एजेंसी, नई दिल्ली। Mann Ki Baat 135th Episode : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने बेहद लोकप्रिय और ऐतिहासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 135वें संस्करण के माध्यम से देश की जनता को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पूरे राष्ट्र को आश्वस्त करते हुए गर्व के साथ कहा कि आज हमारा देश जल, थल और नभ यानी समुद्र से लेकर आसमान तक हर मोर्चे पर पूरी तरह सुरक्षित और चाक-चौबंद है। देश की इस संप्रभुता और सुरक्षा को मजबूत करने में हमारे वैज्ञानिकों का बहुत बड़ा हाथ है। इसी सिलसिले में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने इसी महीने भारत में ही निर्मित लंबी दूरी की जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल का बेहद सफल और ऐतिहासिक परीक्षण किया है, जो देश की सैन्य ताकत को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है।
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— Narendra Modi (@narendramodi) June 28, 2026
विमानन क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और मेड इन इंडिया की गूंज
प्रधानमंत्री ने देश को जानकारी देते हुए बताया कि जून के महीने में ही भारत ने विमानन और एरोस्पेस क्षेत्र में एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। सरकार के महत्वाकांक्षी मेड इन इंडिया अभियान के तहत तैयार किए गए उन्नत सी-295 विमान ने आसमान में अपनी पहली सफल उड़ान पूरी कर ली है। वर्तमान समय में रक्षा उत्पादन को गति देने के लिए ऐसे 40 से भी अधिक विमानों का निर्माण पूरी तरह से भारत में ही किया जा रहा है, जो देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत उदाहरण है।
अहमदाबाद विश्व योगासन चैम्पियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन
योग और शारीरिक कल्याण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दुनिया भर के 2500 से अधिक विभिन्न स्थानों पर योग के कई शानदार कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही, भारत ने अहमदाबाद में आयोजित हुई विश्व योगासन चैम्पियनशिप में असाधारण और ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक अपने नाम किए हैं। इस विशाल प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम रखते हुए 102 स्वर्ण पदक भी जीते हैं, जिसकी बदौलत भारत पदक तालिका में शीर्ष स्थान पर रहा है।
आर्थिक संकट का सामूहिक सामना और नागरिकों द्वारा पुराने सोने की रीसाइक्लिंग
अपने संबोधन में आर्थिक प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने बीते दिनों देशवासियों से कुछ समय के लिए नया सोना न खरीदने, विदेशी यात्राओं को टालने और वाहनों के लिए कार पूलिंग अपनाने की भावुक अपील की थी। उन्होंने देश के हर एक नागरिक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने उनकी इस बात का न केवल दिल से समर्थन किया, बल्कि इस संकट से उबरने में पूरा सहयोग भी दे रहे हैं। देश के कई परिवारों ने यह अनुकरणीय निर्णय लिया है कि वे शादियों में नया सोना खरीदने की बजाय जरूरत पड़ने पर पुराने सोने को ही रीसाइकल करेंगे, जो सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।
असम की हरगिला आर्मी ने अंधविश्वास को हराकर बदली समाज की पुरानी सोच
पूर्वोत्तर राज्यों की प्रेरक कहानियों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने असम में पाए जाने वाले एक अत्यंत दुर्लभ पक्षी हरगिला का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रकृति को स्वच्छ रखने में यह पक्षी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से इसे बेहद अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने घरों के आसपास देखना पसंद नहीं करते थे और अक्सर उन पेड़ों को भी काट देते थे जिन पर इनके घोंसले होते थे। इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने एक बड़ा संकल्प लिया और विज्ञान के आधार पर महिलाओं को जागरूक करना शुरू किया। देखते ही देखते हजारों ग्रामीण महिलाएं इस पर्यावरण संरक्षण अभियान से जुड़ गईं और आज उन्हें पूरे देश में हरगिला आर्मी के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने समाज से अंधविश्वास को खत्म कर दिखाया।
मेघालय के ऐतिहासिक जीवित रूट ब्रिज को यूनेस्को धरोहर में शामिल कराने की कवायद
प्राकृतिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण के अनोखे तालमेल पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने मेघालय के विश्व प्रसिद्ध रूट ब्रिज का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये जीवित पुल कुछ दिनों या सालों में नहीं बनते, बल्कि इन्हें तैयार होने में कई दशक का समय लग जाता है। वहां की स्थानीय जनजातियों द्वारा रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे एक निश्चित दिशा दी जाती है और इन जड़ों को बहती जल-धाराओं के पार ले जाया जाता है। समय बीतने के साथ ये जड़ें इतनी मजबूत हो जाती हैं कि एक विशाल और टिकाऊ पुल का रूप ले लेती हैं। मनुष्य और प्रकृति के इस अद्भुत रिश्ते को देखते हुए अब भारत सरकार ने मेघालय के इन अद्वितीय रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क की सूची में शामिल कराने के लिए आधिकारिक आवेदन प्रस्तुत किया है।
नगालैंड में खेलों का नया दौर और बच्चों के लिए विशेष फुटबॉल लीग
खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने नगालैंड में आयोजित होने वाली दो बेहद अनूठी खेल लीगों का उदाहरण दिया, जो पूरे देश को प्रेरित कर सकती हैं। इसमें से पहली है नगालैंड बेबी लीग, जो 5 से 12 वर्ष के छोटे बच्चों के लिए आयोजित की जाने वाली एक असाधारण प्रतियोगिता है, जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों एक साथ खेलकर अपनी प्रतिभा और रफ्तार को निखारते हैं। इस सफल लीग को चलते हुए 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसके साथ ही, वहां नगालैंड विमेन फुटसल लीग का भी सफल संचालन किया जा रहा है, जिसे बंद मैदान के भीतर 5 खिलाड़ियों के साथ खेला जाता है, जिससे खिलाड़ियों में तेजी से निर्णय लेने की क्षमता और व्यक्तित्व का विकास होता है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ में अनोखी पहल और ग्रामीणों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था
सामाजिक सुरक्षा और मानवता का एक सुंदर उदाहरण पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के अंतर्गत आने वाले बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार की जमकर प्रशंसा की। इस जागरूक परिवार ने अपने घर में विवाह के पावन अवसर पर फिजूलखर्ची करने के बजाय, अपने पूरे गांव के लगभग 3500 लोगों के लिए एक विशेष दुर्घटना बीमा की अनूठी व्यवस्था की। इस जन-कल्याणकारी पहल के अंतर्गत गांव के प्रत्येक व्यक्ति को 1 लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कवर प्रदान किया गया है, जो समाज के लिए एक अत्यंत प्रेरणादायक संदेश है।
बिहार में प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है नालंदा विश्वविद्यालय
शिक्षा और बौद्धिक विमर्श की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय ने ज्ञान और शास्त्रार्थ की हमारी अत्यंत प्राचीन भारतीय परंपरा को एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। शास्त्रार्थ केवल अपनी बात को ऊपर रखने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बेहद अनुशासित तरीके से वाद-संवाद और वैचारिक मंथन करने की एक पवित्र प्रक्रिया है। इसमें पूर्ण महारत के साथ, ठोस तर्कों और प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर अपनी बात कहना अनिवार्य होता है। यह पूरी प्रक्रिया हमें दूसरों के विचारों को बेहद धैर्यपूर्वक सुनने और समझने की महान सीख देती है, और खुशी की बात है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का एक मुख्य हिस्सा बनाया है।
दिल्ली में संस्कृत और आधुनिक तकनीक का संगम और एआई आधारित बी-टेक कोर्स
देश की राजधानी दिल्ली में स्थित सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी की एक अभूतपूर्व तकनीकी पहल की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह विश्वविद्यालय अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस के क्षेत्र में एक नया बी-टेक प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। यह कदम आधुनिक विज्ञान और उच्च तकनीक को भारत के पारंपरिक ज्ञान और प्राचीन समृद्ध भाषाओं से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित होगा। इस तकनीकी तालमेल से भारतीय भाषाओं के विकास के लिए नए एआई टूल्स तैयार करने में भारी मदद मिलेगी और हमारे प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथों तथा दुर्लभ पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने के कार्य को एक नई और तीव्र गति प्राप्त होगी।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ में महिलाओं ने प्लास्टिक कचरे को बनाया पर्यावरण का रक्षक
स्वच्छता अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित ब्यावरा की जागरूक महिलाओं के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। इस क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक कचरे को लगातार हटा रही हैं और उस अनुपयोगी प्लास्टिक को रिसाइकल करके बेहद मजबूत इको-ब्रिक्स में परिवर्तित कर रही हैं। पिछले कुछ महीनों के भीतर इन कर्मठ महिलाओं ने सैकड़ों किलो प्लास्टिक कचरे को रीसािकल करके उसका निर्माण कार्यों में बेहतर और रचनात्मक उपयोग सुनिश्चित किया है, जो देश के लिए वेस्ट-टू-वेल्थ का एक बेहतरीन उदाहरण है।
आगामी त्योहारों में पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प और मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग की अपील
अपने संबोधन के समापन चरण में प्रधानमंत्री ने देश के सभी नागरिकों से आगामी त्योहारों को देखते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील अपील की। उन्होंने देशवासियों से पुरजोर आग्रह किया कि वे गणेश उत्सव और अन्य त्योहारों के दौरान केवल और केवल प्राकृतिक मिट्टी से बनी हुई पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों को ही खरीदें, जिन्हें हमारे अपने स्थानीय कुम्हारों और पारंपरिक कलाकारों ने अपने हाथों से मेहनत करके तैयार किया हो। उन्होंने प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी से बनी मूर्तियों को पूरी तरह से न खरीदने की सख्त हिदायत दी, क्योंकि ये पर्यावरण और जल स्रोतों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों को सचेत किया कि वे मूर्तियां खरीदते समय यह भी ध्यान रखें कि वे किस देश में निर्मित हुई हैं, ताकि आत्मनिर्भर भारत और लोकल फॉर वोकल के संकल्प को मजबूती मिल सके।
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