एजेंसी, ओडिशा। Agni Missile Test : भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करते हुए ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल’ (MIRV) तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह सफल परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। इस मिसाइल ने अपनी उड़ान के दौरान सभी निर्धारित मानकों को न केवल पूरा किया, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक बड़े भौगोलिक दायरे में फैले विभिन्न लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ भेदने की अपनी क्षमता का लोहा मनवाया।
Advanced Agni missile with MIRV (Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle) system was successfully tested from Dr. APJ Abdul Kalam Island, Odisha on 08th May 2026.
The missile was flight tested with Multiple payloads, targeted to different targets spatially distributed… pic.twitter.com/W7ufT7pwbt
— DRDO (@DRDO_India) May 9, 2026
एक ही मिसाइल से होगा कई दुश्मनों का सफाया
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस उन्नत मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘मिरव’ (MIRV) प्रणाली है। स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के सहयोग से किए गए इस परीक्षण में मिसाइल कई वारहेड्स (युद्धक सामग्री) के साथ उड़ान भरी। इन वारहेड्स को हवा में ही अलग-अलग दिशाओं और दूरियों पर स्थित लक्ष्यों की ओर स्वतंत्र रूप से निर्देशित किया गया। यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा शक्तिशाली देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) की श्रेणी में ले आई है, जिनके पास एक ही मिसाइल से एक साथ कई ठिकानों को नष्ट करने की अद्भुत मारक क्षमता मौजूद है।
रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और सेना को दी बधाई
इस शानदार सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय सेना और इस परियोजना से जुड़े उद्योग जगत को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस उन्नत परीक्षण ने बढ़ते वैश्विक खतरों के विरुद्ध भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान की है। यह उपलब्धि भारत के ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ (विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध) के सिद्धांत को और अधिक शक्तिशाली बनाती है। रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम की सराहना करते हुए इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।
दुश्मन के रक्षा तंत्र को भेदने में सक्षम ‘मिरव’ तकनीक
MIRV प्रणाली सामरिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक ही मिसाइल के भीतर कई स्वतंत्र परमाणु या पारंपरिक वारहेड्स ले जाने की अनुमति देती है। इसके कारण दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम (मिसाइल रोधी तंत्र) के लिए सभी वारहेड्स को एक साथ रोकना लगभग असंभव हो जाता है। अग्नि श्रेणी की यह उन्नत मिसाइल 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक वार कर सकती है। इस रेंज के भीतर चीन के अधिकांश हिस्से और पाकिस्तान का पूरा क्षेत्र आता है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अग्नि-5 का उन्नत संस्करण (Mk2) हो सकता है, जिसमें भविष्य में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल जैसी तकनीकें भी जोड़ी जा सकती हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता और सामरिक संतुलन पर प्रभाव
भारत की ओर से किया गया यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। चीन और पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों को देखते हुए, भारत की यह परमाणु त्रय (Nuclear Triad) को मजबूत करने वाली उपलब्धि एक कड़ा संदेश देती है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, मिशन ‘दिव्यास्त्र’ के बाद इस तकनीक का परिपक्व होना भारत की मारक क्षमता में क्रांतिकारी वृद्धि करेगा। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने टेलीमेट्री, रडार और जहाजों पर तैनात स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पुष्टि की है कि मिशन के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं, जिससे देश की सुरक्षा ढाल अब पहले से कहीं अधिक अभेद्य हो गई है।
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