एजेंसी, भोपाल। MP cabinet decisions today : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में आयोजित हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, जनहित और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई ऐतिहासिक और दूरगामी फैसलों पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। इस हाई-लेवल बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को एक बड़ी खुशखबरी देते हुए बताया कि लंबे समय से मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच विवाद का कारण बनी नर्मदा नदी पर स्थित सरदार सरोवर बांध परियोजना से जुड़े वित्तीय मतभेदों को पूरी तरह सुलझा लिया गया है। इस नए और महत्वपूर्ण समझौते के तहत अब मध्य प्रदेश सरकार आपसी सहमति से गुजरात सरकार को 217 करोड़ रुपए की बकाया राशि का भुगतान करेगी। इसके साथ ही इस कैबिनेट बैठक में राज्य के शासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए आईटी पार्कों के निर्माण, पर्यावरण संरक्षण के लिए नगर वनों के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए हैं।
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गायन के साथ आज मंत्रालय में कैबिनेट बैठक प्रारंभ हुई।#CabinetMP pic.twitter.com/cWz0Z6J1xN
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) July 8, 2026
प्रदेश में 10 वर्षों बाद शुरू हुई पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया, मंत्रालय में गूंजे ढोल-नगाड़े
मंत्रिपरिषद की इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान सभी कैबिनेट मंत्रियों ने राज्य में लगभग 10 साल के एक लंबे अंतराल के बाद सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को दोबारा बहाल करने के ऐतिहासिक निर्णय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया। इस बड़ी सौगात से खुश होकर जैसे ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे, वैसे ही उनके स्वागत में वहां ढोल-नगाड़े बजने लगे। मंत्रालय कर्मचारी संघ, कर्मचारी कल्याण समिति और अजाक्स के पदाधिकारियों सहित सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े और उन्हें गुलदस्ता भेंट कर धन्यवाद दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए कि प्रदेश के सभी सरकारी विभागों और जिला स्तरों पर इस पदोन्नति की पूरी कार्रवाई को अत्यंत पारदर्शी और नियमानुसार सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि कर्मचारी कल्याण के लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और राज्य का कोई भी योग्य और पात्रता रखने वाला शासकीय कर्मचारी या अधिकारी इस पदोन्नति के लाभ से किसी भी परिस्थिति में वंचित नहीं रहेगा। इसके साथ ही, मोहन यादव कैबिनेट ने देश की सुरक्षा और न्याय प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक – 2026 के मसौदे को भी अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों के लिए 39.125 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज
कैबिनेट ने बुंदेलखंड क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के सुचारू और तीव्र गति से क्रियान्वयन के लिए एक बड़ा मानवीय फैसला लिया है। इसके अंतर्गत पन्ना जिले के डूब क्षेत्र में आने वाले 8 गांवों के परिवारों के लिए विशेष विस्थापन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन पैकेज का लाभ देने के लिए कट-ऑफ तारीख को आगे बढ़ने की मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से अब परियोजना के दायरे में आने वाले नए संभावित 313 प्रभावित परिवारों को भी विशेष पुनर्वास पैकेज में शामिल किया जाएगा। इन नए परिवारों को दी जाने वाली कुल 39.125 करोड़ रुपए की अनुदान राशि को मिलाकर, सरकार ने इस पूरी परियोजना के सुचारू संचालन के लिए कुल 439 करोड़ 325 लाख रुपए के भारी-भरकम बजट के व्यय को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
कट-ऑफ तारीख में बदलाव से प्रभावित परिवारों को मिली बड़ी राहत
गौरतलब है कि इससे पहले डूब क्षेत्र से प्रभावित होने वाले गांवों की कृषि भूमि के अधिग्रहण के लिए भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा-11 के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि 21 जनवरी 2022 को ही आधार या कट-ऑफ मानते हुए कुल 1890 पात्र परिवारों की पहचान की गई थी। इसके बाद इन्हीं प्रभावित गांवों की आबादी भूमि तथा निजी जमीनों पर बने मकानों के उचित मुआवजा निर्धारण के लिए धारा-11 के तहत मध्य प्रदेश के आधिकारिक राजपत्र में 15 मार्च 2024 को प्रकाशन किया गया था। इस प्रक्रिया के बाद क्षेत्र के प्रभावित विस्थापित परिवारों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा लगातार मुआवजे और कट-ऑफ तारीख में संशोधन की मांग की जा रही थी। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए और निर्माण कार्य को बिना किसी बाधा के तेजी से पूरा करने के उद्देश्य से सरकार ने आबादी भूमि व मकानों के लिए 15 मार्च 2024 की तिथि को नया आधार माना है, जिससे 313 अतिरिक्त परिवारों को भी साढ़े बारह लाख रुपए प्रति परिवार के मान से विशेष पुनर्वास पैकेज का लाभ मिलना पूरी तरह तय हो गया है।
रूंज और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं के विस्थापितों को भी मिलेगा अतिरिक्त मुआवजा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के समान ही राज्य की दो अन्य प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के प्रभावितों के हक में भी बड़ा फैसला सुनाया है। मंत्रिपरिषद द्वारा पन्ना जिले की रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से विस्थापित होने वाले कुल 730 परिवारों के बेहतर पुनर्वास के लिए प्रति परिवार अतिरिक्त 7.5 लाख (साढ़े सात लाख) रुपए की विशेष वित्तीय सहायता राशि देने की मंजूरी दी गई है। इस मद में कुल 54 करोड़ 75 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे, जो कि रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए पहले से स्वीकृत प्रशासकीय बजट राशि 269 करोड़ 79 लाख रुपए के अलावा होगी। इसी प्रकार, मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना के कारण डूब क्षेत्र में आने वाले 1450 प्रभावित परिवारों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पूर्व में निर्धारित एकमुश्त पुनर्वास अनुदान राशि 5 लाख रुपए प्रति परिवार को बढ़ाकर अब केन-बेतवा परियोजना की तर्ज पर कुल 12.50 लाख रुपए प्रति परिवार करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रभावित परिवार को अतिरिक्त 7.5 लाख (साढ़े सात लाख) रुपए का विशेष पैकेज दिया जाएगा, जिसके लिए कुल 108 करोड़ 75 लाख रुपए के अतिरिक्त बजट को मंजूरी दी गई है। यह राशि मझगांव परियोजना के लिए भूमि एवं परिसंपत्ति अधिग्रहण के लिए पूर्व से स्वीकृत कुल राशि 364 करोड़ 56 लाख रुपए के अतिरिक्त देय होगी।
मध्य प्रदेश के हर जिले में स्थापित होंगे अत्याधुनिक आईटी पार्क
कैबिनेट बैठक की समाप्ति के बाद राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री चैतन्य काश्यप ने सरकार के आर्थिक और तकनीकी विजन की जानकारी मीडिया से साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के मौजूदा डेटा सेंटर को आधुनिक तकनीकों से लैस और अपग्रेड करने के लिए 800 करोड़ रुपए की एक वृहद कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए छोटे-छोटे आईटी पार्क विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इन पार्कों की स्थापना के लिए सरकार सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े उद्योगों और स्टार्टअप्स को रियायती दरों पर भूमि और अन्य आवश्यक ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। इसके अतिरिक्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत उज्जैन के समीप डोंगला में स्थापित प्रसिद्ध खगोलीय वेधशाला में आधुनिक अनुसंधान और विकास कार्यों को निरंतर जारी रखने के लिए 39 करोड़ रुपए के विशेष व्यय को भी कैबिनेट ने अपनी सहमति दे दी है।
‘नमो हरित नगर योजना’ और अनाज के ई-ऑक्शन पर बड़ा निर्णय
पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने की दिशा में नगरीय विकास विभाग के सहयोग से एक नई ‘नमो हरित नगर योजना’ को कैबिनेट द्वारा हरी झंडी दिखाई गई है। इस दूरगामी पर्यावरण अनुकूल योजना के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों की अवधि में राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में कुल 100 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से सुंदर ‘नगर वन’ विकसित किए जाएंगे, जिनकी देखरेख और रखरखाव का पूरा वित्तीय खर्च राज्य सरकार खुद उठाएगी। इसके अलावा, किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर खरीदे गए अनाज के बेहतर प्रबंधन के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार के कोटे और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के आवंटन के बाद जो भी सरप्लस या अतिरिक्त अनाज बचेगा, उसे राज्य सरकार अपने स्तर पर आधुनिक ई-ऑक्शन यानी इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के माध्यम से खुले बाजार में बेचेगी, ताकि अनाज की बर्बादी और भंडारण की गंभीर समस्या का स्थाई समाधान हो सके।
48 लाख ग्रामीण आबादी को मुफ्त रजिस्ट्री और डॉक्टरों की सीधी भर्ती को मंजूरी
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के तहत बनने वाले ग्रामीण मकानों के मालिकाना हक दस्तावेजों की रजिस्ट्री पर लिए जाने वाले पंचायत उपकर (सेस) को पूरी तरह से माफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस टैक्स माफी के कारण पंचायतों को होने वाले वित्तीय नुकसान की पूरी भरपाई राज्य सरकार अपने खजाने से करेगी, जिससे मध्य प्रदेश के करीब 48 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लंबे समय से चली आ रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को युद्धस्तर पर दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सीधे अपने स्तर पर भर्ती करने के विशेष अधिकार दे दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में लोक सेवा आयोग यानी पीएससी के माध्यम से डॉक्टरों के पद खाली रह गए हैं, वहां अब स्वास्थ्य विभाग स्वयं वॉक-इन-इंटरव्यू या अन्य त्वरित माध्यमों से सीधी भर्ती करेगा। हालांकि, इन नवनियुक्त विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए यह अनिवार्य शर्त रखी गई है कि उन्हें चयन के बाद कम से कम शुरुआती 3 वर्ष तक अनिवार्य रूप से उसी आवंटित ग्रामीण या चिन्हित स्थान पर अपनी सेवाएं देनी होंगी। शिक्षा के क्षेत्र में छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को मुफ्त स्कूटी वितरण करने की लोकप्रिय योजना को भी आगामी सत्रों में पूर्ववत जारी रखने का निर्णय लिया है।
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