ग्वालियर| पहले शिवराज सिंह चौहान और अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अपने अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं. वे 29 दिसंबर की दोपहर सिविल अस्पताल हजीरा पहुंचे. उन्होंने अपने संकल्प के तहत अस्पताल में साफ-सफाई की. उन्होंने अस्पताल के सार्वजनिक प्याऊ की अपने हाथों से सफाई की. अस्पताल के निरीक्षण के दौरान मंत्री तोमर ने डॉक्टरों और सफाई कर्मियों को स्वच्छता को लेकर सख्त हिदायत भी दी. उन्होंने कहा कि अगली बार गंदगी मिलने पर सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. तोमर ने अपने विधानसभा क्षेत्र में रहने के दौरान अस्पताल की साफ-सफाई का संकल्प लिया है. अस्पताल में साफ सफाई करने के बाद कैबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर जनता के बीच पहुंचे. उन्होंने आमजन और दुकानदारों से मिलकर हालचल पूछा. इसके बाद उन्होंने स्टेट बैंक चोराहे पर जूता कारीगर के साथ जमीन पर बैठकर उससे हाल पूछा और आर्थिक मदद का आश्वासन दिया. रास्ते में बुजुर्ग महिला के पैरों में माथा रखकर चुनाव में आशीर्वाद देने के लिए धन्यवाद दिया. जब चाट की दुकान पर पहुंचे तो मंत्री जी आम लोगों के साथ गोल गप्पे का लुफ्त भी उठाते नजर आए.
मुख्यमंत्री को है विभाग बंटवारे का अधिकार- तोमर
इस दौरान तोमर ने कहा कि मंत्री बनने के बाद यह मेरा दूसरा दौरा है. मैंने मैंने संकल्प लिया है कि जब भी अपने क्षेत्र में रहूंगा तो सिविल अस्पताल सहित अन्य जगहों पर साफ-सफाई करूंगा. जहां सुधार की जरूरत होगी वहां सुधार किया जाएगा. वहीं, पार्टी के हारे हुए बड़े चेहरे को कैसे एडजस्ट करेगी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है. पार्टी को जहां आवश्यकता होगी वहां उनका उपयोग करेगी. मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के सवाल पर कहा कि ये मुख्यमंत्री का विशेष अधिकार है. इसका निर्णय उनको ही करना है. विभागों के बंटवारे से ज्यादा जरूरी काम भी उनकी प्राथमिकताओं में हैं. इसलिए निर्णय वही करेंगे.
राम मंदिर हमारे लिए गर्व की बात- तोमर
मंत्री तोमर ने अयोध्या में राम मंदिर पर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कहा कि लंबे समय से इसके लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया आज मैं उन सभी को प्रणाम करता हूं. देश में भव्य मंदिर अयोध्या में बनकर तैयार है. यह हमारे लिए गर्व का मौका है. उन्होंने कांग्रेस के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में न पहुंचने को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस भगवान राम को नहीं मानती है तो वह उनका निर्णय है. यह पूछने वाली बात है कि आखिर वह किसको पूज रहे हैं, वोट के समय जरूर कांग्रेस राम नाम को पूजती है.


