एजेंसी, नई दिल्ली। Dharmendra Pradhan Resign : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और देश भर में जारी व्यापक जनआक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा राजनीतिक निर्णय लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है और अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से जारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विभिन्न छात्र संगठनों के उग्र आंदोलन के बाद यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के फलस्वरूप सीजेपी ने अपने लंबे आंदोलन को समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में तीन चरणों की बैठक के बाद बनी सहमति
दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच तीन चरणों की मैराथन वार्ता आयोजित की गई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला। वहीं सीजेपी की ओर से मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका सहित प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। वार्ता के दौरान सीजेपी ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी शर्तें लिखित रूप में स्वीकार नहीं की जातीं, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। आखिरकार सरकार द्वारा मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने के बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से आंदोलन समाप्ति का निर्णय लिया।
सीजेपी ने जताई संतुष्टि, तीन प्रमुख मांगों पर बनी बात
वार्ता के समापन के बाद सीजेपी के नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार ने उनकी तीनों मुख्य मांगों को स्वीकार कर लिया है। संगठन की प्रमुख शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद से हटना, परीक्षा में हुई धांधली से आहत होकर अपने प्राण त्यागने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान करना तथा प्रदर्शनकारी छात्रों व युवाओं के खिलाफ दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (एफआईआर) को वापस लेना शामिल था। सरकार ने आश्वासन दिया है कि आंदोलनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और दर्ज मुकदमों को निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।
इस्तीफे पर गरमाई राजनीति, विपक्ष ने बताया युवा शक्ति की जीत
शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र के बाद देश भर के सियासी गलियारों में बयानों की बाढ़ आ गई है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इसे युवाओं और बेरोजगारों के संगठित संघर्ष की ऐतिहासिक विजय बताया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति के हटने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली और नई शिक्षा नीति में सुधार की आवश्यकता है। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे नौजवानों के इंकलाब का नतीजा बताया। आम आदमी पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं की अटूट एकजुटता ने सरकार के अहंकार को तोड़ा है।
धर्मेंद्र प्रधान का बयान और जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल
अपने पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने संदेश जारी कर कहा कि देश की युवा शक्ति ही राष्ट्र का वास्तविक आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों का करियर और समय किसी राजनीतिक या कानूनी गतिरोध में न उलझे, इसी हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है। दूसरी तरफ, जैसे ही इस्तीफे और वार्ता की सफलता की खबर जंतर-मंतर पहुंची, वहां मौजूद हजारों छात्रों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए इसे लोकतंत्र, शांति और सामूहिक प्रयासों की जीत करार दिया।
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