एजेंसी, नई दिल्ली। SC OBC Scholarship : केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों विद्यार्थियों के हित में एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लेते हुए अनुसूचित जाति यानी एससी और अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के छात्रों को बहुत बड़ी खुशखबरी दी है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एक बड़ा प्रशासनिक सुधार करते हुए इन दोनों वर्गों के लिए चलाई जाने वाली प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में अब तक अनिवार्य रहे स्थायी निवास प्रमाण पत्र की बाध्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। सरकार के इस छात्र-हितैषी फैसले का सीधा और सकारात्मक लाभ देश भर के विभिन्न राज्यों और शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे करीब 1.2 करोड़ से भी अधिक अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इस नए नियम के लागू होने के बाद से अब पात्र छात्रों को अपनी स्कॉलरशिप राशि प्राप्त करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही किसी जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
Domicile certificate no longer mandatory for SC & OBC scholarships.
A major relief for students as the Social Justice Ministry removes the domicile certificate requirement for Pre-Matric and Post-Matric Scholarship schemes, reducing paperwork and making benefits more accessible,… pic.twitter.com/SOw5QmiiHP
— Harsh Yadav (@ItiHarshh) June 25, 2026
तहसील के चक्करों और दलालों के चंगुल से मिलेगी छात्रों और अभिभावकों को मुक्ति
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, निवास प्रमाण पत्र वास्तव में संबंधित राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण और शासकीय दस्तावेज होता है, जो यह प्रमाणित करता है कि कोई छात्र स्थायी रूप से किस राज्य या जिले का निवासी है। पूर्व के नियमों के तहत छात्रवृत्ति का फॉर्म भरते समय इस आधिकारिक कागजात को संलग्न करना बेहद जरूरी होता था। लेकिन इसे बनवाने के लिए दूरदराज के गांवों और कस्बों में रहने वाले गरीब छात्रों और उनके सीधे-साधे माता-पिता को पटवारी और तहसील कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद होता था। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्रों को उठानी पड़ती थी जो अपने गृह राज्य से बाहर किसी दूसरे शहर या राज्य में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर केवल एक सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बार-बार अपने घर लौटना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में गरीब माता-पिता की मजदूरी का भी भारी नुकसान होता था और कई बार मजबूरी में जल्दी काम कराने के चक्कर में उन्हें बिचौलियों और दलालों को एक मोटी रकम भी घूस के तौर पर देनी पड़ती थी। सरकार ने इस प्रशासनिक पेचीदगी को जड़ से खत्म करके दलालों के तंत्र पर भी गहरी चोट की है।
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी और ओबीसी छात्रों की मजबूत भागीदारी
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हालिया और आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में कुल नामांकित विद्यार्थियों में से अकेले अनुसूचित जाति के छात्रों की हिस्सेदारी लगभग 14.2 प्रतिशत है। वहीं दूसरी तरफ, अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की भागीदारी बहुत बड़ी है, जो कुल नामांकन का 35.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण और देश की जनगणना के प्रवासन आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने से यह साफ पता चलता है कि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 30 से 35 प्रतिशत विद्यार्थी अपने मूल गृह जिले या राज्य की सीमाओं से बाहर जाकर अन्य शहरों में रहकर अध्ययन करते हैं। सामाजिक न्याय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का इस बड़े फैसले को लेकर कहना है कि इस ऐतिहासिक कदम का एकमात्र मुख्य उद्देश्य गरीब और होनहार छात्रों पर पड़ने वाले अनावश्यक कागजी और दस्तावेजीकरण के भारी बोझ को पूरी तरह से कम करना है, जिससे उनकी अनुपालन लागत घटे और देश के हर पात्र छात्र तक सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ बिना किसी बाधा के बेहद सुगमता और पारदर्शिता के साथ सीधे पहुँच सके।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मिलेगी बड़ी मदद
सरकार द्वारा संचालित की जाने वाली ये दोनों ही छात्रवृत्ति योजनाएं वास्तव में देश के उन करोड़ों गरीब और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए एक संजीवनी बूटी की तरह काम करती हैं, जो पैसों के अभाव में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने को मजबूर हो जाते थे। नए नियमों के अनुसार, अनुसूचित जाति वर्ग के प्री-मैट्रिक स्तर पर कक्षा 9वीं और 10वीं के उन सभी विद्यार्थियों को इस छात्रवृत्ति का सीधा लाभ मिलता रहेगा, जिनके माता-पिता की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसके साथ ही 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद से लेकर उच्च व्यावसायिक शिक्षा और पीएचडी स्तर तक की पढ़ाई के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप की सुविधा दी जाती है। वहीं दूसरी तरफ, अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक दोनों ही श्रेणियां सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं, जो उन ओबीसी छात्रों को कवर करती हैं जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय क्रमशः 2.5 लाख रुपये और 1 लाख रुपये तक सीमित है। ये दोनों ही महत्वपूर्ण योजनाएं देश के सीनियर सेकेंडरी स्कूलों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई कार्यक्रमों से लेकर स्नातकोत्तर यानी पोस्ट ग्रेजुएशन और सभी प्रकार की बड़ी व्यावसायिक डिग्री जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रबंधन तक के पाठ्यक्रमों को पूरी तरह से कवर करती हैं।
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