एजेंसी, नई दिल्ली। NEET Paper Leak Case : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देश में सियासी और कानूनी घमासान बेहद तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए तीखे सवाल पूछे हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद कड़ा पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द नहीं हुई और फिर बाद में सीबीआई ने जांच बिठाई। देश में बार-बार परीक्षाओं के आयोजन में पूरी तरह फेल साबित हो रहे शिक्षा मंत्री को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर पद से बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं।
VIDEO | Delhi: Accused Manisha Mandhare sent to 14 days of CBI custody in connection with the NEET-UG 2026 paper leak case.
Visuals of the accused being taken away from the Rouse Avenue Court.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/ncvguqOrAx
— Press Trust of India (@PTI_News) May 17, 2026
परीक्षा पे चर्चा पर पीएम मोदी की चुप्पी पर उठे सवाल
राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आगे लिखा कि नीट 2026 का पेपर लीक हुआ, जिसके बाद परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के घोटाले और बदनामी के बाद भी संबंधित विभागीय मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया और अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) एक बार फिर इस पूरे मामले की जांच कर रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी जी, आज पूरा देश आपसे यह सवाल पूछ रहा है और आपको इसका जवाब देना ही होगा कि देश में बार-बार इस तरह से पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। बार-बार होने वाली इन गड़बड़ियों और इस गंभीर विषय पर आपकी प्रसिद्ध ‘परीक्षा पे चर्चा’ आखिर चुप क्यों है।
सीबीएसई के ओएसएम सिस्टम और नई भाषा नीति पर घेरा
नीट घोटाले के साथ-साथ राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कार्यप्रणाली का मुद्दा भी बेहद प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अपने पोस्ट में गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि सीबीएसई के खराब और त्रुटिपूर्ण ओएसएम सिस्टम के कारण 12वीं कक्षा के कई होनहार छात्रों को उनकी उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं। इस बड़ी तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई योग्य छात्र कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन लेने की पात्रता तक खो चुके हैं। इतना ही नहीं, सीबीएसई ने अब 9वीं कक्षा में पढ़ रहे लाखों छात्रों को आगामी 1 जुलाई से एक बिल्कुल नई भाषा सीखने का जबरन फरमान सुना दिया है। हकीकत यह है कि स्कूलों में न तो इस नई भाषा को पढ़ाने वाले शिक्षक उपलब्ध हैं और न ही कोई प्रामाणिक किताब है। नतीजा यह है कि 14 साल के मासूम बच्चों को काम चलाऊ उपाय के तौर पर छठी कक्षा की किताबें थमा दी गई हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
एनटीए की पेपर सेटिंग कमेटी का हिस्सा थीं आरोपी शिक्षिका मनीषा मंधारे
इधर कूटनीतिक और कानूनी मोर्चे पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने पेपर लीक मामले में गिरफ्तार की गई 9वीं मुख्य आरोपी मनीषा मंधारे को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और सबूतों को ध्यान में रखते हुए बॉटनी की शिक्षिका मनीषा मंधारे को 14 दिनों की भारी सीबीआई कस्टडी में भेजने का आदेश सुना दिया है। पुणे की रहने वाली बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मंधारे को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय (हेडक्वार्टर) में हुई बेहद लंबी और कड़ी पूछताछ के बाद आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी का कोर्ट में दावा है कि मंधारे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की उस अति गोपनीय पेपर सेटिंग कमेटी का सक्रिय हिस्सा थीं, जो मुख्य परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करती है। इस वजह से वह पहले से अच्छी तरह जानती थीं कि मुख्य परीक्षा में कौन-कौन से सवाल आने वाले हैं।
विशेष कोचिंग क्लास चलाकर लीक किए बॉटनी और जूलॉजी के सवाल
सीबीआई की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मनीषा मंधारे ने मुख्य परीक्षा से ठीक पहले पुणे शहर में एक स्पेशल कोचिंग क्लास का संचालन किया था। इस गुप्त कोचिंग में उन्होंने आने वाले छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के वे सभी महत्वपूर्ण सवाल पहले ही नोट करवा दिए थे, जो परीक्षा में आने वाले थे। जांच में यह भी तथ्य सामने आया है कि मंधारे ने पुणे से ही पहले गिरफ्तार हो चुकीं ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे के जरिए नीट की परीक्षा देने वाले कई अमीर स्टूडेंट्स को जाल में फंसाया और उन्हें मोटी रकम के बदले अपनी इस विशेष कोचिंग क्लास में एडमिशन दिलवाया था।
देश के कई शहरों से 9 आरोपी गिरफ्तार, नांदेड़ में छापेमारी
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस बड़े अंतरराज्यीय पेपर लीक रैकेट का पर्दाफाश करते हुए अब तक देश की राजधानी दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर जैसे बड़े शहरों से कुल 9 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। सीबीआई की एक विशेष टीम ने रविवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ इलाके में एक अन्य मुख्य संदिग्ध आरोपी अश्विनी भाऊराव कदम से जुड़े एक आलीशान फ्लैट पर भी छापेमारी की कार्रवाई की और वहां से कई दस्तावेज बरामद किए। जांच एजेंसी के मुताबिक, मनीषा मंधारे और मनीषा वाघमारे ने मिलकर छात्रों और उनके लाचार माता-पिता से लीक पेपर देने के एवज में लाखों-करोड़ों रुपए की भारी-भरकम रकम वसूली थी। बाद में मनीषा वाघमारे ने अपने अन्य रसूखदार कॉन्टेक्ट्स का इस्तेमाल करके इस लीक पेपर को और भी कई लोगों तक पहुंचाया था। आपको बता दें कि मनीषा वाघमारे को पुलिस ने बीते 14 मई को गिरफ्तार किया था।
लातूर का केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी है इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि मनीषा वाघमारे और इस पूरे पेपर लीक कांड के मुख्य मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी से रिमांड के दौरान हुई बेहद कड़ी पूछताछ के आधार पर ही शिक्षिका मनीषा मंधारे की कूटनीतिक गिरफ्तारी संभव हो सकी है। प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी महाराष्ट्र के लातूर का एक प्रसिद्ध chemistry प्रोफेसर है और वह पिछले कई सालों तक एनटीए के नीट पेपर सेटिंग से जुड़े बेहद गोपनीय पैनल का एक सक्रिय सदस्य रहा था। एजेंसी के मुताबिक, मास्टरमाइंड कुलकर्णी ने अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते में ही अपने निजी आवास पर कुछ चुनिंदा छात्रों की एक बेहद स्पेशल क्लास ली थी, जिसमें उसने छात्रों को वे सभी सवाल, उनके विकल्प (ऑप्शंस) और सटीक जवाब रटवा दिए थे, जो बाद में मुख्य एग्जाम में हूबहू पूछे गए थे। प्रोफेसर कुलकर्णी की कस्टडी के बाद अब सीबीआई संदिग्ध खरीदारों और फायदा उठाने वाले छात्रों की सूची बनाकर उनसे भी पूछताछ कर रही है।
एनटीए में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, आईआरएस अधिकारी आकाश जैन बने जॉइंट डायरेक्टर
नीट परीक्षा को लेकर पूरे देश में मचे भारी बवाल और चौतरफा किरकिरी के बीच केंद्र सरकार ने एक्शन मोड में आते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के भीतर एक बहुत बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर दिया है। सरकार ने एजेंसी की साख को दोबारा बहाल करने के लिए चार वरिष्ठ और कड़क अधिकारियों की नई नियुक्तियां की हैं। इसके तहत वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगढिया को तुरंत प्रभाव से एनटीए का नया जॉइंट डायरेक्टर (संयुक्त निदेशक) नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही दो अन्य महिला अधिकारियों अनुजा बापट और रुचिता विज को भी एनटीए में जॉइंट सेक्रेटरी (संयुक्त सचिव) के महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है। इन सभी अधिकारियों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से अगले पांच साल या सरकार के अगले आदेश तक जारी रहेगा।
3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को हुई रद्द और अब 21 जून को रीएग्जाम
उल्लेखनीय है कि देश की यह प्रतिष्ठित नीट-यूजी परीक्षा बीते 3 मई को देश के 551 प्रमुख शहरों और विदेशों में बनाए गए 14 विशेष केंद्रों पर एक साथ आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में देश के करीब 23 लाख से अधिक होनहार उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, 7 मई की शाम को पहली बार परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और पेपर लीक होने की प्राथमिक सूचना मिली थी, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंप दी गई। इसके बाद 12 मई को सरकार ने इस पूरी परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द करने का बड़ा फैसला लिया और छात्रों के हित में आगामी 21 जून को दोबारा से रीएग्जाम (पुनः परीक्षा) कराने की तारीखों का ऐलान किया।
एनटीए को पूरी तरह भंग करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर भी पहुंच गया है। डॉक्टरों के एक बड़े संगठन ‘यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट’ (यूडीएफ) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक और बार-बार एग्जाम कैंसिल होने के इस राष्ट्रीय मुद्दे पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को पूरी तरह से भंग करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दी है। एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड रितु रेनीवाल और एडवोकेट महेंद्र कुमावत के माध्यम से दायर की गई इस याचिका में अदालत से एक विशेष रिट जारी करने की पुरजोर मांग की गई है, जिसके तहत केंद्र सरकार को यह सख्त निर्देश दिया जाए कि वह एनटीए को तुरंत भंग करे और उसकी जगह संसद से पारित एक मजबूत कानून के आधार पर एक नई पारदर्शी ‘नेशनल टेस्टिंग बॉडी’ का गठन करे। याचिका में यह भी मांग की गई है कि देश में नेशनल लेवल की सभी परीक्षाओं को पूरी तरह से सुरक्षित और बिना किसी पेपर लीक के आयोजित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए।
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