एजेंसी, मुंबई। Bombay High Court Firecracker Ban : महाराष्ट्र में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य भर की सभी सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर पूरे साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोकले की संयुक्त खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यह रोक केवल किसी एक पर्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नवरात्रि, दिवाली, क्रिसमस और नववर्ष समेत साल भर निकलने वाले तमाम धार्मिक और सामाजिक जुलूसों पर एक समान रूप से प्रभावी होगी। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए आगाह किया कि यदि नागरिक अब भी प्रदूषण के गंभीर खतरों के प्रति सचेत नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में घनी आबादी वाले आधुनिक शहर रहने लायक नहीं बचेंगे और गैस चैंबर में तब्दील हो जाएंगे।
Firecracker ban on streets applies to all festivals throughout year: Bombay High Court
report by @Neha_Jozie
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— Bar and Bench (@barandbench) October 15, 2026
22 सितंबर के अंतरिम आदेश का दायरा पूरे साल के लिए बढ़ा
अदालत का यह फैसला दरअसल 22 सितंबर 2026 को गणेशोत्सव के दौरान जारी किए गए अंतरिम आदेश का विस्तार है। उस समय अदालत ने त्योहारों के दौरान सड़कों पर होने वाले भारी शोर और धुएं को नियंत्रित करने के लिए कुछ पाबंदियां तय की थीं। अब अदालत ने उन बंदिशों को स्थायी रूप देते हुए 365 दिनों के लिए लागू कर दिया है। ‘हाईकोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम महाराष्ट्र सरकार एवं अन्य’ शीर्षक से चल रही स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि समस्या नियमों के अभाव की नहीं, बल्कि मौजूदा कानूनों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन न होने की है। सार्वजनिक सड़कों पर डीजे साउंड सिस्टम के कानफोड़ू शोर और अंधाधुंध आतिशबाजी को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने यह कड़ा कदम उठाया है।
पटाखों के निर्माण और बिक्री पर कोई कानूनी रोक नहीं
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर स्पष्ट किया है। कोर्ट ने साफ किया कि उसने केवल सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, गलियों और रास्तों पर पटाखे फोड़ने और उपद्रव करने पर पाबंदी लगाई है। पटाखों के वैध निर्माण, उत्पादन और उनकी अधिकृत बिक्री पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। पटाखा कारोबारियों और निर्माण इकाइयों की व्यावसायिक गतिविधियों को सीधे तौर पर रोके बिना अदालत ने केवल उपयोग की जगह और सार्वजनिक सुरक्षा को केंद्र में रखा है। इस पूरे मामले में अब अगली विस्तृत समीक्षा सुनवाई 25 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।
दिवाली के जहरीले धुएं से बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर संकट
सुनवाई के दौरान पीठ ने विशेष रूप से त्योहारी मौसम के बाद हवा की गुणवत्ता में आने वाले भयानक गिरावट के दौर पर गहरी चिंता व्यक्त की। जजों ने कहा कि दिवाली और अन्य बड़े आयोजनों के बाद हवा में घुलने वाला जहरीला धुआं और हानिकारक कण सबसे ज्यादा मासूम बच्चों और बुजुर्ग नागरिकों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। सांस के मरीजों के लिए यह समय जानलेवा साबित होता है। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक आम नागरिक खुद आगे आकर अपने रहने के माहौल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नहीं बनेंगे, तब तक केवल अदालती आदेशों से स्वच्छ हवा मिलना संभव नहीं होगा।
बीएमसी, एमपीसीबी और पुलिस को मिलकर एक्शन प्लान बनाने के निर्देश
सार्वजनिक सड़कों पर आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन तीनों प्रशासनिक एजेंसियों को एक हफ्ते के भीतर स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक परिवहन के माध्यमों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि इस अभियान में जाने-माने सेलिब्रिटीज और प्रभावशाली हस्तियों की मदद ली जाए और आम जनता को पारंपरिक पटाखों के बजाय कम प्रदूषण वाले ग्रीन क्रैकर्स की ओर प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही आम नागरिकों की सहूलियत के लिए स्थानीय पुलिस के समन्वय से एक मजबूत और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का भी आदेश दिया गया है, ताकि सड़क पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जा सके।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में पटाखों को लेकर क्या ऐतिहासिक फैसला सुनाया है?
उत्तर 1: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूरे महाराष्ट्र में सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर पूरे साल (365 दिन) के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक दिवाली, क्रिसमस, नवरात्रि और सभी धार्मिक व राजनीतिक जुलूसों पर समान रूप से लागू रहेगी।
प्रश्न 2: क्या बॉम्बे हाईकोर्ट ने पटाखों के निर्माण और बिक्री पर भी रोक लगाई है?
उत्तर 2: नहीं, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पटाखों के वैध विनिर्माण (Manufacturing) और उनकी अधिकृत दुकानों पर बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। प्रतिबंध केवल सार्वजनिक स्थानों और रास्तों पर आतिशबाजी करने पर है।
प्रश्न 3: अदालत ने शहरों के पर्यावरण को लेकर क्या कड़ी चेतावनी दी?
उत्तर 3: जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोकले की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यदि नागरिक वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक खतरों के प्रति जागरूक नहीं हुए, तो आने वाले समय में राज्य के प्रमुख शहर पूरी तरह ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाएंगे, जहाँ सांस लेना दूभर होगा।
प्रश्न 4: अदालत ने बीएमसी (BMC), एमपीसीबी (MPCB) और राज्य सरकार को क्या निर्देश दिए हैं?
उत्तर 4: अदालत ने तीनों प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक वाहनों में प्रदूषण जागरूकता अभियान चलाएं, सेलिब्रिटीज को जोड़कर ग्रीन पटाखों को बढ़ावा दें और पुलिस के साथ मिलकर एक त्वरित शिकायत निवारण तंत्र तैयार करें।
प्रश्न 5: क्या नागरिक अपनी निजी छतों या निजी परिसरों में ग्रीन पटाखे फोड़ सकते हैं?
उत्तर 5: अदालत का आदेश मुख्य रूप से सार्वजनिक सड़कों, गलियों, फुटपाथों और जुलूसों के दौरान होने वाली आतिशबाजी पर केंद्रित है। निजी परिसरों में अनुमत डेसिबल सीमा और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखों के उपयोग पर दिशानिर्देश लागू होते हैं।
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