एजेंसी, भोपाल। MP Assembly Monsoon Session : मध्यप्रदेश की राजनीति और विधायी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत ही बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। मध्यप्रदेश शासन की आगामी कार्य योजनाओं और विधायी कार्यों को गति देने के लिए राज्य विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तारीखों का आधिकारिक रूप से एलान कर दिया गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश का यह महत्वपूर्ण मानसून सत्र आगामी बीस जुलाई से शुरू होने जा रहा है। यह सत्र चौबीस जुलाई तक चलेगा, जिसके तहत महज चार दिनों की इस अल्पावधि के भीतर राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों, वित्तीय प्रस्तावों और जन-कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े विधायी प्रस्तावों पर सदन के भीतर गहन मंथन करेगी।
महज चार दिनों की संक्षिप्त अवधि में कई अहम विधेयकों पर होगी चर्चा
इस बार का यह चार दिवसीय संक्षिप्त मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद सरगर्मियों भरा और हंगामेदार रहने के पूरे आसार जताए जा रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों और राजनैतिक विश्लेषकों से मिली जानकारी के मुताबिक, डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार इस बार के सत्र के दौरान प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लागू करने को लेकर एक बहुत ही बड़ा, ऐतिहासिक और दूरगामी विधेयक सदन के पटल पर चर्चा और मंजूरी के लिए रख सकती है। यदि सरकार इस दिशा में कदम आगे बढ़ाती है, तो इस विषय पर सदन के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच भारी राजनीतिक बहस और तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।
किसानों की दुर्दशा और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
दूसरी तरफ, राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस छोटे से सत्र के भीतर सरकार को चौतरफा घेरने और जनहित के मुद्दों पर जवाब मांगने के लिए अपनी कूटनीतिक रणनीति पूरी तरह से तैयार कर ली है। विपक्ष इस बार बेहद आक्रामक मूड में नजर आ रहा है और उसने साफ कर दिया है कि वह कम समय होने के बावजूद जनता से जुड़े गंभीर और संवेदनशील मुद्दों को पूरी प्रखरता के साथ सदन में उठाएगा। विपक्षी नेताओं का मुख्य ध्यान प्रदेश के किसानों की विभिन्न समस्याओं, फसलों के उचित दाम, खाद-बीज की उपलब्धता और राज्य में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित रहेगा, जिन पर वे सरकार से सीधे जवाब की मांग करेंगे।
छोटे सत्र के भीतर बड़े नीतिगत फैसलों पर टिकी सब की निगाहें
विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों में राजनीतिक हलचल और बैठकें बहुत तेज हो गई हैं। जहां एक तरफ सत्ताधारी दल के रणनीतिकार कम से कम समय में अपने सभी जरूरी और लंबित कानूनी विधेयकों को बिना किसी व्यवधान के पारित कराने की जुगत में लग गए हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी विधायक जनता की आवाज बनकर सरकार की घेराबंदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। महज चार दिनों की इस छोटी सी अवधि में होने वाले बड़े नीतिगत फैसलों और विधायी बदलावों पर इस समय पूरे मध्यप्रदेश की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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