एजेंसी, नासिक। टीसीएस नासिक कांड में बड़ा एक्शन! देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी टीसीएस की नासिक इकाई से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कई दिनों से फरार चल रही आरोपी निदा खान को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले ने पहले ही आईटी क्षेत्र में सनसनी फैला रखी थी और अब गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज होने की संभावना है। पुलिस के अनुसार आरोपी को छत्रपति संभाजीनगर से हिरासत में लिया गया, जहां उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
कई दिनों से निगरानी कर रही थी पुलिस
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने जानकारी दी कि आरोपी निदा खान को गुरुवार को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि शहर के पुलिस प्रमुख प्रवीण पवार के नेतृत्व में अपराध शाखा की विशेष टीम पिछले कई दिनों से उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर बनाए हुए थी।
पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी लगातार ठिकाने बदल रही है और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रही है। इसके बाद विशेष रणनीति के तहत निगरानी बढ़ाई गई और आखिरकार उसे पकड़ लिया गया।
टीसीएस कार्यालय में उत्पीड़न के कई आरोप
टीसीएस की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के साथ कथित उत्पीड़न, जबरन धार्मिक दबाव, मानसिक प्रताड़ना और छेड़छाड़ के आरोप सामने आने के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया था। शिकायतों के आधार पर विशेष जांच दल ने नौ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की थीं।
अब तक इस मामले में एक महिला प्रबंधक सहित आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कई कर्मचारियों ने लिखित रूप से आरोप लगाए हैं कि कार्यालय के भीतर कुछ लोगों द्वारा धार्मिक दबाव बनाया जा रहा था और कर्मचारियों की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप किया जा रहा था।
कर्मचारियों पर खान-पान और पहनावे को लेकर दबाव का आरोप
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार आरोपी निदा खान पर आरोप है कि वह कुछ कर्मचारियों को विशेष प्रकार का भोजन खाने के लिए दबाव डालती थी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कर्मचारियों को मांसाहारी भोजन अपनाने के लिए कहा जाता था और उनकी धार्मिक मान्यताओं का मजाक उड़ाया जाता था।
कुछ महिला कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इस्लामी परंपराओं के अनुसार कपड़े पहनने और व्यवहार करने के लिए कहा गया। शिकायतों में यह भी कहा गया कि धार्मिक प्रतीकों और व्यक्तिगत आस्था को लेकर मानसिक दबाव बनाया जाता था।
विशेष जांच दल कर रहा पूरे नेटवर्क की जांच
नासिक पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित दबाव तंत्र तो काम नहीं कर रहा था।
जांच एजेंसियां कर्मचारियों के मोबाइल संदेश, समूह वार्तालाप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि कुछ व्हाट्सएप समूहों में कर्मचारियों को निशाना बनाने और उन पर मानसिक दबाव डालने से जुड़े संकेत मिले हैं।
अदालत से नहीं मिली राहत
बताया गया कि आरोपी निदा खान ने 18 अप्रैल को अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। उसने अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने दो मई को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत के फैसले के बाद पुलिस ने उसकी तलाश और तेज कर दी थी। इसके बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई और अंततः उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और मानहानि से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है, क्योंकि शिकायतकर्ताओं में एक अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित महिला भी शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच बेहद सावधानी से की जा रही है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
टीसीएस ने भी लिया सख्त रुख
इस पूरे विवाद के बाद टीसीएस प्रबंधन ने भी बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव या जबरदस्ती को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करती। कंपनी ने कहा कि आरोपों की जानकारी मिलते ही संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।
कंपनी का कहना है कि कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आईटी क्षेत्र में बढ़ी चिंता
इस मामले के सामने आने के बाद आईटी उद्योग में भी चिंता का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कार्यस्थल पर धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत दबाव जैसी घटनाएं न केवल कर्मचारियों की मानसिक स्थिति को प्रभावित करती हैं, बल्कि संस्थानों की साख पर भी गंभीर असर डालती हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और पुलिस इस मामले में और किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है।


