US Iran war

होर्मुज जलडमरूमध्य में महाविस्फोट : अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध, फारस की खाड़ी दहली, खाड़ी देशों में घुंसने की ईरानी सेना की खुली धमकी

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका ईरान

एजेंसी, तेहरान। US Iran war Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को दो बड़े व्यावसायिक तेल टैंकर जहाजों में भीषण विस्फोट होने से पूरे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग में हाहाकार मच गया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की अत्यंत गलत और भ्रामक जानकारी के कारण ये दोनों तेल टैंकर समुद्र में बिछी खतरनाक माइंस की चपेट में आ गए, जिससे उनमें जबरदस्त आग लग गई। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने ईरान के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मनगढ़ंत दावे कर रहा है, जबकि हकीकत में दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।

अमेरिकी वायुसेना का ईरान पर लगातार सातवीं रात भीषण हमला

फारस की खाड़ी में जारी महायुद्ध के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बड़ा वीडियो जारी करते हुए इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना ने लगातार सातवीं रात ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण हवाई हमले में अमेरिका ने ईरान के सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और यज्द में स्थित हथियार भंडारों, भूमिगत मिसाइल ठिकानों और समुद्री सैन्य क्षमताओं को मुख्य रूप से निशाना बनाया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपौर ने दावा किया है कि 27 जून से 18 जुलाई 2026 के बीच हुए इन अमेरिकी हवाई हमलों में अब तक 50 से अधिक निर्दोष नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके साथ ही लोरिस्तान प्रांत के खुर्रमाबाद शहर में भी शनिवार को कई जोरदार धमाके सुने गए हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे कुवैत से दागी गई अमेरिकी मिसाइलों के कारण हुए हैं।

ईरान की अमेरिका समर्थित कुवैत और बहरीन को मटियामेट करने की धमकी

अमेरिकी सैन्य हमलों से बौखलाए ईरान ने अब खाड़ी क्षेत्र के अन्य पड़ोसी देशों को भी सीधे युद्ध में घसीटने की खुली चेतावनी दे डाली है। ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान की धरती पर किसी भी प्रकार का जमीनी सैन्य हमला करने का दुस्साहस किया, तो ईरानी सेना तुरंत कुवैत और बहरीन की सीमाओं में दाखिल हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इन देशों में मौजूद तमाम अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान मिसाइल हमलों से पूरी तरह मटियामेट कर देगा। इसके साथ ही, ईरान की आईआरजीसी ने उन सभी खाड़ी देशों को अंतिम चेतावनी दी है जो अपनी जमीन पर अमेरिकी सेना की मेजबानी कर रहे हैं। ईरान ने कहा है कि ये देश अपने नागरिकों को संभावित सैन्य ठिकानों से तुरंत दूर हटा लें, क्योंकि ईरान का जवाबी हमला बेहद विनाशकारी होगा।

चाबहार बंदरगाह पर बमबारी और भारत से जुड़े टर्मिनल की वर्तमान स्थिति

इस महायुद्ध की आंच अब भारत के रणनीतिक हितों तक भी पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के अत्यंत महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के मुख्य कंट्रोल टावर को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह टावर पूरे बंदरगाह पर व्यावसायिक और नागरिक जहाजों के आवागमन की निगरानी करता था। इस बड़ी घटना के तुरंत बाद भारत सरकार के केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने देश को आश्वस्त करते हुए बताया कि चाबहार बंदरगाह पर हुए इस अमेरिकी हमले में भारत द्वारा संचालित किए जा रहे ‘शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल’ को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है और भारत से जुड़ा हुआ यह महत्वपूर्ण टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है।

खाड़ी देशों की जीवनरेखा माने जाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट्स पर बड़ा हमला

इस सैन्य संघर्ष में अब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के सबसे महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में पानी और बिजली का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने अमेरिका पर नागरिक संपत्तियों को नष्ट करने का संगीन आरोप लगाया है। अमेरिकी मिसाइलों ने होर्मोजगान प्रांत के जस्क काउंटी में स्थित बुंजी तटीय गांव के जल शोधन संयंत्र को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिससे समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाला (डिसैलिनेशन) सिस्टम और पावर ट्रांसफॉर्मर ठप हो गया है। इस हमले के कारण 20 गांवों के करीब 10 हजार लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर में स्थित अमेरिकी अल उदैद एयरबेस पर हमला कर उनके हाईमार्क रॉकेट सिस्टम को नष्ट करने का दावा किया है, साथ ही कुवैत के अल-अहमदी बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के फ्यूल सपोर्ट पियर, बहरीन के शेख ईसा एयरबेस और उनके खुफिया डेटा सेंटर ‘बटेल्को’ को ड्रोन व मिसाइलों से पूरी तरह तबाह कर दिया है। कुवैत ने अपने डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हुए इन ईरानी हमलों को ‘जघन्य’ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है। गौरतलब है कि कुवैत, ओमान, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देश अपने पीने के पानी की 70% से 100% तक की जरूरत के लिए इन्हीं डिसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं, जो उनके अस्तित्व की जीवनरेखा हैं।

ईरान का अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते से पीछे हटने का बड़ा ऐलान

कूटनीतिक मोर्चे पर स्थिति उस समय पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई जब ईरान ने अमेरिका के साथ ठीक 1 महीने पहले हुए शांति समझौते को पूरी तरह से रद्द करने की घोषणा कर दी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि चूंकि अमेरिका ने स्वयं हवाई हमले करके इस द्विपक्षीय समझौते की शर्तों का खुला उल्लंघन किया है, इसलिए तेहरान अब इसकी किसी भी शर्त को मानने के लिए बाध्य नहीं है। पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद स्पष्ट कर दिया था कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। अमेरिकी प्रशासन अब ईरान के परमाणु ठिकानों, बिजली संयंत्रों और उनके भूमिगत पिकऐक्स माउंटेन ठिकानों पर और भी बड़े सैन्य विमानों के जरिए हमलों को तेज करने की रणनीति बना रहा है। इस बीच, तेहरान की सड़कों पर ईरान सरकार ने एक बेहद विवादित और आक्रामक होर्डिंग लगाया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प, उनकी पत्नी मेलानिया और उनके पांचों बच्चों को अमेरिकी झंडे में लिपटे ताबूतों में दिखाया गया है और उस पर फारसी में ‘खून के बदले खून’ का नारा लिखा गया है।

ईरान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति और शीर्ष नेतृत्व में भारी सत्ता संघर्ष

इस बाहरी महायुद्ध के बीच ईरान के आंतरिक राजनीतिक हालात भी पूरी तरह विस्फोटक हो चुके हैं। अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते को लेकर ईरान के कट्टरपंथियों और उदारवादियों के बीच हिंसक सत्ता संघर्ष छिड़ गया है। देश का कट्टरपंथी धड़ा वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर देश के सिद्धांतों की बलि देने और अमेरिका के सामने घुटने टेकने का आरोप लगा रहा है। हाल ही में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह आंतरिक गुस्सा खुलकर सामने आया, जब उग्र भीड़ ने राष्ट्रपति के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थरों से जानलेवा हमला करते हुए उन्हें “गद्दार” घोषित कर दिया। कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान ने इसे सरकार द्वारा किया जा रहा एक आंतरिक तख्तापलट करार दिया है। इसी बीच, अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी माने जा रहे उनके बेटे मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को लेकर भी भारी संशय है। रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, सुरक्षा कारणों से मुजतबा खामेनेई युद्ध खत्म होने तक पूरी तरह भूमिगत रहेंगे और किसी भी सार्वजनिक मंच पर सामने नहीं आएंगे, जबकि पहले उनके 23 जुलाई को तेहरान की श्रद्धांजलि सभा में देश के सामने आने की अटकलें लगाई जा रही थीं।

अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह ठप, जॉर्डन ने मार गिराईं 10 ईरानी मिसाइलें

इस भयंकर सैन्य तनाव के कारण रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पिछले 3 हफ्तों के अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। शिप ट्रैकिंग वेबसाइट मरीनट्रैफिक के आंकड़ों के मुताबिक, इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की दैनिक संख्या 15 से घटकर महज 8 रह गई है, जिसमें से ओमान वाले सुरक्षित मार्ग का उपयोग पूरी तरह बंद हो चुका है और सभी जहाज केवल ईरानी समुद्री सीमा वाले मार्ग से अत्यधिक जोखिम के बीच गुजर रहे हैं। अमेरिका के पूर्व अनुभवी राजदूत रयान क्रॉकर ने सीएनएन को दिए अपने विशेष साक्षात्कार में चेतावनी दी है कि अमेरिका इस तरह की लगातार बमबारी करके ईरान में कभी भी सत्ता परिवर्तन नहीं कर पाएगा, क्योंकि ईरान युद्ध लड़ने की कला में बेहद माहिर है। उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शर्त के सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोलना होना चाहिए। इस बीच, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने वाशिंगटन में आयोजित एक बिजनेस समिट के दौरान पश्चिमी तेल कंपनियों के साथ इराक-सीरिया कच्चा तेल पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने के लिए दर्जनों समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि तेल निर्यात के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता को पूरी तरह कम किया जा सके। वहीं दूसरी ओर, जॉर्डन की सेना ने भी एक बड़ा बयान जारी करते हुए बताया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने शनिवार को देश के हवाई क्षेत्र में अवैध रूप से दाखिल हुई ईरान की 10 शक्तिशाली मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक मार गिराया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

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