एजेंसी, भोपाल। Tvisha Sharma Case : नोएडा की मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में देश की शीर्ष अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण कानूनी आदेश पारित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सत्र अदालत में चल रही मुकदमे की सुनवाई और ट्रायल प्रक्रिया पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है। यह सख्त निर्देश मृतका के पिता और मामले के मुख्य शिकायतकर्ता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर की गई ट्रांसफर पिटीशन पर प्राथमिक सुनवाई के बाद दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस अंतरिम हस्तक्षेप से फिलहाल स्थानीय अदालत में मामले से जुड़ी तमाम न्यायिक कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से ठप कर दिया गया है।
पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ट्विशा के पिता की याचिका पर CBI, उनकी सास गिरबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को नोटिस जारी किया गया है।
साथ ही, भोपाल की निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी गई है।
कॉपीराइट-फ्री कंटेंट पाएँ केवल #PBSHABD पर। अभी रजिस्टर करें: https://t.co/0uMyeVb8Eq
#SupremeCourt #TwishaSharma #Justice #LegalNews #India #PBSHABD
— PB-SHABD (@PBSHABD) October 16, 2026
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सुनी पिता की दलीलें
शुक्रवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ के समक्ष इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता नवनिधि शर्मा की तरफ से वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में दलील पेश करते हुए आरोप लगाया कि भोपाल के वर्तमान माहौल में गवाहों और सबूतों के प्रभावित होने की प्रबल आशंका है, जिससे निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया बाधित हो सकती है। शीर्ष अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष की चिंताओं और कानूनी तर्कों को गंभीरता से सुनने के बाद भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत में लंबित केस की कार्यवाही पर फौरी रोक लगाने का फरमान सुनाया। इसके साथ ही अदालत ने मामले के सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए उचित समय निर्धारित किया है।
निष्पक्ष ट्रायल के लिए भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर करने की गुहार
मृतक मॉडल के पिता ने शीर्ष अदालत में संविधान और आपराधिक प्रक्रिया के प्रावधानों के तहत ट्रांसफर याचिका दाखिल कर केस को मध्य प्रदेश से बाहर ले जाने की मांग उठाई है। याचिका में स्पष्ट रूप से अनुरोध किया गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मुकदमे की फाइल भोपाल सत्र अदालत से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की किसी सक्षम अदालत में स्थानांतरित की जाए। पिता का तर्क है कि न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का पालन तभी संभव है जब पीड़ित पक्ष को पूरी तरह भयमुक्त और निष्पक्ष वातावरण मिले। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर कोई अंतिम फैसला सुनाने से पहले दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिया है, ताकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही स्थानांतरण पर अंतिम निर्णय लिया जा सके।
अगले आदेश तक भोपाल कोर्ट की कार्यवाही पूरी तरह स्थगित
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी स्थगनादेश के बाद अब भोपाल की संबंधित सत्र अदालत में गवाही, जिरह या आरोप तय करने जैसी कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। यह कानूनी रोक सुप्रीम कोर्ट के आगामी दिशा-निर्देशों तक निरंतर प्रभावी रहेगी। हालांकि, केस को औपचारिक रूप से दिल्ली ट्रांसफर किया जाएगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला प्रतिवादियों द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब और अगली विस्तृत सुनवाई के बाद ही तय होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से मामले में नए साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी रहेगी।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट ने क्या ताजा आदेश पारित किया है?
उत्तर 1: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मध्य प्रदेश की भोपाल जिला एवं सत्र अदालत में चल रही मुकदमे (Trial) की सभी कार्यवाहियों पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है।
प्रश्न 2: त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में क्या गुहार लगाई है?
उत्तर 2: मृतका के पिता ने शीर्ष अदालत में केस ट्रांसफर याचिका (Transfer Petition) दायर कर पूरे मुकदमे को भोपाल की सत्र अदालत से दिल्ली की किसी सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि मामले की निष्पक्ष और भयमुक्त सुनवाई हो सके।
प्रश्न 3: आपराधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट केस को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर क्यों करता है?
उत्तर 3: दंड प्रक्रिया संहिता और संविधान के तहत यदि अदालत को यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रभाव, राजनीतिक दबाव या गवाहों को धमकाने के कारण किसी विशेष स्थान पर निष्पक्ष ट्रायल (Fair Trial) संभव नहीं है, तो न्यायहित में मुकदमे को दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा सकता है।
प्रश्न 4: इस मामले में भोपाल सत्र अदालत में अब आगे क्या कानूनी स्थिति रहेगी?
उत्तर 4: सुप्रीम कोर्ट के स्थगनादेश के बाद भोपाल की सत्र अदालत में गवाहों के बयान, जिरह या आरोप तय करने से जुड़ी कोई भी कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह रोक सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक जारी रहेगी।
प्रश्न 5: ट्रांसफर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला कब तक आ सकता है?
उत्तर 5: सुप्रीम कोर्ट ने मामले के सभी प्रतिवादियों (ससुराल पक्ष और राज्य सरकार) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। प्रतिवादियों के हलफनामे और अगली विस्तृत सुनवाई के बाद ही केस ट्रांसफर पर अंतिम फैसला होगा।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें



