ईरान और अमेरिका

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ा टकराव: ‘अमेरिकी ठिकानों पर हमले के लिए मिसाइलें और ड्रोन तैयार’, ओमान की खाड़ी में तनाव चरम पर

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एजेंसी, नई दिल्ली। Iran US War : फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने शनिवार को अमेरिका को सीधी और कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके तेल टैंकरों या कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर भीषण हमला करने से पीछे नहीं हटेगा।

मिसाइलें और ड्रोन हमले के लिए पूरी तरह तैयार

ईरान की ओर से जारी आधिकारिक बयान में आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उनकी मिसाइलों और ड्रोनों ने अमेरिकी ठिकानों को पहले ही अपने निशाने पर (Lock) ले लिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कहा गया है कि उनकी सेना केवल ‘फायर’ करने के आदेश का इंतजार कर रही है। ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके जहाजों के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता का जवाब दुश्मन के ठिकानों पर जोरदार हमले के रूप में दिया जाएगा।

अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी से भड़का ईरान

यह विवाद तब और गहरा गया जब यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरान के दो तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया है। ये टैंकर खाली थे और ईरानी बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे थे। अमेरिकी सेना के अनुसार, अप्रैल माह से अब तक वे ईरान के चार जहाजों को रोक चुके हैं और लगभग 58 कमर्शियल जहाजों का मार्ग परिवर्तित कराया गया है। अमेरिका की इस सख्त नाकाबंदी ने तेहरान को उग्र कर दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा का संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यात गुजरता है। हाल के दिनों में इस मार्ग पर अमेरिकी विध्वंसक जहाजों और ईरानी नौसेना के बीच गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी पुष्टि की है कि होर्मुज से गुजरते समय अमेरिकी जहाजों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, हालांकि वे वहां से सुरक्षित निकलने में सफल रहे।

ऊर्जा बाजार और वैश्विक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सैन्य गतिरोध और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक एलपीजी आपूर्ति पर पड़ सकता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने कमर्शियल हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें अब इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर टिकी हैं।

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