एजेंसी, बेंगलुरु। PM Modi Security Breach : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया बेंगलुरु दौरे के दौरान सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश का खुलासा हुआ है। 10 मई को पीएम के काफिले वाले रास्ते से जिलेटिन की छड़ें मिलने के बाद अब पुलिस ने उसी स्थान से विस्फोटक को ट्रिगर करने वाला अन्य सामान भी बरामद किया है। जांच के दौरान पुलिस को एक गत्ते के डिब्बे में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और टाइमर मिला है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि हमलावर विस्फोटक को सही समय पर जोड़ (असेम्बल) नहीं पाए, जिस कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई।
धमाके की बड़ी साजिश और सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी
प्रधानमंत्री मोदी 10 मई को बेंगलुरु में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ फाउंडेशन के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। सुरक्षा एजेंसियों को उसी दिन सुबह करीब 7 बजे एक संदिग्ध फोन कॉल आया था, जिसमें बम लगाए जाने का दावा किया गया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कोरमंगला इलाके से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया। इसके बाद सघन तलाशी अभियान के दौरान हाईवे से कुछ ही दूरी पर कागलीपुरा इलाके के पास जिलेटिन की छड़ें मिली थीं। यह वही रास्ता था जहाँ से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरने वाला था।
‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के कार्यक्रम में शामिल हुए थे पीएम
विस्फोटक मिलने की घटना के बावजूद प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ। उन्होंने श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में हिस्सा लिया और अंतरराष्ट्रीय केंद्र में एक भव्य ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के 182 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री ने वहां मानसिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्रकृति संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की भी शुरुआत की।
एसपीजी की अभेद्य सुरक्षा का कवच
इस घटना ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। पीएम की सुरक्षा की जिम्मेदारी ‘स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप’ (एसपीजी) के पास होती है, जिसकी स्थापना 1988 में की गई थी। एसपीजी के कमांडो अत्याधुनिक हथियारों और बुलेटप्रूफ गियर से लैस होते हैं। वर्तमान में इस बल में करीब 3000 से अधिक जवान और अफसर शामिल हैं, जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से चुनकर आते हैं। प्रधानमंत्री के चारों ओर हमेशा एक विशेष सुरक्षा घेरा रहता है, जिसे “डायमंड फॉर्मेशन” कहा जाता है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को तुरंत बेअसर किया जा सके।
पुरानी घटनाओं से लिया सबक
गौरतलब है कि साल 2022 में पंजाब के फिरोजपुर में भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी, जब उनका काफिला एक फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक फंसा रहा था। उस घटना के बाद से ही एसपीजी और स्थानीय पुलिस के बीच तालमेल को और अधिक सख्त कर दिया गया है। बेंगलुरु में मिला टाइमर और सर्किट इस बात का संकेत है कि सुरक्षा एजेंसियां अब पहले से कहीं अधिक सतर्क हैं। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि इस साजिश के पीछे छिपे मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
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