एजेंसी, नई दिल्ली। Ram Mandir Chadhava Case : अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे के कथित गबन और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से पूरी तरह मना कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील मामले पर जल्दबाजी में सुनवाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है और इसकी नियमित सुनवाई देश की शीर्ष अदालत के ग्रीष्मकालीन अवकाश के समाप्त होने के बाद ही की जाएगी। इस जनहित याचिका के जरिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूरे वित्तीय कामकाज की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने तथा भविष्य के लिए एक बेहद प्रभावी एवं पारदर्शी निगरानी तंत्र स्थापित करने की गुहार लगाई गई थी।
#BREAKING Ram Mandir Donations Row: Supreme Court Declines Urgent Listing Of Plea Seeking SIT Probe |@DebbyJain #SupremeCourt #RamMandir #Ayodhya https://t.co/52ILV0uvfJ
— Live Law (@LiveLawIndia) June 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने त्वरित सुनवाई पर जताई कड़ी असहमति
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायाधीश शील नागू की संयुक्त पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की थी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस जल्दबाजी पर कड़ी असहमति व्यक्त करते हुए मौखिक तौर पर एक सख्त टिप्पणी की। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले को लेकर आसमान नहीं टूट पड़ेगा, आखिर इतनी क्या जल्दी है कि इस पर तुरंत सुनवाई की जाए। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत इस मामले को समर वेकेशन के बाद ही उचित बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, तब तक याचिकाकर्ताओं को इंतजार करना होगा।
सीबीआई और बहु-विषयक एसआईटी से जांच कराने की प्रमुख मांग
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका प्रसिद्ध अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन और वित्तीय लेन-देन में हुई कथित धांधलियों की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के नेतृत्व में एक बहु-विषयक विशेष जांच दल का गठन किया जाना चाहिए। याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाते हुए यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे करोड़ों भक्तों और दानदाताओं की आस्था एवं भरोसे की रक्षा के लिए एक मजबूत नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट व्यवस्था का निर्माण करें ताकि भविष्य में दान के पैसों का दुरुपयोग न हो सके।
करोड़ों राम भक्तों की आस्था और चिंता का हवाला
याचिकाकर्ताओं ने देश की शीर्ष अदालत के समक्ष यह दलील दी है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिलने वाले धन के कथित गबन की जो खबरें सामने आ रही हैं, वे चाहे सच हों या झूठ, लेकिन उन्होंने आम जनता के मन में गहरा संशय पैदा कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि इन खबरों ने उन करोड़ों राम भक्तों और पीढ़ियों के बीच एक बड़ी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और इसकी गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए दशकों तक एक लंबा तथा अनवरत संघर्ष किया है। ऐसे में इस पूरे विवाद की सत्यता का पारदर्शी तरीके से सामने आना बेहद जरूरी है।
उत्तर प्रदेश सरकार की वर्तमान एसआईटी पर उठाए सवाल
इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई मौजूदा जांच समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई विशेष जांच दल ने बिना किसी औपचारिक प्राथमिकी अथवा नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए ही इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है, जो न्यायिक प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है। याचिका में जोर देकर कहा गया है कि मंदिर के धन के गायब होने और अन्य गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के इस मामले की जांच एक ऐसी स्वतंत्र और एकीकृत जांच एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए, जिसके पास जटिल वित्तीय अपराधों से निपटने की पूरी विशेषज्ञता, आधुनिक संसाधन और आवश्यक संस्थागत व्यवस्था मौजूद हो।
प्रशासनिक अधिकारियों की विशेषज्ञता पर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि केवल प्रशासनिक अधिकारियों से भरी एक विशेष जांच टीम द्वारा की जाने वाली प्रारंभिक जांच से आम जनता का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकता है, क्योंकि ऐसे अधिकारियों के पास पेचीदा आपराधिक और वित्तीय मामलों की जांच करने का कोई विशेष अनुभव या विशेषज्ञता नहीं होती है। उल्लेखनीय है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद खुद मंदिर ट्रस्ट ने राज्य सरकार से जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक 3 सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था, जिसमें लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
ये भी पढ़े : फ्रांस में भीषण विमान हादसा : पायलट और स्काईडाइवर्स समेत 11 लोगों की दर्दनाक मौत से पसरा मातम
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


