सुप्रीम लीडर खामेनेई

इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत : गम में डूबा बाराबंकी का किंतूर गांव, यहीं से जुड़ी थीं पुश्तैनी जड़ें

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एजेंसी, बाराबंकी। खाड़ी देशों में छिड़े भीषण सैन्य संघर्ष और युद्ध जैसे हालातों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय जगत के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले को भी झकझोर कर रख दिया है। इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि के बाद दुनिया भर में तनाव चरम पर है। इस बीच, बाराबंकी की सिरौली गौसपुर तहसील के किंतूर गांव में सन्नाटा पसर गया है, क्योंकि खामेनेई का पुश्तैनी संबंध इसी गांव की मिट्टी से था। युद्ध की इस विभीषिका में अपने एक रक्त संबंधी के इस तरह अंत की सूचना ने ग्रामीणों को गहरे शोक में डुबो दिया है।

किंतूर से ईरान के सर्वोच्च सिंहासन तक का सफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान की इस्लामिक क्रांति के सबसे बड़े चेहरे अयातुल्लाह खामेनेई के दादा, सैयद अहमद मुसावी हिंदी, अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी के दौरान बाराबंकी के इसी किंतूर गांव में निवास करते थे। अपनी जड़ों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही उनके परिवार ने अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ उपनाम जोड़ा था। किंतूर के निवासी आज भी उन ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुश्तैनी घरों को गौरव के साथ देखते हैं, जहाँ से निकलकर खामेनेई का परिवार ईरान के सर्वोच्च पद तक पहुँचा। इजरायल द्वारा किए गए घातक हवाई हमले और मिसाइल वर्षा के बीच जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, लोग जानकारी जुटाने के लिए टीवी और मोबाइल से चिपक गए।

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गांव के वंशजों और स्थानीय लोगों में भारी रोष
खाड़ी क्षेत्र की इस आग ने जहाँ वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, वहीं किंतूर की गलियों में लोग इस ऐतिहासिक क्षति पर चर्चा कर रहे हैं। गांव में रह रहे उनके वंशज सैय्यद निहाल मियां ने अत्यंत भावुक होकर कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक दुखद घटना है। उन्होंने बताया कि खामेनेई एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें धर्म से ऊपर उठकर केवल मानवता से सरोकार था। उन्होंने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल केवल अपना वर्चस्व चाहते हैं और पूरी दुनिया पर शासन करने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, स्थानीय नागरिक डॉक्टर रेहान काजमी ने बताया कि इजरायली हमले में अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत से क्षेत्र में शोक का माहौल है। उनके अनुसार, यह एक ऐसी क्षति है जिसकी पूर्ति संभव नहीं है, क्योंकि उन्होंने मानवता का संदेश दिया था। वर्तमान में गांव के लोग इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्र में शांति की प्रार्थना कर रहे हैं।

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