एजेंसी, उज्जैन। Ujjain Simhastha 2028 : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को अपने पूर्व निर्धारित एक दिवसीय आधिकारिक दौरे पर धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे। उज्जैन आगमन के तुरंत बाद उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण विषय ‘सिंहस्थ-2016 का संकल्प, सिंहस्थ-2028 का संकल्प’ पर आधारित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ किया। इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी सिंहस्थ महापर्व की शुरुआती तैयारियों की समीक्षा करना, शहर के अधोसंरचना विकास (इंफ्रास्ट्रक्चर) को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना था। मुख्यमंत्री सुबह करीब 11:25 बजे हेलीपैड पर उतरे और वहां से सीधे कार्यक्रम स्थल अंजूश्री होटल के लिए रवाना हुए, जहां पूरे प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों का जमावड़ा लगा हुआ था।
भव्य और दिव्य “सिंहस्थ-2028” के लिए सभी तैयारियां तेजी से जारी हैं…
आज उज्जैन में ‘सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प’ विषयक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया।
हमारा संकल्प है कि सिंहस्थ-2028 अब तक का सबसे स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय महापर्व बने।… pic.twitter.com/rEsZJQsjJf
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 27, 2026
पुराने अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों ने साझा किए सिंहस्थ के जमीनी अनुभव
इस कार्यशाला की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें वर्ष 2016 के पिछले सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान उज्जैन जिले में तैनात रहे वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इन अनुभवी अधिकारियों ने मंच से अपने पुराने कार्यकाल के दौरान मिले व्यावहारिक अनुभवों को सबके सामने साझा किया। उन्होंने पिछली बार सामने आई बड़ी चुनौतियों, भीड़ नियंत्रण के तौर-तरीकों और बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। इसी क्रम में उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह ने एक बेहद आधुनिक और विस्तृत डिजिटल प्रेजेंटेशन दिया। इस प्रेजेंटेशन के माध्यम से उन्होंने सिंहस्थ-2028 की शुरुआती तैयारियों, प्रस्तावित निर्माण कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था के खाके को प्रदेशभर से आए वरिष्ठ अधिकारियों के सामने बारीकी से प्रस्तुत किया।
विश्व के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में उमड़ेगा 40 करोड़ श्रद्धालुओं का सैलाब
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि वर्ष 2028 में आयोजित होने वाला उज्जैन का सिंहस्थ महाकुंभ पूरे विश्व का सबसे बड़ा मानवीय और धार्मिक मेला साबित होने जा रहा है। राज्य सरकार के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस महापर्व के दौरान देश-विदेश से करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और संतों के उज्जैन नगरी में आने की प्रबल संभावना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में सचेत करते हुए कहा कि इतने विशाल जनसैलाब की मेजबानी करने के लिए हमें अभी से उसी स्तर की अभूतपूर्व और विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं पहले से ही तैयार करके रखनी होंगी, ताकि ऐन वक्त पर किसी भी तरह की अव्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो।
ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्या से निपटने के लिए पड़ोसी राज्यों से बनेगा स्पेशल कॉरिडोर
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने पुरानी कमियों को सुधारने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि पिछले सिंहस्थ के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था और सुगम आवागमन प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हुआ था। पिछली बार कई मुख्य मार्गों और चौराहों पर घंटों तक भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही थी, जिससे श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान के लिए सीएम ने निर्देश दिया कि इस बार मध्य प्रदेश सरकार को अपने पड़ोसी राज्यों (जैसे राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र) के परिवहन और गृह विभागों के साथ मिलकर एक मजबूत समन्वय तंत्र स्थापित करना होगा, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से आने वाले वाहनों और श्रद्धालुओं का रूट मैनेजमेंट और प्रबंधन बेहद सुचारू रूप से किया जा सके।
फतेहाबाद रेलवे ट्रैक की नई सुविधा और देवताओं की नगरी के सभी मंदिरों का होगा कायाकल्प
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ के समय फतेहाबाद का महत्वपूर्ण रेलवे ट्रैक पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं के लिए यह आधुनिक रेल सुविधा पहले से ही पूरी तरह उपलब्ध है। वर्तमान में उज्जैन को जोड़ने वाला ऐसा कोई भी मुख्य मार्ग नहीं बचा है, जिसका चौड़ीकरण और सुदृढीकरण न किया जा चुका हो। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उज्जैन मूल रूप से देवताओं की पावन नगरी है। यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालु केवल पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान करने के उद्देश्य से नहीं आएंगे, बल्कि वे पूरे शहर और आसपास के क्षेत्रों में फैले प्राचीन धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करेंगे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उज्जैन संभाग के सभी छोटे-बड़े प्राचीन मंदिरों के संपूर्ण जीर्णोद्धार और कायाकल्प का एक बड़ा संकल्प लिया है।
निजी होटलों की मनमानी पर लगेगी लगाम और सरकारी स्तर पर मिलेंगी बेहतरीन सुविधाएं
श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि सिंहस्थ-2028 के दौरान राज्य सरकार की अपनी स्वयं की सरकारी और ठहरने की व्यवस्थाएं इतनी मजबूत और व्यापक रहेंगी कि आम नागरिकों को निजी होटलों, लॉज या निजी भवनों के मालिकों पर निर्भर रहने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा रणनीतिक निर्देश देते हुए कहा कि उज्जैन शहर की सीमा से लेकर बाहर जाने वाले सभी दिशाओं के 100 किलोमीटर तक के मार्गों पर स्थित जितने भी ढाबे, रेस्टोरेंट और होटल हैं, वहां पर भी बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।
सामूहिक जन-भागीदारी और आपसी सहयोग से इतिहास रचेगा सिंहस्थ-2028 का महाकुंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यशाला के समापन सत्र में सभी विभागों के अधिकारियों को टीम भावना के साथ काम करने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने बड़ा वैश्विक आयोजन की सफलता किसी एक विभाग के बूते संभव नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों, स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और पड़ोसी राज्यों की सरकारों के साथ मिलकर एक साझा और व्यापक योजना पर अमल करना होगा। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि सभी पक्षों के सक्रिय सहयोग, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और बेहतर पूर्व-प्रबंधन के बल पर सिंहस्थ-2028 को मानव इतिहास का सबसे भव्य, सुरक्षित, व्यवस्थित और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन बनाया जाएगा।
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