एजेंसी, राजस्थान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का आज 37वां दिन है। इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का गंभीर संकट पैदा हो गया है, क्योंकि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर पाबंदियां लगा दी हैं। जहां पूरी दुनिया तेल की कमी से जूझ रही है, वहीं भारत ने इस मुश्किल घड़ी में अपना रास्ता खुद बना लिया है। राजस्थान का थार रेगिस्तान इस संकट के समय में भारत के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।
थार रेगिस्तान बना भारत का सुरक्षा कवच
पश्चिमी एशिया के युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका असर ब्रिटेन से लेकर वियतनाम तक देखा जा रहा है। ऐसे में भारत की सरकारी कंपनी ‘ऑयल इंडिया लिमिटेड’ ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में स्थित अपने तेल क्षेत्रों से उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। जोधपुर बलुआ पत्थर संरचना वाले क्षेत्रों से होने वाला उत्पादन, जो पहले 705 बैरल प्रतिदिन था, उसे बढ़ाकर अब 1,202 बैरल प्रतिदिन कर दिया गया है। कंपनी ने कच्चे तेल के कुल उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत का इजाफा किया है।
आधुनिक तकनीक से निकाला जा रहा है भारी कच्चा तेल
थार के इस रेगिस्तानी इलाके में तेल निकालना आसान नहीं है क्योंकि यहाँ का कच्चा तेल काफी गाढ़ा और चिपचिपा होता है। इसे निकालने के लिए ऑयल इंडिया ‘डाइल्यूएंट इंजेक्शन’ और ‘आर्टिफिशियल लिफ्ट सिस्टम’ जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। बाघेवाला तेल क्षेत्र, जो लगभग 200 वर्ग किलोमीटर में फैला है, वहां अब 33 कुओं से सक्रिय रूप से तेल निकाला जा रहा है। इसके अलावा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 13 नए कुएं भी खोदे गए हैं।
गुजरात की रिफाइनरियों तक पहुंच रही सप्लाई
जैसलमेर के बाघेवाला क्षेत्र से निकलने वाले इस कच्चे तेल को पहले गुजरात के मेहसाणा स्थित ओएनजीसी प्लांट्स भेजा जाता है। वहां से पाइपलाइन के जरिए इसे कोयली रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है, जहां इसे पेट्रोल और डीजल में बदला जाता है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 32,787 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था, वहीं चालू वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 43,773 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।
सरकार ने जारी किया ‘थार प्लान’, जनता से धैर्य की अपील
भारत सरकार ने इस संकटपूर्ण स्थिति में देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार एक तरफ ईरान से बातचीत कर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए जहाजों को लाने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर थार जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि थार की कठिन परिस्थितियों में उत्पादन बढ़ाना भारत की एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि है।
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