कमांडो संजय तिवारी

तीन गोलियां लगने के बाद भी पाकिस्तानी आतंकी को ढेर करने वाले जांबाज सीआरपीएफ कमांडो संजय तिवारी का शौर्य चक्र लेकर लौटने पर रीवा में ऐतिहासिक स्वागत

प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश रीवा

एजेंसी, रीवा। Shaurya Chakra : देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए मध्य प्रदेश की पावन धरती रीवा में एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला है। देश के राष्ट्रपति के हाथों प्रतिष्ठित ‘शौर्य चक्र’ सम्मान से नवाजे गए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के जांबाज कमांडो संजय तिवारी जब अपने गृह जनपद लौटे, तो रीवा रेलवे स्टेशन पर उनका किसी महानायक की तरह बेहद भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। विंध्य क्षेत्र के इस वीर सपूत का अभिनंदन करने के लिए रेलवे स्टेशन पर भारी संख्या में स्थानीय लोग, उनके परिजन और शुभचिंतक ढोल-नगाड़ों और फूलों के हार के साथ उमड़ पड़े। जैसे ही कमांडो संजय तिवारी ट्रेन से नीचे उतरे, पूरा रेलवे स्टेशन परिसर ‘भारत माता की जय’ और देशभक्ति के गगनभेदी नारों से पूरी तरह गूंज उठा। इस गौरवशाली पल से न केवल विंध्य बल्कि समूचे मध्य प्रदेश का मान पूरे देश में बढ़ा है।

सिरमौर के रहने वाले हैं जांबाज संजय, स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब

शौर्य चक्र विजेता कमांडो संजय तिवारी मुख्य रूप से रीवा जिले की सिरमौर तहसील के अंतर्गत आने वाले डेल्ही गांव के मूल निवासी हैं। वह देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित गरिमामयी रक्षा अलंकरण समारोह में महामहिम राष्ट्रपति से यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त करने के बाद वापस अपने वतन लौटे हैं। उनके स्वागत की तैयारियां क्षेत्र के लोगों ने पहले से ही कर रखी थीं। स्टेशन पर उनके आगमन के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंजती थाप के बीच उन्हें फूल-मालाओं से पूरी तरह लाद दिया गया। इस भावुक और ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए उनके पैतृक गांव के सम्मानित बुजुर्गों के साथ-साथ उनकी धर्मपत्नी और परिवार के तमाम लोग अग्रिम पंक्ति में मौजूद थे। इस जोरदार अभिनंदन के बाद देश के इस रक्षक को एक बड़े काफिले के साथ उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहाँ उत्सव का माहौल बना हुआ है।

अपनी जान से बढ़कर देश की सुरक्षा, जख्मों की परवाह किए बिना लड़ा योद्धा

इस बेहद साहसिक और रोंगटे खड़े कर देने वाले सैन्य अभियान को याद करते हुए कमांडो संजय तिवारी ने बेहद भावुक होकर कहा कि उनके लिए अपनी खुद की जान से कहीं ज्यादा प्यारा उनका देश और उसकी संप्रभुता है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों की तरफ से की गई भारी गोलीबारी में उन्हें एक के बाद एक तीन गोलियां लगी थीं। गोलियां उनके शरीर के तीन अलग-अलग अंगों को चीरती हुई पार हो गई थीं, लेकिन उस बेहद नाजुक मोड़ पर भी उन्हें अपने प्राणों की या शारीरिक चोटों की रत्ती भर भी चिंता नहीं थी। कमांडो संजय ने कहा कि उस समय उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी कि देश का दुश्मन किसी भी कीमत पर जिंदा बचकर भागने न पाए। उन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि माना और अपनी जान की परवाह न करते हुए आतंकी को ठिकाने लगा दिया।

जम्मू-कश्मीर में लश्कर के खूंखार कमांडर को किया था नेस्तनाबूद

जांबाज कमांडो संजय तिवारी को देश का यह सर्वोच्च सम्मान उनकी असाधारण बहादुरी, अद्वितीय साहस और अटूट कर्तव्य परायणता के लिए प्रदान किया गया है। यह पूरा मामला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चलाए गए एक बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान (एंटी-टेरर ऑपरेशन) से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा बलों को खुफिया सूत्रों से यह पुख्ता जानकारी मिली थी कि एक रिहायशी इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के कुछ बेहद खतरनाक आतंकवादी छिपे हुए हैं। इस खुफिया इनपुट के तुरंत बाद सेना और सीआरपीएफ के जवानों ने पूरे इलाके की सख्त घेराबंदी की और अपना खोजी अभियान शुरू किया। खुद को चारों तरफ से घिरता देख मकान में छिपे आतंकियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस बेहद चुनौतीपूर्ण और मौत के साए वाली परिस्थितियों के बीच भी संजय तिवारी बिना डरे अग्रिम हमलावर दल यानी फ्रंटलाइन असॉल्ट टीम का हिस्सा बनकर सबसे आगे बढ़ते रहे।

शरीर के तीन अंगों में धंसी गोलियां, फिर भी नहीं छोड़ी अपनी पोजीशन

इस भीषण और आमने-सामने की मुठभेड़ के दौरान दुश्मनों की कई गोलियां संजय तिवारी को आकर लगीं। इनमें से एक गोली उनकी बांह में, दूसरी घुटने में और तीसरी शरीर के अन्य बेहद संवेदनशील हिस्से में जा धंसी। गोलियां लगने से वह गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए और उनके शरीर से काफी खून बह चुका था। इसके बावजूद इस वीर योद्धा ने अदम्य साहस और फौलादी इरादों का परिचय देते हुए अपनी मोर्चाबंदी यानी पोजीशन को बिल्कुल नहीं छोड़ा। उन्होंने असहनीय दर्द के बीच भी अपनी बंदूक थामे रखी और लगातार सटीक जवाबी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के उस मुख्य आतंकवादी को मौके पर ही ढेर कर दिया।

टारगेट कीलिंग में शामिल पाकिस्तानी आतंकी उस्मान लाहौरी का किया था खात्मा

इस सफल ऑपरेशन के संबंध में खुद कमांडो संजय तिवारी ने एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिस आतंकी को उन्होंने ढेर किया, वह कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह असल में पाकिस्तान से आया लश्कर का एक बड़ा कमांडर उस्मान लाहौरी था। उस्मान लाहौरी जम्मू-कश्मीर के भीतर स्थानीय निर्दोष नागरिकों की चुन-चुनकर हत्या करने यानी ‘टारगेट कीलिंग’ की कई वारदातों में मुख्य रूप से शामिल था। इसके अलावा वह घाटी के भोले-भाले युवाओं को बहला-फुसलाकर आतंकवाद के काले दलदल में धकेलने और नई भर्तियां करने का मुख्य मास्टरमाइंड भी था। ऐसे खूंखार पाकिस्तानी आतंकी को एक बेहद संक्षिप्त और सटीक सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मार गिराना देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी थी, जिसे संजय तिवारी और उनकी टीम ने अपनी जान पर खेलकर अंजाम दिया।

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