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो वैश्विक तेल आपूर्ति और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
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ईरान और प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे भारतीय नागरिकों और अन्य प्रवासियों को अपने दूतावासों के निरंतर संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। साथ ही किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा गया है। युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की हवाई सीमा को बंद कर दिया गया है जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया है।
रक्षा जानकारों का मानना है कि इजराइल का यह कदम उसकी ‘प्रोएक्टिव डिफेंस’ रणनीति का हिस्सा है। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अब सबकी नजरें ईरान की ‘रिवोल्युशनरी गार्ड्स’ की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या ईरान सीधे इजराइल पर हमला करेगा या अपने सहयोगी संगठनों के जरिए नया मोर्चा खोलेगा। फिलहाल दोनों देशों में बंकरों को सक्रिय कर दिया गया है।
इस युद्ध का आर्थिक असर भी तुरंत दिखने लगा है। हमले की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है। यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो भारत सहित कई एशियाई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं जिससे महंगाई का एक नया और कठिन दौर शुरू हो सकता है।


