पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में मतदान के उपरांत खूनी संघर्ष : बेहाला और गरिया में भारी हिंसा, कई कार्यकर्ता घायल

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एजेंसी, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदान के उपरांत खूनी संघर्ष : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया पूर्ण होते ही राज्य के विभिन्न अंचलों से हिंसक झड़पों के समाचार प्राप्त हो रहे हैं। राजधानी कोलकाता के बेहाला और गरिया क्षेत्रों में बीती रात्रि राजनैतिक विद्वेष के कारण स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई। बेहाला के पर्णश्री क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बीच हुए हिंसक टकराव में कई व्यक्तियों को गंभीर चोटें आई हैं। प्राप्त विवरण के अनुसार, इस संघर्ष में धारदार हथियारों और पत्थरों का प्रयोग किया गया, जिसके कारण कुछ कार्यकर्ताओं के सिर फट गए हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी है।

बेहाला में कार्यकर्ताओं के आवास पर हमला और मारपीट

हिंसा की सबसे गंभीर घटना बेहाला के पर्णश्री थाना क्षेत्र के अंतर्गत घटित हुई। यहाँ दो स्वयंसेवकों के निवास स्थान को लक्ष्य बनाकर पथराव किया गया और उनके साथ शारीरिक मारपीट की गई। इस हमले में एक कार्यकर्ता के सिर पर गहरी चोट आई है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों पर अपने नेता अंजन दास और अन्य सहयोगियों पर प्राणघातक हमला करने का आरोप लगाया है। इस घटना में गंभीर रूप से घायल अंजन दास को उपचार हेतु एसएसकेएम चिकित्सालय में प्रविष्ट कराया गया है। स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए इस प्रकरण में अब तक 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया है और जांच निरंतर जारी है।

गरिया के पंचशायर में तोड़फोड़ और आतंक का वातावरण

हिंसा का दूसरा प्रमुख केंद्र जादवपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गरिया का पंचशायर इलाका रहा। यहाँ की स्थिति उस समय भयावह हो गई जब लगभग 50 से 60 व्यक्तियों की अनियंत्रित भीड़ ने भारतीय जनता पार्टी के एक चुनावी अभिकर्ता (एजेंट) के कार्यालय पर धावा बोल दिया। उपद्रवियों ने कार्यालय के भीतर रखे फर्नीचर, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों और बाहर खड़ी एक निजी गाड़ी में जमकर तोड़फोड़ की। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि भीड़ ने न केवल संपत्ति को क्षति पहुँचाई, बल्कि अभिकर्ता के परिजनों को भी जान से मारने की धमकियां दीं। हालांकि, क्षेत्र के स्थानीय तृणमूल पार्षद ने इन समस्त आरोपों को निराधार बताते हुए घटना में अपनी पार्टी की संलिप्तता से पूर्णतः इनकार किया है।

प्रशासन की चौकसी और भविष्य की चुनौतियां

चुनाव पश्चात भड़की इस हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया है और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही का आश्वासन दिया है। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है और स्थानीय नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतगणना के पूर्व इस प्रकार की हिंसा राज्य के राजनैतिक वातावरण को और अधिक दूषित कर सकती है। वर्तमान में कोलकाता के इन दोनों क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, किंतु अंतर्निहित तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

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