एजेंसी, दिल्ली। Strait Of Hormuz Indian Sailors Ban : पश्चिम एशिया के खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों और वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे लगातार हिंसक हमलों को देखते हुए भारत सरकार ने एक बहुत ही बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अगले आदेश तक दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों यानी सीफेयरर्स की किसी भी प्रकार की नई तैनाती पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह सख्त कदम इस समुद्री क्षेत्र में भारतीय नागरिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि पिछले कुछ समय से यह पूरा इलाका एक खतरनाक युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो चुका है।
Advisory for Indian Maritime Stakeholders
In view of the heightened security situation in the Gulf region, the Directorate General of Maritime Administration (DGMA), through DGMA Circular No. 36 of 2026, has directed Ship Owners, Ship Managers and RPSL Companies to avoid… pic.twitter.com/s8XgKI1ifn
— Directorate General of Shipping, Govt. of India (@dgshipping_IN) July 15, 2026
जहाज मालिकों और आरपीएसएल कंपनियों पर प्रभावी रूप से लागू होगा सरकारी आदेश
भारत सरकार द्वारा जारी किया गया यह नया प्रतिबंधात्मक आदेश देश की तमाम जहाज मालिक कंपनियों, वैश्विक जहाज प्रबंधन संस्थाओं और नाविकों की भर्ती करने वाली मान्यता प्राप्त रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस यानी आरपीएसएल कंपनियों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा। इसके साथ ही सरकार ने सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कंपनियों को अरब की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट तथा उसके आसपास के सभी संवेदनशील समुद्री इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के कड़े निर्देश दिए हैं। कंपनियों से कहा गया है कि वे नौवहन संबंधी सभी वैश्विक चेतावनियों और सुरक्षा सलाह पर लगातार चौबीसों घंटे पैनी नजर रखें और इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी यानी आईएसपीएस कोड का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करें। हालांकि, यदि कोई विदेशी शिपिंग कंपनी भारत की भौगोलिक सीमा से बाहर से नाविकों की सीधी भर्ती करती है, तो भारत सरकार का यह क्षेत्राधिकार आदेश उन पर सीधे तौर पर प्रभावी नहीं होगा।
ईरानी हमलों में हाल ही में हुई मौतों के बाद लिया गया सुरक्षात्मक निर्णय
यह बड़ा नीतिगत फैसला ऐसे समय में आया है जब इसी हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में हुए भीषण ईरानी हमलों में 2 और भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण इस प्रमुख व्यापारिक जलमार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। विभिन्न आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी से लेकर अब तक इस पूरे अशांत समुद्री क्षेत्र में हुए अलग-अलग हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है, जिसके बाद सरकार के लिए यह कदम उठाना बेहद अपरिहार्य हो गया था।
अमेरिकी सुरक्षा लेने से बच रहीं शिपिंग कंपनियां और हमलों में 35 ईरानियों की मौत
पिछले 24 घंटों के भीतर इस पूरे क्षेत्र से 5 बहुत बड़े और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। सबसे पहली बात यह है कि ईरान के लगातार होते हमलों के डर से कई वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा सहायता लेने से भी पूरी तरह परहेज करना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि हाल के दिनों में इस इलाके में हुए अमेरिकी हवाई हमलों में 35 से ज्यादा ईरानी नागरिकों की मौत हो गई है, जिससे दोनों देशों के बीच का तनाव चरम पर पहुंच गया है।
नेतन्याहू की अमेरिकी यात्रा, कतर पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री और लापता नाविक की मौत की पुष्टि
इस महासंकट के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शनिवार को अमेरिका की यात्रा पर रवाना होंगे, जहां वह दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वहीं दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक कतर की राजधानी दोहा पहुंच गए हैं, जहां वे कतर के पूर्व अमीर हमद बिन खलीफा अल थानी के सम्मान में आयोजित एक विशेष समारोह में हिस्सा लेंगे। इन कूटनीतिक हलचलों के बीच ओमान के समुद्री तट के पास कारोबारी जहाज जीएफएस गैलेक्सी पर 12 जुलाई को हुए भयानक हमले के बाद से लगातार लापता चल रहे एक और भारतीय नाविक की मौत की आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी गई है, जिससे भारतीय समुद्री समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है।
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