मुंबई| मुंबई से बड़ी खबर सामने आ रही है. महज 5 महीनों में ही देश के सबसे लंबे समुद्री पुल ‘मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक’ में दरारें आ गई हैं. इस पुल को अटल सेतु के नाम से भी जाना जाता है. इस साल 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्धाटन किया था. इस समुद्री पुल का निर्माण ₹17,843 करोड़ की लागत में हुआ है. अब इस मसले पर सियासत भी होना शुरू हो गई. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने अटल सेतु में आई दरारों का निरीक्षण किया है. उन्होंने दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया में पोस्ट की हैं. कांग्रेस नेता नाना पटोले ने अटल सेतु को लेकर मोदी सरकार निशाना साधा है. उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, ‘अटल सेतु की हालत बेहद चिंताजनक है, जिस अटल सेतु का उद्धाटन सिर्फ 5 महीने पहले नरेंद्र मोदी ने किया था, उसमें दरारें आ गई हैं. बड़ी संख्या में दरारें आने से यात्रियों में दहशत का मौहाल है. बिहार में नवनिर्मित पुल के गिरने की घटना तो ताजा है. सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि मुंबई में भी यह दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है.
मामले पर संज्ञान ले सुप्रीम कोर्ट : उन्होंने आगे लिखा कि अटल सेतु में दरारें आना सरकार की भ्रष्ट कार्यप्रणाली को उजागर करती है. मामला बेहद गंभीर है. उन्होंने मांग कि सुप्रीम कोर्ट इस पर तुरंत संज्ञान ले और मामले की जांच कराए. इस दौरान नाना पटोले के साथ कांग्रेस पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे.
अटल सेतु में क्यों आई दरारें? : कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताया है कि अटल सेतु में पहली ही बारिश में दरार आ गई हैं. हालांकि, अटल सेतु में दरारें आने की असल वजह अभी जांच का विषय है.
अटल सेतु की विशेषताएं
अटल सेतु भारत का सबसे लंबा पुल है और साथ ही सबसे लंबा समुद्री पुल भी है. ये पुल 21.8 किलोमीटर लंबा है. इसकी लंबाई समुद्र के ऊपर लगभग 16.5 किलोमीटर और जमीन पर लगभग 5.5 किलोमीटर है. यह 6-लेन ग्रेड सेपरेटेड एक्सप्रेसवे पुल है, जो मुंबई को सैटेलाइट सिटी नवी मुंबई से जोड़ता है.
यह सेतु दुनिया का 12वां सबसे बड़ा समुद्री पुल है. ये पुल साउथ मुंबई के शिवड़ी में शुरू होता है और ठाणे क्रीक को पार करते हुए नवी मुंबई के उरण तालुका में न्हावा शेवा के पास चिरले (Chirle) में खत्म होता है. इसकी सड़क पूर्व में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पश्चिम में कोस्टल रोड से जुड़ी हुई है.
इस पुल का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है. इससे पहले असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर डॉक्टर भूपेन हजारिका पुल भारत का सबसे लंबा पुल था, जो 9.15 किलोमीटर लंबा पुल है.


