एजेंसी, नई दिल्ली। Re NEET UG 2026 Toppers : राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा री-नीट यूजी 2026 के परिणामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। प्रश्न पत्र लीक होने के बड़े विवाद और कानूनी अड़चनों का सामना करने के बाद 21 जून 2026 को इस परीक्षा को दोबारा आयोजित किया गया था। तमाम चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने उम्मीद से पहले ही परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं, जिससे आगामी चिकित्सा सत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया समय पर शुरू हो सकेगी। देश के लाखों परीक्षार्थी अब चिकित्सा शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना डिजिटल स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
NTA Declares Result of NEET (UG) 2026
11.21 lakh candidates qualify;
Results declared in time for counselling and Medical College Admissions;
Toppers from almost all States and Union Territories;
More than 58 per cent of qualified candidates are women;
Examination conducted in…— National Testing Agency (@NTA_Exams) July 16, 2026
परीक्षा में उम्मीदवारों का कुल प्रदर्शन और सफलता दर
इस वर्ष आयोजित हुई दोबारा परीक्षा में संपूर्ण भारत से तकरीबन 20 लाख छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस परीक्षा में 11.21 लाख परीक्षार्थियों ने सफलता का परचम लहराया है। परीक्षा के आयोजन को लेकर हुए विवादों के बाद भी छात्रों का सफलता ग्राफ काफी शानदार रहा है। इस महामुकाबले में अंकों के आधार पर देश के विभिन्न राज्यों के मेधावियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।
शीर्ष पायदान पर पंजाब और हरियाणा के जांबाज
इस साल की योग्यता सूची में शीर्ष स्थान पर दो छात्रों ने संयुक्त रूप से कब्जा जमाया है। पंजाब प्रांत के लुधियाना शहर से ताल्लुक रखने वाले आर्यन गुप्ता और हरियाणा राज्य के पांशुल बंसल ने इस परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल की है। इन दोनों ही होनहार छात्रों ने कुल 720 अंकों में से 715 अंक अर्जित करके पूरे देश में टॉप किया है। इन दोनों ही छात्रों की इस ऐतिहासिक सफलता से उनके गृह राज्यों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शानदार सफलता के पीछे आर्यन गुप्ता की भावुक कहानी
अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले आर्यन गुप्ता की यह कामयाबी केवल एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा व्यक्तिगत संकल्प छुपा है। आर्यन के माता और पिता दोनों ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं और डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आर्यन ने बताया कि जब वे कक्षा 3 में पढ़ाई कर रहे थे, तब उनकी आदरणीय दादी का निधन भयानक कैंसर बीमारी की वजह से हो गया था। उस मासूम उम्र में मिले इस गहरे सदमे ने उनके जीवन का लक्ष्य बदल दिया। आर्यन ने उसी समय यह कड़ा संकल्प लिया कि वे बड़े होकर चिकित्सा के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाएंगे। वे भविष्य में एक कुशल ऑन्कोलॉजिस्ट यानी कैंसर रोग विशेषज्ञ बनकर तड़पते हुए मरीजों का इलाज करना चाहते हैं।
आर्यन की कठोर तपस्या और 17 घंटे की पढ़ाई
अपनी इस असाधारण उपलब्धि को हासिल करने के लिए आर्यन गुप्ता ने दिन-रात एक कर दिया था। वे हर रोज लगभग 16 से 17 घंटे तक केवल किताबों और पढ़ाई में डूबे रहते थे। कई बार परीक्षा के मानसिक दबाव और अपने ऊंचे लक्ष्य को हासिल करने की चिंता में वे रात-रात भर सो नहीं पाते थे। आर्यन ने अपनी इस ऐतिहासिक जीत का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, मार्गदर्शक शिक्षकों और उन तमाम शुभचिंतकों को दिया है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया। आर्यन का मानना है कि यह कामयाबी उनके पूरे परिवार के सामूहिक प्रयास का मीठा फल है।
परीक्षा परिणाम के मुख्य आंकड़े और स्कोरिंग ट्रेंड
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी किए गए डेटा विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष परीक्षा में बैठने वाले छात्रों का स्कोरिंग पैटर्न काफी दिलचस्प रहा है। परीक्षा में कुल 19 ऐसे होनहार अभ्यर्थी रहे जिन्होंने 700 से अधिक अंकों का जादुई आंकड़ा पार किया है। इसके साथ ही 138 उम्मीदवारों ने 690 से ज्यादा नंबर हासिल किए हैं। उच्च स्कोर की श्रेणी में 1,492 छात्रों ने 650 या उससे अधिक अंक पाए हैं, जबकि 10,160 विद्यार्थियों ने 600 से ज्यादा अंक लाकर बेहतर मेडिकल कॉलेजों के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है।
महिला उम्मीदवारों का एक बार फिर दबदबा
इस साल के परीक्षा परिणामों में एक बार फिर बेटियों ने अपना परचम लहराया है और लड़कों को सफलता दर में पीछे छोड़ दिया है। कुल उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों में से 58 प्रतिशत से ज्यादा संख्या महिला उम्मीदवारों की दर्ज की गई है। आंकड़ों को विस्तार से देखें तो परीक्षा में शामिल होने वाली कुल छात्राओं में से 56.8 प्रतिशत छात्राओं ने सफलता का स्वाद चखा है, जबकि इसके मुकाबले पुरुष अभ्यर्थियों का सफलता प्रतिशत केवल 55.1 प्रतिशत ही दर्ज हो सका है।
नए परीक्षार्थियों का ऐतिहासिक और धमाकेदार प्रदर्शन
इस बार के परीक्षा परिणाम में सबसे चौंकाने वाला और सुखद पहलू यह रहा कि पहली बार परीक्षा देने वाले फ्रेशर्स ने अनुभवी छात्रों को पछाड़ दिया। जिन 138 छात्रों ने 690 से ज्यादा अंक हासिल किए हैं, उनमें से 93 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने जीवन में पहली बार ही नीट की प्रवेश परीक्षा दी थी। इन युवा मेधावियों में से अधिकांश की उम्र सीमा 17 वर्ष से 19 वर्ष के मध्य है, जो यह दर्शाता है कि बिना किसी कोचिंग के लंबे अनुभव के भी युवाओं ने सटीक रणनीति से सफलता पाई।
विभिन्न राज्यों और श्रेणियों का विस्तृत लेखा-जोखा
यह राष्ट्रीय परीक्षा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी और हर हिस्से से छात्रों ने क्वालीफाई किया है। भौगोलिक दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश राज्य से सबसे अधिक 1.7 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों ने इस परीक्षा को पास किया है, जबकि देश के सुदूर द्वीप लक्षद्वीप से भी 43 जांबाज छात्रों ने सफलता की सूची में जगह बनाई है। अगर विभिन्न श्रेणियों के आधार पर उत्तीर्ण छात्रों की बात करें तो आंकड़े इस प्रकार हैं:
श्रेणीवार सफल परीक्षार्थियों की कुल संख्या
सामान्य वर्ग से 2.91 लाख छात्र सफल हुए हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी से सबसे ज्यादा 5.12 लाख अभ्यर्थियों ने बाजी मारी है। इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग से 1.59 lakh और अनुसूचित जनजाति वर्ग से 63,716 उम्मीदवार पास हुए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी के अंतर्गत 95,026 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग वर्ग के तहत 3,666 और 303 परीक्षार्थियों ने इस परीक्षा को सफलतापूर्वक पास किया है।
13 भारतीय भाषाओं में परीक्षा का बहुभाषी आयोजन
भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इस री-नीट यूजी 2026 परीक्षा का आयोजन पूरे देश में कुल 13 विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में किया था। इन भाषाओं में प्रमुख रूप से हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, मराठी, bengaali, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, पंजाबी, असमिया और उर्दू शामिल थीं। इस बहुभाषी विकल्प के कारण देश के ग्रामीण और क्षेत्रीय माध्यमों से पढ़ने वाले बच्चों को परीक्षा को समझने और उसे हल करने में काफी आसानी हुई।
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अब सफल उम्मीदवारों के लिए देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में प्रवेश का रास्ता खुल गया है। एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए ऑल इंडिया कोटा की 15 प्रतिशत सीटों पर काउंसलिंग का आयोजन मेडिकल काउंसलिंग कमेटी द्वारा किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, राज्यों के अंतर्गत आने वाली 85 प्रतिशत सीटों के लिए काउंसलिंग का जिम्मा संबंधित राज्यों की राज्य सरकारों और उनके चिकित्सा शिक्षा विभागों द्वारा संभाला जाएगा, जिसकी समय सारणी जल्द जारी होगी।
साइबर ठगों और फर्जी कॉल से सावधान रहने की चेतावनी
परिणामों की घोषणा के साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने देश के तमाम भोले-भाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बेहद जरूरी सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है। एजेंसी ने आगाह किया है कि परीक्षा परिणाम आने के बाद कई साइबर अपराधी और ठग सक्रिय हो जाते हैं, जो मेडिकल सीटों को पैसों के दम पर दिलवाने, कम नंबर होने पर भी स्कोर कार्ड में नंबर बढ़ाने या फर्जी तरीके से दाखिला कराने के झूठे दावे करते हैं। एजेंसी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और किसी को भी पैसे न दें। किसी भी आधिकारिक और प्रामाणिक सूचना के लिए केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें और किसी भी धोखाधड़ी की शिकायत तुरंत साइबर सेल या एजेंसी की हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं।
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