ट्रंप का दौरा

चीन की चेतावनी और ट्रंप का दौरा : चार प्रमुख मुद्दों पर समझौते से स्पष्ट इनकार

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चीन की चेतावनी और ट्रंप का दौरा: चार प्रमुख मुद्दों पर समझौते से स्पष्ट इनकार

एजेंसी, बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 13 से 15 मई तक होने वाली चीन यात्रा को लेकर वैश्विक राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। चीन और अमेरिका के बीच उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों के बीच इस दौरे को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस उच्च स्तरीय यात्रा की शुरुआत से ठीक पहले चीन ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। अमेरिका में स्थित चीनी दूतावास ने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि चीन-अमेरिका संबंधों के बीच ‘चार लाल रेखाएं’ मौजूद हैं, जिन्हें किसी भी स्थिति में चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि चीन और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में चार ऐसे बुनियादी विषय हैं, जिन पर चीन किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। चीन ने इन मुद्दों को अपनी मर्यादा और सुरक्षा की अंतिम सीमा माना है।

चीन द्वारा निर्धारित ‘चार लाल रेखाएं’

चीन के आधिकारिक बयान के अनुसार, वे चार संवेदनशील मुद्दे निम्नलिखित हैं जिन पर कोई बातचीत संभव नहीं है:

  1. ताइवान का मामला: चीन हमेशा से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता रहा है और इसमें किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता।

  2. लोकतंत्र और मानवाधिकार: चीन का तर्क है कि हर देश की अपनी आंतरिक स्थितियां होती हैं और वह अपने मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के नाम पर बाहर से होने वाली किसी भी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेगा।

  3. राजनीतिक व्यवस्था: चीन की वर्तमान शासन प्रणाली और उसकी राजनीतिक संरचना पर वह किसी भी देश का दबाव नहीं चाहता।

  4. विकास का अधिकार: चीन का मानना है कि उसे अपनी अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र में विस्तार करने का पूरा अधिकार है और अमेरिका को इसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए

चीनी दूतावास ने अपने वक्तव्य में यह भी जोड़ा कि दोनों महाशक्तियों को एक ऐसी दिशा में बढ़ना चाहिए जो रणनीतिक रूप से स्थिर और रचनात्मक हो। शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आपसी सम्मान और साझा लाभ ही दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य का एकमात्र मार्ग है।

अमेरिकी दिग्गजों के साथ ट्रंप का शक्ति प्रदर्शन

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अकेले चीन नहीं पहुंच रहे हैं, बल्कि उनके साथ अमेरिका के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली उद्योगपतियों का एक बड़ा दल भी जा रहा है। ट्रंप ने प्रस्थान से पहले इस बात की पुष्टि की कि एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेन्सेन हुआंग भी इस यात्रा का हिस्सा हैं। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि हुआंग को आमंत्रित नहीं किया गया है। इस व्यापारिक दल में इलॉन मस्क, टिम कुक, लैरी फिंक, स्टीफन स्वार्जमैन, केली ओर्टबर्ग, जेन फ्रेजर, डेविड सोलोमन, संजय मेहरोत्रा और क्रिस्टियानो एमन जैसे दुनिया के सबसे अमीर और सफल कारोबारी शामिल हैं। ट्रंप का लक्ष्य स्पष्ट है कि वे इन दिग्गजों के माध्यम से चीन के बाजार तक अमेरिकी पहुंच को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चर्चा के मुख्य बिंदु

ट्रंप ने कहा कि वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चीनी अर्थव्यवस्था को और अधिक उदार बनाने और विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोलने पर गंभीरता से चर्चा करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि चीन अपनी आर्थिक नीतियों को और लचीला बनाता है, तो ये अमेरिकी कारोबारी अपनी क्षमताओं के दम पर चीन को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं, जिससे दोनों राष्ट्रों को लाभ होगा। व्हाइट हाउस की सूचना के अनुसार, अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप इस बार राष्ट्रपति के साथ इस दौरे पर नहीं हैं। हालांकि, ट्रंप के साथ उनके विशेष विमान ‘एयर फोर्स वन’ में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और परिवार के सदस्य जैसे एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप मौजूद हैं।

ईरान और अन्य वैश्विक मुद्दों पर ट्रंप का रुख

अपनी यात्रा को रोमांचक और महत्वपूर्ण बताते हुए ट्रंप ने शी जिनपिंग को अपना अच्छा मित्र बताया। हालांकि, जब उनसे ईरान के विषय में सवाल किया गया, तो उनके स्वर काफी सख्त थे। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका को ईरान के मुद्दे पर किसी अन्य देश की सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को सही रास्ता चुनना होगा, अन्यथा अमेरिका स्वयं इस मामले को सुलझाने और अपना काम पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है। इस प्रकार, ट्रंप की यह यात्रा केवल व्यापारिक नहीं बल्कि कूटनीतिक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

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