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नीट ऑनलाइन परीक्षा पर शीर्ष अदालत की सख्त नजर नीलेकणी कार्यबल की सिफारिशों से जुड़े सुधारों पर टिकी उम्मीदें

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। NEET Online Exam SC Updates : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट-यूजी 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि वह केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल की सिफारिशों पर नजर रखेगा। अदालत ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में इस परीक्षा को पारंपरिक ऑफलाइन पद्धति के बजाय ऑनलाइन माध्यम से कराने पर विचार किया जाता है, तो इसके लिए बहुत अधिक मजबूत, व्यावहारिक और भरोसेमंद सुझावों की जरूरत होगी।

ऑनलाइन परीक्षा के लिए नई सुरक्षा सोच की जरूरत

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की कि परीक्षा प्रणाली को सिर्फ तकनीकी रूप से आधुनिक बनाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसे पूरी तरह सुरक्षित भी बनाना पड़ेगा। अदालत के अनुसार, ऑनलाइन परीक्षा के मामले में साइबर सुरक्षा और डेटाबेस की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दे बन जाते हैं, क्योंकि जरा सी चूक पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर सकती है। पीठ ने यह भी माना कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तेज और नकल-मुक्त बनाने के लिए पुराने ढांचे से आगे बढ़कर नए समाधान तलाशने होंगे। अदालत का रुख यह दर्शाता है कि वह केवल प्रशासनिक दावों पर नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा इंतजामों और व्यवहारिक सुधारों पर अधिक ध्यान दे रही है।

नीलेकणी समिति की रिपोर्ट पर अदालत की निगाह

केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित किया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यह कार्यबल अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर एक अधिक मजबूत व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर नीट जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा को ऑनलाइन करने का प्रस्ताव सामने आता है, तो केवल तकनीकी सुविधा को आधार नहीं बनाया जा सकता। उसके साथ-साथ सुरक्षा, गोपनीयता, सर्वर प्रबंधन, डेटा संरक्षा और परीक्षा केंद्रों की निगरानी जैसी कई परतों पर काम करना होगा।

पेपर लीक मामले से शुरू हुई कानूनी लड़ाई

यह सुनवाई राजद सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर हुई, जिसमें 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने के निर्णय को चुनौती दी गई थी। याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे और यह आग्रह किया गया था कि छात्रों के हित में पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। मामला सामने आने के बाद परीक्षा को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई थी। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की पारदर्शिता, निगरानी व्यवस्था और प्रश्नपत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इसी पृष्ठभूमि में अदालत में यह मुद्दा उठा कि क्या मौजूदा ढांचे में इतनी बड़ी परीक्षा को भरोसेमंद तरीके से संभाला जा सकता है या फिर इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव की जरूरत है।

समिति में शामिल हैं देश के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ

सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय कार्यबल में कई अनुभवी अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें नंदन नीलेकणी को अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा को शामिल किया गया है। इस समिति का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में ऐसी खामियों की पहचान करना है, जिनकी वजह से पेपर लीक, सेंधमारी या अन्य अनियमितताओं की संभावना बनती है। विशेषज्ञों की यह टीम खास तौर पर डिजिटल व्यवस्था, पहचान सत्यापन, प्रश्नपत्र वितरण, निगरानी तंत्र और परीक्षा डेटा की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर सिफारिशें देने का काम कर रही है।

अदालत ने तकनीकी बदलाव को बताया संवेदनशील विषय

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह साफ है कि परीक्षा सुधार को अदालत एक संवेदनशील और दूरगामी असर वाला विषय मान रही है। ऑनलाइन परीक्षा को लेकर जहां एक ओर पारदर्शिता और गति का लाभ मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर साइबर हमलों, डेटा लीक, तकनीकी बाधाओं और नेटवर्क अस्थिरता जैसे खतरे भी जुड़े हैं। इसी वजह से अदालत ने संकेत दिया कि किसी भी बदलाव को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ लागू करना होगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि देशभर में फैली इतनी बड़ी परीक्षा के लिए केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म काफी नहीं होता, बल्कि इसके साथ मजबूत सुरक्षा ढांचा, प्रशिक्षित निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन बैकअप सिस्टम भी जरूरी होता है।

3 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त के लिए तय की है। इससे पहले 1 जून को शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता की उस मांग पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था, जिसमें 21 जून को होने वाली पुनः परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में कराने की बात कही गई थी। अब अगली सुनवाई में अदालत के सामने समिति की दिशा, सरकार की तैयारी और परीक्षा प्रणाली में संभावित बदलावों पर और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है। नीट जैसे बड़े राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को लेकर अदालत की यह सख्त नजर भविष्य की परीक्षा व्यवस्था के लिए भी अहम मानी जा रही है।

परीक्षा सुधारों पर बढ़ी देशभर की निगाह

नीट विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को किस तरह और अधिक सुरक्षित बनाया जाए। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि नीलेकणी कार्यबल क्या सुझाव देता है और अदालत उन सिफारिशों को किस तरह देखती है। अगर ऑनलाइन परीक्षा को लेकर कोई नई व्यवस्था बनती है, तो वह केवल तकनीकी बदलाव नहीं होगा, बल्कि यह भारत की परीक्षा प्रणाली में एक बड़े परिवर्तन की दिशा में कदम साबित हो सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की अगली टिप्पणी इस पूरे मामले की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।

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