एजेंसी, नई दिल्ली। e-Zero FIR PM Modi : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के भीतर लगातार बढ़ रहे इंटरनेट आधारित अपराधों यानी साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाओं को लेकर बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। देश के नागरिकों को डिजिटल ठगी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय प्रगति बैठक की अध्यक्षता की। इस विशेष शासकीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रॉनिक जीरो फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट यानी ई-जीरो एफआईआर की आधुनिक व्यवस्था को पूरी तरह से लागू करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संपन्न हुई इस प्रशासनिक बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की डिजिटल सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत तथा अभेद्य बनाना था। प्रधानमंत्री ने बैठक में उपस्थित शीर्ष अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि वे इस संवेदनशील विषय पर देश के प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी से सीधे संवाद स्थापित करें, ताकि पूरे भारत में ई-जीरो एफआईआर की इस कल्याणकारी योजना को बेहद तेजी और कड़ाई के साथ धरातल पर उतारा जा सके।
कड़े प्रशासनिक कदमों के माध्यम से ई-जीरो एफआईआर की प्रगति की समीक्षा
देश के सभी राज्यों के मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों और मुख्य सचिवों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुई इस प्रगति बैठक में डिजिटल अरेस्ट यानी इंटरनेट के माध्यम से अवैध रूप से बंधक बनाने और साइबर ठगी से जुड़ी देश भर की शिकायतों की गहराई से समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि वे स्वयं आने वाले समय में ई-जीरो एफआईआर के क्रियान्वयन और उसकी प्रगति की निरंतर समीक्षा करेंगे। उन्होंने इस कानूनी पहल के महत्व को समझाते हुए बताया कि इन विशेष एफआईआर के दर्ज होने से देश के साइबर जांचकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों को उन शातिर अपराधियों के खिलाफ बिना किसी समय की बर्बादी के तुरंत कानूनी जांच शुरू करने में बहुत बड़ी मदद मिलती है, जिनके डिजिटल सुराग और साक्ष्य इंटरनेट की दुनिया से बहुत जल्दी गायब या नष्ट हो सकते हैं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की एक नई और क्रांतिकारी तकनीकी पहल
राजनयिक और प्रशासनिक सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इस नई ई-जीरो एफआईआर कूटनीतिक पहल की शुरुआत की गई है। यह वास्तव में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की एक बेहद आधुनिक और तकनीकी पहल है, जो इंटरनेट पर होने वाली बड़ी और प्रमाणित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः ही जीरो एफआईआर के रूप में परिवर्तित कर देती है। इस क्रांतिकारी तकनीकी व्यवस्था के लागू होने से ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए पीड़ित नागरिकों को पुलिस थानों और विभिन्न राज्यों के न्यायिक क्षेत्राधिकार की बाधाओं और चक्करों से मुक्ति मिल जाएगी। इसके साथ ही बैंकों और जांच एजेंसियों को धोखाधड़ी के जरिए ट्रांसफर किए गए पैसों के लेनदेन की जांच करने और अपराधियों के खातों को तुरंत फ्रीज यानी ब्लॉक करने में बहुत ज्यादा गति मिलेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्मों के दुरुपयोग पर प्रधानमंत्री ने जताई भारी चिंता और दिए निर्देश
प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ द्वारा जारी की गई एक आधिकारिक विज्ञप्ति और प्रेस नोट में यह साफ तौर पर कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे साधे नागरिकों को चूना लगाने और ठगी का शिकार बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्मों और सोशल मीडिया के बढ़ते अवैध दुरुपयोग पर भारी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में देश की सभी सुरक्षा और जांच एजेंसियों द्वारा आपसी समन्वय, संवेदनशीलता और पूरी समयबद्धता के साथ त्वरित कानूनी कार्रवाई करने की परम आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने बैठक में मौजूद सभी आला अधिकारियों को पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने, त्वरित एक्शन लेने और देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों, रिजर्व बैंक सहित सभी व्यावसायिक बैंकों और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों के बीच एक बेहद मजबूत तथा पारदर्शी समन्वय तंत्र स्थापित करने का सख्त आदेश दिया है।
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