एजेंसी, नरसिंहपुर। नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए मध्यप्रदेश की नरसिंहपुर की माटी के लाल शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। नरसिंहपुर जिले के बोहानी में शहीद आशीष शर्मा का नम आंखों से गॉड ऑफ ऑनर के बाद अंतिम संस्कार किया गया। शहीद आशीष शर्मा की अंतिम यात्रा में सीएम मोहन यादव, कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और आमजन शामिल हुए।
शहीद के भाई को नौकरी का ऐलान
शहीद आशीष शर्मा की पार्थिव देह को कंधा देने के बाद सीएम मोहन यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए परिवार को 1 करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता और शहीद आशीष शर्मा के छोटे भाई को नियमों को शिथिल करते हुए SI के पद पर नियुक्ति देने का ऐलान किया। इसके साथ ही बोहानी गांव में शहीद आशीष शर्मा के नाम से पार्क और स्टेडियन बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की। सीएम मोहन यादव ने शहीद आशीष शर्मा के भाई को गले लगाकर सात्वनाएं भी दीं।
पार्थिव देह पहुंचते ही रो पड़ा पूरा गांव
इससे पहले शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर जैसे ही उनके गृहग्राम बोहानी पहुंची तो पूरा गांव रो पड़ा। हर किसी की आंख नम थी और जैसे ही पार्थिव देह घर पहुंची तो घंटों से शहीद बेटे का इंतजार कर रहे बूढ़े पिता की आंखों से आंसूओं का सैलाब बह पड़ा। जिगर के टुकड़े को तिरंगे में लिपटा देख पिता देवेन्द्र शर्मा खुद पर काबू नहीं रख पाए और फफक फफक कर रो पड़े। पूरे गांव में आशीष शर्मा अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा आशीष शर्मा का नाम रहेगा की गूंज सुनाई देती रही।
क्रांति का विकेट लिया तो बन गई दोस्ती, हर दम बढ़ातीं हैं हौंसला
एसआईआर की प्रक्रिया में केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि आममतदाता भी तरह-तरह की समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। प्रक्रिया में खासकर ऐसे लोगों के सामने परेशानी ज्यादा है जो नवंबर 2002 से फरवरी 2003 के बीच अपने स्थायी ठिकाने पर नहीं रहे और उनका नाम मतदाता सूचियों में इधर-उधर हो गया।
कोई बूूथ बदलने से तो कोई सूची में नाम नहीं दिखने से परेशान
नक्सलियों से लोहा लेते वक्त सीने पर खाई गोली
शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा बेहद जाबांज और निडर ऑफिसर थे। बुधवार को जिस वक्त उन्हें शहादत मिली वो महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की बॉर्डर पर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की टीमों का नेतृत्व कर रहे थे। आशीष शर्मा के साथ ऑपरेशन में शामिल साथियों के मुताबिक आशीष सबसे आगे थे और उन्होंने डटकर नक्सलियों का मुकाबला किया। आशीष को मुठभेड़ के दौरान सीने, पेट और पैर में गोली लगी थी जिसके कारण वो वीरगति को प्राप्त हुए। इंस्पेक्टर आशीष को उनकी वीरता के लिए दो बार वीर पदक से सम्मानित किया जा चुका था।


