एजेंसी, दिल्ली। PM Modi Iran : पश्चिम एशिया के प्रमुख देश ईरान से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। ईरान की सरकार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में सम्मिलित होने के लिए एक औपचारिक और आधिकारिक निमंत्रण पत्र भेजा है। विश्वसनीय सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी को यह विशेष निमंत्रण ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की तरफ से भेजा गया है। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय ने नई दिल्ली को भेजे संदेश में इस बात की पुष्टि की है कि वे इस दुखद और ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री की उपस्थिति की उम्मीद कर रहे हैं।
Iran President Pezeshkian invites PM Modi to attend former Supreme Leader Ali Khamenei’s state funeral: Sources
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— ANI Digital (@ani_digital) June 24, 2026
भारतीय विदेश मंत्रालय और सरकार के आधिकारिक रुख का इंतजार
ईरान की ओर से आए इस बड़े निमंत्रण के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के फैसले पर टिकी हुई हैं। हालांकि, भारतीय सरकार और विदेश मंत्रालय की तरफ से अभी तक इस निमंत्रण को स्वीकार करने या प्रधानमंत्री के ईरान दौरे को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि सरकार इस मामले में सभी सुरक्षा और कूटनीतिक पहलुओं की गहन समीक्षा करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े विभिन्न धार्मिक और राजकीय रीति-रिवाज जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह में शुरू होने वाले हैं, जो कई दिनों तक चलेंगे। अंतिम संस्कार की मुख्य रस्में चार जुलाई से प्रारंभ होकर नौ जुलाई तक चलेंगी, जिसके बाद पूर्वोत्तर ईरान के बेहद पवित्र माने जाने वाले शहर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मशहद शहर दिवंगत नेता का जन्मस्थान और गृहनगर भी रहा है।
हवाई हमलों के लंबे समय बाद हो रहा है अंतिम विदाई का आयोजन
ईरान के बेहद शक्तिशाली और 86 वर्षीय शीर्ष नेता खामेनेई की मृत्यु इस वर्ष की शुरुआत में छब्बीस फरवरी को ही हो गई थी, जब तेहरान पर इजराइल और अमेरिका द्वारा भीषण हवाई हमले किए गए थे। वे पिछले छत्तीस वर्षों से ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में देश की कमान संभाल रहे थे। उस समय इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर युद्ध की स्थिति बनी हुई थी और चारों तरफ भारी गोलाबारी हो रही थी, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से उस वक्त उनका अंतिम संस्कार संपन्न नहीं कराया जा सका था। अब हालात थोड़े सामान्य होने के बाद इस विशाल कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। अंतिम विदाई का यह मुख्य सिलसिला चार जुलाई को तेहरान के सुप्रसिद्ध ग्रैंड इमाम खुमैनी मोसाला में एक भव्य विदाई प्रार्थना सभा के साथ शुरू किया जाएगा।
पांच दिनों तक चलेगा विभिन्न शहरों में अंतिम यात्रा का सफर
ईरान सरकार द्वारा जारी की गई विस्तृत सूची के अनुसार, राजधानी तेहरान में मुख्य अंतिम संस्कार जुलूस छह जुलाई को निकाला जाएगा। इस विशाल जुलूस के दौरान सर्वोच्च नेता के पार्थिव शरीर के साथ-साथ उनके चार अन्य करीबियों- डॉ. मेस्बाह-ओल-होदा बघेरी, सैय्यदा बुशरा हुसैनी खामेनेई, ज़हरा हद्दाद अदेल और ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी के शवों को भी अंतिम विदाई के लिए ले जाया जाएगा। इसके बाद सात जुलाई को इस यात्रा को ईरान के दूसरे पवित्र शहर कोम में ले जाया जाएगा, जहां देश के बड़े धार्मिक विद्वान उनके शव पर विशेष प्रार्थना पढ़ेंगे।
इराक के पवित्र धार्मिक स्थलों से होकर मशहद में दी जाएगी अंतिम विदाई
इस अंतिम यात्रा का दायरा केवल ईरान तक ही सीमित नहीं रहेगा। इराक के विभिन्न कबीलों, बड़े मुस्लिम विद्वानों, प्रतिष्ठित नागरिकों और राजनीतिक व धार्मिक हस्तियों के विशेष आग्रह पर इस शव यात्रा को आठ जुलाई को पड़ोसी देश इराक ले जाया जाएगा। वहां के दो अत्यंत पवित्र शहरों नजफ़ और कर्बला में अंतिम संस्कार से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी। इराक में होने वाले कार्यक्रमों के समय और सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की स्थानीय सरकार संभालेगी। इसके बाद, नौ जुलाई की रात को, जो इमाम सज्जाद की शहादत के पवित्र समय से मेल खाती है, दिवंगत सर्वोच्च नेता को मशहद शहर में स्थित विश्व प्रसिद्ध इमाम रज़ा दरगाह के परिसर में दफनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण के साक्षी बनने के लिए दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, प्रभावशाली वैश्विक नेता और कई देशों के सरकारी प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंच रहे हैं, जिनकी सुरक्षा और आगमन की व्यवस्था ईरान का विदेश मंत्रालय देख रहा है।
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