एजेंसी, भोपाल। MP Night Duty Salary Bill : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार राज्य के संगठित और असंगठित क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी राहत देने जा रही है। प्रदेश सरकार लगभग 5 दशक पुराने और अप्रासंगिक हो चुके 5 श्रम कानूनों को पूरी तरह से समाप्त कर उनके स्थान पर एक अत्याधुनिक और व्यावहारिक नया कानून लाने की तैयारी में है। इस क्रांतिकारी बदलाव के लिए राज्य सरकार ‘एमपी कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कप्लेसेज 2026’ विधेयक तैयार कर चुकी है, जिसे 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस नए कानून के लागू होने से प्रदेश में कामकाजी महिलाओं और पुरुषों की सुरक्षा, वेतनमान और कार्यशैली में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
रात में 6 घंटे की ड्यूटी दिन के 9 घंटे के बराबर, मिलेगी ज्यादा सैलरी
इस नए संशोधन विधेयक में सबसे बड़ा और आकर्षक प्रावधान रात की पाली यानी नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के वित्तीय हितों को ध्यान में रखकर किया गया है। नए कानून के ड्राफ्ट के अनुसार, अब दिन के मुकाबले रात के समय अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को नियोक्ता यानी कंपनियों द्वारा ज्यादा सैलरी का भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके लिए सरकार ने एक बेहद अनोखा पैमाना तय किया है, जिसके तहत रात के समय की गई 1 घंटे की ड्यूटी को दिन के समय की 1.5 घंटे की ड्यूटी के बराबर माना जाएगा। इसका सीधा गणित यह है कि यदि कोई कर्मचारी रात में केवल 6 घंटे की ड्यूटी करता है, तो उसे दिन की 9 घंटे की लंबी ड्यूटी के बराबर पूरी सैलरी दी जाएगी।
महिला और पुरुष कर्मचारियों की सुरक्षा और आवागमन की जिम्मेदारी
राज्य सरकार रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मियों की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील है। नए संशोधन विधेयक में यह कड़ा कानूनी प्रावधान शामिल किया गया है कि यदि कोई कंपनी या संस्थान रात के समय महिला या पुरुष कर्मचारियों को काम पर बुलाता है, तो उनकी संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सीधे नियोक्ता की होगी। इसके साथ ही, कर्मचारियों को घर से दफ्तर लाने और काम खत्म होने के बाद सुरक्षित वापस घर छोड़ने के लिए विश्वसनीय परिवहन और वाहनों की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से संस्थान को अपनी लागत पर करनी होगी। ऐसा न करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अब 24 घंटे खुलेंगे
मध्य प्रदेश को व्यापार और पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर चमकाने के लिए सरकार इस नए विधेयक के माध्यम से ‘नाइट लाइफ’ और 24 घंटे व्यापार की अवधारणा को धरातल पर उतारने जा रही है। नए कानून के तहत अब राज्य भर के रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल, मॉल और अन्य प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को दिन-रात यानी 24 घंटे खुला रखने की वैधानिक अनुमति देने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही, देश भर से आने वाले रेल यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशनों के आस-पास स्थित दुकानों, होटलों और भोजनालयों को भी रात में निर्धारित समय पर बंद करने की पुरानी बाध्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।
‘गिग वर्कर्स’ को मिलेगा कानूनी कवच, कंपनियों के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
आधुनिक दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, फूड डिलीवरी और कूरियर सप्लाई जैसे डिजिटल माध्यमों से जुड़कर काम करने वाले लाखों युवाओं को, जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘गिग वर्कर्स’ कहा जाता है, सरकार पहली बार इस नए कानून के दायरे में लेकर आ रही है। इस ऐतिहासिक कदम से जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर और एमेजन जैसी कंपनियों में काम करने वाले अस्थाई डिलीवरी बॉयज और युवाओं को मजबूत कानूनी और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त होगी। नए कानून के लागू होने के बाद इन सभी कंपनियों के लिए सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर डिजिटल रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। साथ ही कंपनियों को अपने पोर्टल पर यह प्रमाणित स्व-घोषणा देनी होगी कि वे इन श्रम कानूनों और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े नियमों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं।
व्यापारियों के लिए ‘एक बार पंजीकरण’ की अनूठी सुविधा और यूनिक आईडी नंबर
नए ‘एमपी कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कप्लेसेज’ के तहत केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि उद्योगपतियों और व्यापारियों को भी इंस्पेक्टर राज और प्रशासनिक जटिलताओं से बड़ी मुक्ति दी जा रही है। अब व्यापारियों को अपने संस्थानों के संचालन के लिए हर साल या बार-बार नए पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराने के झंझट से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी। नए नियम के अनुसार, किसी भी व्यापारिक संस्थान को केवल एक बार ही अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसे हमेशा के लिए वैध और मान्यता प्राप्त माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, राज्य के प्रत्येक व्यावसायिक प्रतिष्ठान को सरकार द्वारा एक विशिष्ट ‘युकिक आईडी नंबर’ आवंटित किया जाएगा, जिसमें उस संस्थान का पूरा डिजिटल विवरण दर्ज रहेगा।
कागजी गलतियों पर जेल की जगह केवल जुर्माना, गंभीर लापरवाही पर सख्त सजा
व्यापार सुगमता यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नए कानून में दंडात्मक प्रक्रियाओं का भी सरलीकरण किया है। अक्सर देखा जाता था कि छोटी-मोटी कागजी कमी, लिपिकीय त्रुटि या तकनीकी गलती के कारण छोटे व्यापारियों को अदालतों और जेल के चक्कर काटने पड़ते थे। नए विधेयक में प्रावधान किया गया है कि ऐसी छोटी और अनजाने में हुई गलतियों के लिए सीधे जेल भेजने या मुकदमा चलाने के स्थान पर केवल आर्थिक जुर्माने का प्रावधान कर राहत दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी संस्थान में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर लापरवाही पाई जाती है या जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उस स्थिति में दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान पूर्ववत जारी रहेगा।
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