एजेंसी, अयोध्या। Ram Mandir Ayodhya : उत्तर प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा राशि की चोरी से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई अब अपने बिल्कुल आखिरी दौर में पहुँच चुकी है। बेहद पुख्ता खुफिया सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका व प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों ही कद्दावर पदाधिकारियों को उनके गरिमामयी पदों से बेदखल करने की गंभीर सिफारिश की जा सकती है। छह दिनों तक अयोध्या में डेरा डालकर सघन पूछताछ और दस्तावेजों को खंगालने के बाद एसआईटी की तीन सदस्यीय टीम आज लखनऊ वापस लौट रही है, जहाँ सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष इस पूरे मामले की गुप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उठाया था करोड़ों की हेराफेरी का मुद्दा
इस पूरे देशव्यापी राजनैतिक और धार्मिक विवाद की शुरुआत इसी महीने की 7 तारीख को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री पवन पांडेय ने एक प्रेस वार्ता में यह गंभीर दावा किया था कि राम मंदिर के भीतर से करीब 5 करोड़ से लेकर 7.5 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम चढ़ावा राशि की चोरी की गई है। इस सनसनीखेज खुलासे के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश सरकार की चुप्पी को बेहद संदिग्ध और चिंताजनक करार देते हुए देश की सर्वोच्च अदालत से इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील की थी। शुरुआत में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा बताते हुए खारिज कर दिया था।
प्रधानमंत्री कार्यालय की सख्ती के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने गठित की एसआईटी
जब यह पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने लगा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आहत होने लगी, तब भारतीय जनता पार्टी के ही नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष पत्र लिखकर इस पूरे वित्तीय घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की पुरजोर वकालत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने तुरंत एक्शन लेते हुए मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब कर ली। इसके ठीक बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन वरिष्ठ अधिकारियों की सदस्यता वाली एक विशेष एसआईटी टीम का गठन किया, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया था।
150 लोग संदेह के घेरे में, 30 से अधिक आरोपियों पर गिरेगी बड़ी गाज
विशेष जांच दल ने 15 जून से अयोध्या के राम मंदिर परिसर, रिकॉर्ड रूम, सीसीटीवी फुटेज और बैंक खातों की प्रविष्टियों को बहुत ही गहराई से खंगाला है। इस मैराथन जांच-पड़ताल के दौरान एसआईटी के हाथ कई ऐसे सुराग लगे हैं जिसके बाद करीब 150 लोग संदेह के घेरे में आ चुके हैं। इनमें से कम से कम 30 मुख्य लोगों के खिलाफ बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई होना पूरी तरह से तय माना जा रहा है। जिन भी संदिग्धों से अब तक पूछताछ की जा चुकी है, उन्हें कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले सरकारी आदेश तक अयोध्या या देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा ट्रस्ट के मुख्य निर्माण प्रभारी गोपाल राव पर भी गाज गिरना तय है और उन्हें भी हटाया जा सकता है।
बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से छह घंटे तक तीखी पूछताछ
बीते शुक्रवार को एसआईटी ने मंदिर परिसर के भीतर बने प्रशासनिक भवन में करीब छह घंटे तक लगातार मैराथन पूछताछ सत्र चलाया। इस दौरान टीम के अधिकारियों ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को अलग-अलग कमरों में बैठाकर उनके बयान दर्ज किए। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के स्थानीय शाखा प्रबंधक और मुख्य कैशियर से भी दान राशि को जमा करने की प्रक्रियाओं को लेकर कई तीखे सवाल पूछे गए। हालांकि, पुलिस टीम अभी तक गोपाल राव के सगे भतीजे आनंद और राम मंदिर के एक अन्य कर्मचारी सोमेश आनंद को ढूंढने में नाकाम रही है, क्योंकि दोनों के ही मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहे हैं और वे फरार बताए जा रहे हैं।
आरोपी कर्मचारी टिन्नू के घर से बरामद हुआ था चोरी का सोना
इस पूरे मामले में अब तक की गई छापामार कार्रवाई के दौरान पुलिस प्रशासन ने लगभग 2 करोड़ रुपये की नकद राशि को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। यह बड़ी वित्तीय बरामदगी मंदिर में दान राशि की गिनती करने वाले पांच मुख्य कर्मचारियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही और गिरफ्तारी के बाद संभव हो सकी है। इसके साथ ही बीती 13 जून को ट्रस्ट के मुख्य कर्मचारी टिन्नू के पैतृक आवास पर की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में चोरी का सोना भी बरामद किया गया था, जिसकी कुल कीमत और वजन का आकलन अभी भी गुप्त रखा गया है।
करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर कुठाराघात, संतों और करणी सेना में भारी रोष
राम मंदिर के भीतर हुए इस शर्मनाक चढ़ावा घोटाले के उजागर होने के बाद देश भर के साधु-संतों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अयोध्या के रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण महाराज ने इस पूरे कृत्य को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि यह प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित किए गए धन की चोरी नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों सनातनी हिंदुओं की पवित्र आस्था पर एक बहुत बड़ा कुठाराघात है। उन्होंने मुख्यमंत्री से दोषियों को जेल भेजने की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने भी इसे एक सुनियोजित और बहुत बड़ा घोटाला करार देते हुए चिंता जाहिर की है कि कुछ ताकतवर लोग इस पूरे मामले को अंदर ही अंदर दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए।
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