एजेंसी, अयोध्या। Ram Mandir Donation SC Action : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी से जुड़े मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को नई विशेष जांच टीम के गठन की जानकारी दी। अदालत ने जांच को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए टीम में वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों को शामिल करने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की भी गहराई से पड़ताल की जानी जरूरी है।
Delhi: Advocate Satyam Singh Rajput, on the hearing in the Ayodhya Ram Mandir donation theft case, says, “In the case of Ram Mandir donation, the Supreme Court has made some changes in the SIT and has given the direction to include a forensic expert. In addition, within two… pic.twitter.com/ypy3gsi5cX
— IANS (@ians_india) July 27, 2026
नई एसआईटी में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुरूप नई विशेष जांच टीम का गठन किया गया है। नई टीम की कमान लखनऊ क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस को सौंपी गई है। उनके साथ अयोध्या क्षेत्र के उप पुलिस महानिरीक्षक सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर को भी जांच दल में शामिल किया गया है। सरकार ने अदालत को बताया कि नई टीम के गठन की प्रक्रिया 25 जुलाई को जारी अधिसूचना के माध्यम से पूरी की गई। अब मामले की आगे की जांच इसी नई विशेष जांच टीम के माध्यम से की जाएगी। अदालत ने जांच की दिशा और प्रक्रिया पर ध्यान देते हुए यह स्पष्ट किया कि मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सीए और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने को कहा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच टीम में एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए को शामिल करने का सुझाव दिया। अदालत का मानना है कि चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच केवल पुलिस अधिकारियों के स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वित्तीय विशेषज्ञ की सहायता भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस सुझाव को स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जांच दल में फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने का निर्देश दिया। इस कदम का उद्देश्य कथित वित्तीय गड़बड़ियों, धन के लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की तकनीकी जांच को मजबूत करना है। अदालत ने संकेत दिया कि जांच में हर उस पहलू को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
2 हफ्ते में देनी होगी जांच की पहली रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने नई विशेष जांच टीम से 2 हफ्ते के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई को भी आगे के लिए टाल दिया है। इस दौरान जांच टीम को अपनी कार्रवाई और अब तक सामने आए तथ्यों की जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी। सुनवाई के दौरान पीठ ने जांच में पारदर्शिता बनाए रखने और सभी जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच जल्दबाजी में नहीं, बल्कि निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी मांग चुका है जांच का ब्योरा
राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की स्थिति और विशेष जांच टीम के गठन को लेकर जानकारी मांग चुका है। 20 जुलाई को हुई सुनवाई में अदालत ने कथित दान गबन और चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित किए जाने की संभावना पर सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद राज्य सरकार ने नई विशेष जांच टीम के गठन की जानकारी अदालत को दी। सोमवार की सुनवाई में अदालत ने टीम की संरचना में वित्तीय विशेषज्ञों को शामिल करने पर जोर दिया, जिससे जांच के वित्तीय पहलू की भी स्वतंत्र और तकनीकी तरीके से पड़ताल हो सके।
मामले में 8 आरोपितों की न्यायिक हिरासत भी बढ़ी
इसी मामले में अयोध्या की विशेष अदालत ने सोमवार को जेल में बंद 8 आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए और बढ़ा दी। सभी आरोपितों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत के आदेश के बाद अब सभी आरोपित 10 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे। जांच एजेंसियां मामले में आरोपितों और उनके परिवारों से जुड़े संपत्ति रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस की ओर से पहले आरोपितों से पूछताछ की जा चुकी है और मामले में कथित तौर पर 80 लाख रुपये से अधिक की बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है।
तीसरी बार बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
आरोपितों की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने का यह तीसरा अवसर बताया गया है। मामले में कार्रवाई शुरू होने के बाद आरोपितों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई थी। इसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 5 जून को राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच टीम का गठन किया था। जांच के आधार पर मंदिर ट्रस्ट की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया।
पेंशन खाते को लेकर भी अदालत ने दिया आदेश
मामले में गिरफ्तार आरोपितों में शामिल सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन खाते को लेकर भी अदालत में सुनवाई हुई। अदालत के आदेश के अनुसार 26 जून के बाद खाते में जमा हुई पेंशन की राशि को सुभाष श्रीवास्तव या उनके परिवार के सदस्य निकाल सकेंगे, जबकि 26 जून से पहले जमा राशि पर रोक जारी रहेगी। मामले की जांच के दौरान पुलिस आरोपितों और उनके परिवारों से संबंधित संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड जुटा रही है। इससे जांच एजेंसियों को कथित चढ़ावा चोरी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अब नई एसआईटी की जांच पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब मामले की जांच का अगला चरण नई विशेष जांच टीम की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। टीम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल किए जाने से जांच का दायरा पुलिस कार्रवाई के साथ वित्तीय और दस्तावेजी पड़ताल तक बढ़ जाएगा। अदालत ने 2 हफ्ते में जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगकर यह संकेत दिया है कि मामले की जांच को लेकर स्पष्ट प्रगति सामने रखनी होगी। वहीं, 8 आरोपितों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ने के बाद अब मामले की अगली कानूनी कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।
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