एजेंसी, वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका में शनिवार को राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों के विरोध में ‘नो किंग्स रैली’ का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 80 लाख लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विशाल प्रदर्शन अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,300 से अधिक स्थानों पर एक साथ किया गया। आयोजकों का दावा है कि पिछले साल अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों के मुकाबले इस बार जनता की भागीदारी में भारी इजाफा हुआ है और करीब 10 लाख ज्यादा लोग इस मुहिम से जुड़े हैं।
#WATCH | United States: New Yorkers packed the streets around Times Square and marched past its famous billboards, holding signs and chanting slogans, as part of nationwide “No Kings” rallies – a protest against President Trump and his administration’s policies.
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— ANI (@ANI) March 29, 2026
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव, प्रवासियों के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई और आसमान छूती महंगाई को लेकर है। वाशिंगटन सहित कई प्रमुख शहरों में लोगों ने राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के विरोध में पोस्टर लहराए और उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की। गौर करने वाली बात यह है कि ट्रम्प के कार्यकाल में अब तक तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें से ताजा विरोध प्रदर्शन 28 मार्च को आयोजित किया गया।
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दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को गंभीरता से लेने के बजाय इन्हें महज एक ‘थेरेपी सेशन’ करार दिया है। प्रशासन का कहना है कि इन रैलियों से आम जनता की राय पर कोई खास असर नहीं पड़ता। खुद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने बचाव में कहा है कि उनके द्वारा लिए गए कड़े फैसले देश को मजबूत बनाने के उद्देश्य से हैं। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि वे किसी तानाशाह या राजा की तरह काम कर रहे हैं।
ट्रम्प के खिलाफ यह नाराजगी केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि यूरोप के प्रमुख शहरों जैसे पेरिस, लंदन और लिस्बन में भी लोग सड़कों पर उतरे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शनकारियों ने ट्रम्प सरकार की विदेश नीतियों की निंदा की और उन्हें सत्ता से बेदखल करने के नारे लगाए। अमेरिका में बढ़ते इस विरोध ने वहां की आंतरिक राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है।


