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चीन में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा प्रहार : राष्ट्रपति जिनपिंग ने दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को दिलाई फांसी की सजा

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एजेंसी, बीजिंग। चीन में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा प्रहार : चीन में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा प्रहार : चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने सेना और सत्ता के शीर्ष स्तर पर बैठे दो बड़े नेताओं के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई है। चीन के पूर्व रक्षा मंत्री वी फेंघे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में दोषी पाए जाने के बाद यह कठोर दंड दिया गया है। इस फैसले को चीन की राजनीति और सैन्य व्यवस्था में बड़ा संदेश माना जा रहा है।

चीन की सरकारी समाचार संस्था शिन्हुआ द्वारा जारी जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं के खिलाफ लंबे समय तक जांच और सुनवाई चली, जिसके बाद अदालत ने उन्हें गंभीर अपराधों का दोषी माना। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सीधे निर्देशों के बाद तेज की गई थी। चीन की सत्ता में बैठे शीर्ष नेताओं पर इतनी बड़ी सजा दुर्लभ मानी जाती है, इसलिए इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है।

रिश्वतखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप हुए साबित

अदालती सुनवाई के दौरान वी फेंघे पर बड़े स्तर पर रिश्वत लेने के आरोप साबित हुए। जांच एजेंसियों ने पाया कि उन्होंने अपने प्रभाव और पद का इस्तेमाल करते हुए कई सौदों में आर्थिक लाभ हासिल किया। वहीं ली शांगफू पर रिश्वत लेने के साथ-साथ रिश्वत देने के आरोप भी सिद्ध हुए हैं। अदालत ने माना कि दोनों नेताओं ने अपने पद की गरिमा को नुकसान पहुंचाया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।

ली शांगफू पहले ही चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की कार्रवाई का सामना कर चुके थे। वर्ष 2024 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तेज कर दी गई। माना जा रहा है कि इन मामलों ने चीन की सैन्य व्यवस्था में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।

राष्ट्रपति जिनपिंग के करीबी माने जाते थे दोनों नेता

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन दो नेताओं को इतनी कठोर सजा मिली, वे कभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद विश्वसनीय सहयोगियों में गिने जाते थे। दोनों नेता केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य रह चुके हैं। यह वही संस्था है जो चीन की सेना से जुड़े बड़े फैसले लेती है और जिसकी कमान स्वयं राष्ट्रपति जिनपिंग के हाथों में होती है।

वी फेंघे को वर्ष 2018 में रक्षा मंत्री बनाने का निर्णय भी खुद शी जिनपिंग ने लिया था। उस समय उन्हें सेना में मजबूत पकड़ रखने वाला अनुभवी अधिकारी माना जाता था। वहीं ली शांगफू को भी चीन की सैन्य तकनीक और रक्षा रणनीति का विशेषज्ञ समझा जाता था। इसके बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों में राष्ट्रपति ने किसी प्रकार की नरमी नहीं दिखाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के जरिए जिनपिंग ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।

सेना में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए लगातार चल रहा अभियान

वी फेंघे और ली शांगफू दोनों का संबंध चीन की रॉकेट फोर्स से रहा है, जिसे देश की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयों में गिना जाता है। दोनों नेताओं ने एयरोस्पेस इंजीनियर के रूप में भी काम किया था और चीन की रक्षा तकनीक को मजबूत बनाने में भूमिका निभाई थी। लेकिन बाद में उन्हीं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने लगे।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का उद्देश्य सरकार, सेना और प्रशासनिक तंत्र में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना बताया गया था। पिछले कई वर्षों में इस अभियान के तहत लाखों अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, व्यापारिक नेताओं और सरकारी कर्मचारियों को जेल भेजा गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस अभियान को केवल कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि सत्ता को मजबूत करने के साधन के रूप में भी देखती है। हालांकि सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि उसका मुख्य उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और अनुशासन कायम करना है।

दुनिया भर में चर्चा का विषय बना फैसला

दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है। कई राजनीतिक विशेषज्ञ इसे चीन की राजनीति में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब सेना और सरकार के भीतर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बिल्कुल भी स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि चीन की सरकार अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत बनाने के लिए अंदरूनी सफाई अभियान चला रही है। ऐसे समय में जब चीन वैश्विक स्तर पर अपनी शक्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, तब सेना के भीतर भ्रष्टाचार उसके लिए बड़ी चुनौती बन सकता था। यही कारण है कि शीर्ष स्तर पर इतनी सख्त कार्रवाई की गई है।

चीन में यह मामला अब केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सत्ता, अनुशासन और सैन्य नियंत्रण से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस फैसले का असर चीन की राजनीति और सैन्य ढांचे पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

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