Telecom Zone

ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन : केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के बीच 9,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐतिहासिक समझौता

ग्वालियर प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

एजेंसी, ग्वालियर/नई दिल्ली। Gwalior Telecom Zone : मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास और संचार क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच एक द्विपक्षीय समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दूरगामी परियोजना के माध्यम से प्रदेश में लगभग 9,000 करोड़ रुपये का विशाल निजी और सार्वजनिक निवेश आने की संभावना है, जिससे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 10,000 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

करीब 350 एकड़ में फैलेगा आधुनिक तकनीक का यह बड़ा परिसर

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परियोजना की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह मैन्युफैक्चरिंग जोन लगभग 350 एकड़ के विशाल भूभाग पर विकसित किया जाएगा। इसके बुनियादी ढांचे और शुरुआती विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रथम चरण में 500 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस एकल परिसर में आधुनिक तकनीक से जुड़े मोबाइल फोन निर्माण, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर और भविष्य की 5जी एवं 6जी तकनीकों पर शोध, डिजाइनिंग, परीक्षण तथा व्यापक निर्माण की सभी अत्याधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

प्रथम चरण में ही प्रमुख कंपनियों से 2,000 करोड़ के निवेश का रास्ता साफ

इस परियोजना की व्यावसायिक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके पहले ही चरण में देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियां भारी निवेश के लिए आगे आई हैं। शुरुआती दौर में डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल और तेजस नेटवर्क जैसी अग्रणी विनिर्माण इकाइयां लगभग 2,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेंगी। इस शुरुआती निवेश से ही क्षेत्र के कम से कम 4,500 कुशल और अकुशल युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते तुरंत खुल जाएंगे, जो क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेष उपक्रम के जरिए होगा परियोजना का तीव्र संचालन और प्रबंधन

इस वृहद औद्योगिक क्षेत्र के त्वरित क्रियान्वयन, सुचारू संचालन और प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष उपक्रम यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल का गठन किया जाएगा। इस विशेष प्रशासनिक ढांचे में मध्य प्रदेश राज्य सरकार की 51 प्रतिशत की बहुलांश हिस्सेदारी होगी, जबकि केंद्र सरकार का दूरसंचार विभाग 49 प्रतिशत का साझेदार रहेगा। दोनों सरकारों का यह साझा प्रयास परियोजना से संबंधित सभी मंजूरी प्रक्रियाओं, भूमि आवंटन और बुनियादी ढांचागत विकास को बिना किसी बाधा के गति प्रदान करने का काम करेगा।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के युवाओं और स्थानीय उद्योगों को मिलेगी नई दिशा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह दूरदर्शी परियोजना मध्य प्रदेश के औद्योगिक नक्शे को पूरी तरह बदल कर रख देगी। वहीं केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह केवल एक सामान्य औद्योगिक पार्क नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया विजन को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। इससे न केवल स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों को नए व्यावसायिक अवसर मिलेंगे, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को अपने ही राज्य में अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्र में काम करने का गौरव प्राप्त होगा।

इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :

प्रश्न 1: देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन किस शहर में स्थापित किया जा रहा है?

उत्तर: यह मैन्युफैक्चरिंग जोन मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थापित किया जा रहा है।

प्रश्न 2: इस परियोजना के जरिए क्षेत्र में कुल कितना निवेश और रोजगार आने की संभावना है?

उत्तर: इस परियोजना से लगभग 9,000 करोड़ रुपये का निवेश आने और 10,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

प्रश्न 3: पहले चरण में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार कितनी सहायता दे रही है?

उत्तर: पहले चरण में आधारभूत संरचना के विकास के लिए केंद्र सरकार 500 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

प्रश्न 4: परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए गठित विशेष उपक्रम में राज्य और केंद्र की हिस्सेदारी क्या है?

उत्तर: गठित विशेष उपक्रम में मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

प्रश्न 5: टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में किन मुख्य तकनीकों पर काम किया जाएगा?

उत्तर: यहाँ मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर और 5जी एवं 6जी तकनीक से जुड़े निर्माण और शोध का कार्य होगा।

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