एजेंसी, नई दिल्ली। Telegram Ban News : देश की राजधानी में स्थित दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण सवाल पूछा है कि आखिर किस कानून और आधार के तहत पूरे टेलीग्राम नेटवर्क पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने अदालत के सामने यह बड़ा दावा किया है कि इस समय इंटरनेट की दुनिया में टेलीग्राम का इस्तेमाल सबसे ज्यादा ऑनलाइन अपराधों, परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने, बच्चों के शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री फैलाने, देश विरोधी ताकतों के प्रचार और पैसों की बड़ी धोखाधड़ी के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। सरकार ने न्यायालय में लिखित रूप से सौंपे गए अपने जवाब यानी हलफनामे में साफ-साफ कहा है कि टेलीग्राम की गोपनीयता बनाए रखने और असली पहचान छिपाने वाली खासियतों की वजह से ही यह कानून तोड़ने वाले अपराधियों का सबसे पसंदीदा और सुरक्षित नेटवर्क बन चुका है।
Delhi High Court reserves verdict on Telegram’s plea challenging the government order banning the platform till June 22 in view of the NEET exams.
Centre says Telegram is like Frankenstein. Telegram says the government order is disproportionate, and it is complying with the… pic.twitter.com/ihAB2y5Vag
— Bar and Bench (@barandbench) June 18, 2026
अदालत ने सुरक्षित रखा अपना फैसला
बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश जस्टिस तेजस कारिया की पीठ इस पूरे मामले पर बहुत गंभीरता से सुनवाई कर रही थी। दरअसल, यह सुनवाई टेलीग्राम कंपनी की तरफ से दायर की गई उस कानूनी याचिका पर हो रही थी, जिसमें उसने भारत सरकार द्वारा अपने ऊपर लगाए गए इस अस्थायी प्रतिबंध को गैर-कानूनी बताते हुए अदालत में चुनौती दी है। न्यायालय की पीठ ने इस संवेदनशील मामले से जुड़े सभी पक्षों और वकीलों की दलीलें बहुत ध्यान से सुनने के बाद अपना अंतिम फैसला पूरी तरह से सुरक्षित रख लिया है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश जारी किया है कि अगर किसी भी पक्ष को अपनी कोई अतिरिक्त बात या दस्तावेज लिखित रूप में पेश करना है, तो वह शाम को सात बजे तक उसे न्यायालय में जमा करा सकता है।
परीक्षा से ठीक पहले सरकार ने लिया कड़ा फैसला
आपको बता दें कि भारत सरकार ने आगामी इक्कीस जून को देश भर में दोबारा आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक यानी नीट रीएग्जाम से ठीक पहले टेलीग्राम की तमाम सेवाओं पर यह अस्थायी पाबंदी लगाई है। सरकार द्वारा लगाया गया यह कड़ा प्रतिबंध बाईस जून दो हजार छब्बीस तक पूरी तरह से लागू रहेगा। इसके अलावा सरकार की तरफ से एक और विशेष निर्देश जारी किया गया है, जिसके तहत टेलीग्राम को आगामी तीस जून तक अपने प्लेटफॉर्म पर पहले से भेजे जा चुके किसी भी संदेश या मैसेज में बदलाव करने यानी उसे एडिट करने की सुविधा को भी पूरी तरह से बंद रखने के लिए कहा गया है।
सरकार ने न्यायालय में रखे पांच बड़े कारण
केंद्र सरकार ने अदालत को सौंपे गए अपने कानूनी दस्तावेज में टेलीग्राम के दुरुपयोग को लेकर पांच बहुत बड़े और चौंकाने वाले दावे किए हैं:
टेलीग्राम के भीतर केवल एक खाते का इस्तेमाल करके एक साथ चालीस स्वचालित रोबोटिक प्रोग्राम यानी बॉट्स का निर्माण किया जा सकता है, जबकि व्हाट्सएप जैसे अन्य माध्यमों पर हर व्यक्ति के लिए केवल एक ही बॉट बनाने की कड़ी सीमा तय है।
यह पूरा प्लेटफॉर्म क्लाउड तकनीक के जरिए दूर से संचालित होता है, जिसकी वजह से इस पर अपराध करने वाले असली इंसानों का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर सरकार इसे ब्लॉक भी कर दे और कोई व्यक्ति इस पर गड़बड़ी करे, तो भी जांच दल असली गुनहगार तक नहीं पहुंच सकते।
इस माध्यम में किसी भी एक बड़े ग्रुप या चैनल के एक लाख से ज्यादा सदस्यों को महज कुछ ही पलों के भीतर किसी दूसरे गुप्त चैनल पर ट्रांसफर किया जा सकता है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बहुत गंभीर खतरा पैदा करता है।
टेलीग्राम की व्यवस्था में भेजे गए संदेश की पुरानी तारीख और समय को अपनी मर्जी से बदला या एडिट किया जा सकता है, जिसका बहुत गलत इस्तेमाल होता आया है। साल दो हजार चौबीस में ठीक ऐसा ही एक मामला सामने आया था।
उस दौरान परीक्षा खत्म होने के बाद प्रश्नपत्र को टेलीग्राम पर डाला गया था, लेकिन बाद में उसकी सेटिंग में बदलाव करके तारीख को परीक्षा से एक दिन पहले का दिखा दिया गया था ताकि लोगों को लगे कि पेपर पहले ही लीक हो गया था।
टेलीग्राम कंपनी ने अदालत में रखा अपना पक्ष
इस मामले में टेलीग्राम की तरफ से देश के जाने-माने वकील ध्रुव मेहता ने अदालत के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने माननीय जज से कहा कि परीक्षा के दौरान जो कुछ भी गड़बड़ी हुई, उससे हम सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं और इस वजह से देश के लाखों छात्र बेहद परेशान भी हुए हैं। लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि क्या किसी एक अकेली अप्रिय घटना को रोकने के लिए इंटरनेट के इतने बड़े और पूरे के पूरे प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से बंद कर देना न्यायसंगत है? टेलीग्राम कंपनी ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि जैसे ही उन्हें नौ जून को सरकारी अधिकारियों की तरफ से कुछ गलत लिंक या यूआरएल की सूची मिली थी, उन्होंने महज एक घंटे के भीतर ही उन सभी प्रतिबंधित सामग्रियों को अपने नेटवर्क से हमेशा के लिए हटा दिया था।
कंपनी ने दी अपनी सफाई
टेलीग्राम ने कोर्ट में यह दावा भी किया कि उसने परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने वाली सामग्रियों से जुड़े नौ सौ से भी ज्यादा संदिग्ध लिंक को अब तक पूरी तरह से डिलीट कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने अदालत को बताया कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर नियमों का उल्लंघन करने वाले खातों और संदेशों की पहचान करने के लिए आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, मशीन लर्निंग टूल्स और इंसानी मॉडरेशन की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्यों रद्द हुई थी पहले चरण की परीक्षा
देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन इसी साल तीन मई दो हजार छब्बीस को किया गया था, जिसमें देश के लगभग तेईस लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। लेकिन परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद देश के कई अलग-अलग राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ खास परीक्षार्थियों को परीक्षा से पहले ही पूरा पेपर मिल जाने के गंभीर आरोप सामने आने लगे थे। जब देश की जांच एजेंसियों ने इस मामले की गहराई से छानबीन की, तो उन्हें परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और धांधली होने के पक्के सबूत मिले। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कानून के तहत बारह मई को इस पूरी परीक्षा को निरस्त करने का एक बड़ा फैसला लिया। केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद ही अब इस परीक्षा को दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने का निर्णय लिया गया है।
देश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है नीट परीक्षा
नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट पूरे भारतवर्ष में मेडिकल और डेंटल के बड़े कोर्सेज में प्रवेश पाने के लिए होने वाली एकमात्र और सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। इस बेहद महत्वपूर्ण परीक्षा की शुरुआत देश में साल २०१३ में की गई थी। इसी एक परीक्षा में मिलने वाले अंकों के आधार पर देश के तमाम सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और नर्सिंग जैसे उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में दाखिला दिया जाता है। देश के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े चिकित्सा संस्थान जैसे एम्स और जिपमेर भी अपने यहां विद्यार्थियों को प्रवेश देने के लिए इसी परीक्षा के परिणामों का उपयोग करते हैं।
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