एजेंसी, नई दिल्ली। Teejan Bai Pandwani singer : भारत की बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित पंडवानी गायिका तीजन बाई के दुखद अवसान पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक प्रकट किया है। प्रधानमंत्री ने लोक संस्कृति के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण प्रतिभा और अद्वितीय कला के दम पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक नई और बेहद गौरवशाली पहचान दिलाई थी। उन्होंने आगे कहा कि तीजन बाई का इस तरह दुनिया से चले जाना भारतीय सांस्कृतिक जगत और पारंपरिक लोक कला के क्षेत्र के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक संभव नहीं हो पाएगी।
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि
तीजन बाई के निधन की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक बेहद भावुक और संवेदना से भरा शोक संदेश साझा किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि देश की महान पंडवानी गायिका तीजन बाई के देहावसान की खबर से उन्हें अत्यंत गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ी लोक गाथाओं और लोक कला को अपनी भव्य तथा ऊर्जावान प्रस्तुति के माध्यम से पूरी दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने दुख की इस अत्यंत कठिन घड़ी में ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी संवेदनाएं तीजन बाई के शोकाकुल परिजनों और उनके करोड़ों प्रशंसकों के साथ हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सांस्कृतिक विरासत को याद किया
प्रधानमंत्री मोदी के अलावा देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख साझा करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई ने अपनी बेहद सशक्त और जीवंत गायकी के माध्यम से लोक कलाओं के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की बेहद समृद्ध और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सर्वोच्च सम्मान दिलाने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
रायपुर एम्स में 70 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
सांस्कृतिक जगत के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, महान लोक कलाकार तीजन बाई पिछले काफी समय से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने 70 वर्ष की आयु में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। तीजन बाई का जन्म वर्ष 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के पास स्थित एक छोटे से गांव गनियारी में हुआ था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पंडवानी जैसी पारंपरिक लोक कला को अपनाया और उसे विकास की एक नई ऊंचाई पर स्थापित कर दिया।
महाभारत की कथाओं को अभिनय से किया जीवंत
पंडवानी असल में महाभारत के महान पात्रों और उनकी कथाओं पर आधारित छत्तीसगढ़ की एक बेहद प्राचीन और पारंपरिक लोक गायन शैली है। इस अनूठी कला विधा में कलाकार अपने हाथ में एक तंबूरा लेकर गायन, संगीत और बेहतरीन अभिनय के समन्वय से महाभारत की ऐतिहासिक कहानियों का दर्शकों के सामने बेहद जीवंत मंचन करता है। तीजन बाई जब मंच पर उतरती थीं, तो अपनी कड़क आवाज और शानदार अभिनय से पूरी कथा को सजीव कर देती थीं। उन्होंने इस कला को केवल पुरुषों के एकाधिकार से बाहर निकालकर महिलाओं के लिए भी एक बड़ा मार्ग प्रशस्त किया।
पद्म पुरस्कारों सहित कई सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजी गईं
भारतीय पारंपरिक लोक कला के संरक्षण, संवर्धन और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में तीजन बाई के इसी अतुलनीय और ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें समय-समय पर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया था। भारत सरकार की ओर से उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री सम्मान दिया गया था। इसके बाद उनकी कला का दायरा और बढ़ा तो वर्ष 2003 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वहीं वर्ष 2019 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी नवाजा गया था। इन सर्वोच्च नागरिक सम्मानों के अतिरिक्त उन्हें प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित देश-विदेश के अनेकों बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका था।
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