एजेंसी, दिल्ली। Telegram Ban India : देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा यानी नीट-यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने इस अत्यंत संवेदनशील परीक्षा की पवित्रता और गोपनीयता को अक्षुण्ण रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को पूरी तरह से वैधानिक, कानूनी और तर्कसंगत करार दिया है। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि परीक्षाओं में होने वाली किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं को रोकने के लिए सरकार के पास कड़े और जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
Telegram loses bid to overturn India’s temporary blocking of the app https://t.co/zIO8RlPsQD https://t.co/zIO8RlPsQD
— Reuters (@Reuters) June 19, 2026
परीक्षा की गोपनीयता और शुचिता सर्वोपरि
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में बेहद साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि 21 जून को आयोजित होने वाली नीट-यूजी पुन परीक्षा से ठीक पहले सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले डिजिटल मंच टेलीग्राम पर जो अस्थायी पाबंदी लगाई गई है, वह पूरी तरह से सही और समय की मांग के अनुकूल है। अदालत का मानना है कि परीक्षा को बिना किसी रुकावट, धांधली या अवैध गतिविधियों के संपन्न कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, और इसके लिए डिजिटल मंचों की निगरानी या उन पर कुछ समय के लिए रोक लगाना देश के लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बेहद जरूरी है।
सरकार का कदम कठोर नहीं, बल्कि एक जरूरी सुरक्षा उपाय
अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए अपने फैसले में आगे कहा कि टेलीग्राम जैसे संदेश भेजने वाले ऐप पर अस्थायी रोक लगाना सरकार द्वारा अपनाया गया सबसे कम प्रतिबंधात्मक और संतुलित उपाय है। कानून की नजर में इसे किसी भी प्रकार से आवश्यकता से अधिक सख्त या आम जनता के अधिकारों पर अत्यधिक कठोर कदम नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने इस बात को रेखांकित किया कि जब मामला देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक की विश्वसनीयता से जुड़ा हो, तो संभावित खतरों को भांपते हुए ऐसे तात्कालिक और अस्थायी निवारक उपाय करना कानून के दायरे में बिल्कुल उचित और न्यायसंगत है।
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