एजेंसी, भोपाल। MP CM Mohan Yadav on SIR : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर कड़ा एतराज जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी से खुद उनका अपना राजनीतिक कुनबा और गठबंधन नहीं संभल रहा है, लेकिन वे अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अपने ही सहयोगियों की गिरेबान में हाथ डालते हुए उनकी गर्दन दबाने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत दी कि वह संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर अनर्गल सवाल खड़े करने के बजाय अपने आंतरिक अंतर्विरोधों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करे।
राहुल गांधी द्वारा जिस प्रकार की भाषा बोली गई, वह सारी सीमाओं को तोड़ने वाली भाषा है।#RahulexposedbyEC pic.twitter.com/0Np7PuaUB6
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 27, 2026
विपक्षी गठबंधन में दरार और अखिलेश यादव के बहाने कांग्रेस पर तंज
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के मौजूदा सियासी परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन पूरी एकजुटता और स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि दूसरी ओर यूपीए यानी विपक्षी खेमे में आपसी अविश्वास का माहौल है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बढ़ती खींचतान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जब रायबरेली का दौरा करते हैं तो कांग्रेस के नेता बदले की भावना से उनके गृह क्षेत्र सैफई में सक्रियता दिखाने की बात कहने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने साथ खड़े सहयोगी दलों के नेताओं का सम्मान करने के बजाय उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने और हाशिए पर धकेलने का काम कर रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के पुराने और वरिष्ठ नेता लगातार पार्टी छोड़कर दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं।
एसआईआर पर कांग्रेस के बयानों को बताया नाच न जाने आंगन टेढ़ा
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे धांधली के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस की स्थिति पूरी तरह से नाच न जाने, आंगन टेढ़ा जैसी हो चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सबसे युवा राष्ट्र है, जहां संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखना सत्ता और विपक्ष दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के पुराने विवादित राजनीतिक बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाना हो, बालाकोट एयर स्ट्राइक के सबूत मांगना हो या फिर ‘चौकीदार चोर’ का अनर्गल नारा देना हो, राहुल गांधी को अपनी गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी के चलते पहले भी देश और सर्वोच्च न्यायालय के सामने माफी मांगनी पड़ी है।
चुनाव आयोग की स्थिति स्पष्ट, मुख्यमंत्री ने मांगी राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है। मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 के घोषणापत्र और एसआईआर के सभी निर्णयों को लेकर आयोग ने पारदर्शी तरीके से अपनी बात देश के सामने रखी है। उन्होंने कहा कि जब आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी प्रक्रियाएं स्थापित नियमों के तहत ही संचालित हो रही हैं, तो इसके बावजूद बार-बार संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर उंगली उठाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था पर झूठे आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
जहां चुनाव जीतती है कांग्रेस वहां खामोश, हारने पर संस्थाओं पर फोड़ती है ठीकरा
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के राजनीतिक आचरण को दोहरे मापदंड का जीता-जागता प्रमाण बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केरल, हिमाचल प्रदेश या तेलंगाना में कांग्रेस को चुनावी सफलता मिली थी, तब उसने कभी भी मतदान प्रणाली या चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल क्यों नहीं खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में जनता कांग्रेस को नकार चुकी है और जहां पार्टी लगातार सत्ता से बाहर है, वहां आत्ममंथन करने के बजाय चुनावी प्रक्रिया पर ठीकरा फोड़ना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना सत्ता के रहना कांग्रेस की कार्यशैली के विपरीत है, लेकिन देश की जागरूक जनता उनके इस अवसरवादी रुख को भली-भांति समझ चुकी है।
राहुल गांधी के इस्तीफे की मांग और विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी का पाठ
राहुल गांधी की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके इस्तीफे की मांग तक कर डाली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद समझदार नेताओं को आगे आकर अपने नेतृत्व से कड़े सवाल पूछने चाहिए। यदि पार्टी का जनाधार लगातार खिसक रहा है और नेता पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं, तो इसकी मूल वजह खुद उनके नेतृत्व में छिपी है। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को अपने ‘राजकुमार’ को जमीनी हकीकत समझानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष के नेता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील होती है, इसलिए उस पद पर बैठे व्यक्ति से हमेशा जिम्मेदार, गंभीर और मर्यादित आचरण की अपेक्षा की जाती है।
हेमंत खंडेलवाल ने गिनाए कानूनी प्रावधान, जनता में भ्रम फैलाने का लगाया आरोप
प्रेस वार्ता में मौजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी एसआईआर पर कांग्रेस के रुख को पूरी तरह भ्रामक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को देश के तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया था कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। किसी भी संस्था में आंतरिक विचार-विमर्श एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जिसे विवाद का रूप देकर राजनीतिक रोटियां सेंकना अनुचित है। खंडेलवाल ने संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है और फॉर्म-6 में कोई भी मनमाना बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा मौजूद है, इसके बावजूद कांग्रेस सिर्फ जनता में अविश्वास और भ्रम का माहौल पैदा करने की साजिश रच रही है। इस दौरान भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया भी मंच पर उपस्थित रहे।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी पर क्या निशाना साधा?
उत्तर 1: सीएम मोहन यादव ने कहा कि राहुल गांधी से खुद का राजनीतिक कुनबा और विपक्षी गठबंधन नहीं संभल रहा है, इसलिए वे अपनी नाकामी छिपाने के लिए चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भ्रामक सवाल उठा रहे हैं।
प्रश्न 2: मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच बढ़ती खींचतान का उदाहरण क्यों दिया?
उत्तर 2: यह साबित करने के लिए कि यूपीए गठबंधन में आपसी अविश्वास है; सीएम ने कहा कि कांग्रेस अपने ही सहयोगियों की गिरेबान में हाथ डालकर उनकी गर्दन दबाने की राजनीति कर रही है।
प्रश्न 3: चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री ने ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ वाली कहावत का उपयोग क्यों किया?
उत्तर 3: सीएम ने कहा कि जिन राज्यों (जैसे केरल या हिमाचल) में कांग्रेस जीतती है, वहां उसे चुनाव प्रक्रिया ठीक लगती है, लेकिन जहां वह हारती है, वहां अपनी कमियां सुधारने के बजाय वह चुनाव आयोग पर झूठा ठीकरा फोड़ती है।
प्रश्न 4: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मतदाता सूची के फॉर्म-6 डिक्लेरेशन पर कांग्रेस के सवालों का क्या जवाब दिया?
उत्तर 4: खंडेलवाल ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में कोई भी मनमाना बदलाव नहीं किया है और एसआईआर के सभी फैसले सर्वसम्मति और पूर्ण वैधानिक अधिकार से लिए गए हैं।
प्रश्न 5: एसआईआर विवाद को लेकर सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी से सार्वजनिक तौर पर क्या मांग की है?
उत्तर 5: मुख्यमंत्री ने कहा कि जब चुनाव आयोग अपनी पूरी स्थिति पारदर्शी रूप से स्पष्ट कर चुका है, तो लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन करने और जनता में भ्रम फैलाने के लिए राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
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