मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मेगा शो : एमपी को मिला फर्स्ट डबल लेयर फ्लाइओवर, यूसीसी बिल पर मिला जनता का ग्रैंड वेलकम

इंदौर प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

एजेंसी, इंदौर। Indore Double Layer Flyover : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने अपने इंदौर दौरे के दौरान प्रदेशवासियों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और लीगल रिफॉर्म्स की 2 बहुत बड़ी सौगातें दी हैं। राज्य की विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल के सफलतापूर्वक पास होने के बाद इंदौर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का आम जनता और अलग अलग सोशल ऑर्गनाइजेशंस द्वारा बेहद गर्मजोशी के साथ ग्रैंड वेलकम किया गया। इसी पॉजिटिव माहौल के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में 1 नया इतिहास रचते हुए उन्होंने लवकुश चौराहे पर मध्य प्रदेश के सबसे पहले डबल लेयर फ्लाइओवर ब्रिज का शानदार इनॉगरेशन भी किया। 1 तरफ जहां यूसीसी बिल को समाज के हर वर्ग के लिए 1 ऐतिहासिक और जरूरी कदम बताया जा रहा है, वहीं यह हाईटेक नया ब्रिज ट्रैफिक मैनेजमेंट के मामले में इंदौर को 1 बिल्कुल नई और स्मार्ट पहचान दिलाने जा रहा है। सरकार के इन 2 बड़े और अहम फैसलों ने विकसित मध्य प्रदेश के विजन को 1 नई रफ्तार दे दी है।

175 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट और 3 टियर ट्रैफिक सिस्टम

इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया यह नया डबल लेयर फ्लाइओवर शहर के ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर का 1 बेहतरीन और फ्यूचरिस्टिक नमूना है। 175 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसका 3 टियर ट्रैफिक सिस्टम है। इस व्यस्त चौराहे पर अब सबसे नीचे यानी ग्राउंड लेवल पर आम सड़क का ट्रैफिक चलेगा, उसके ठीक ऊपर लेवल 2 पर मौजूदा ब्रिज और मेट्रो रेल का कॉरिडोर काम करेगा, जबकि सबसे ऊपर लेवल 3 पर यह नया डबल लेयर ब्रिज ऑपरेट होगा। इस हाईटेक डिजाइन की वजह से इंदौर और उज्जैन के बीच सफर करने वाले यात्रियों को भयंकर ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए परमानेंट रिलीफ मिल जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आने वाले 2028 के महाकुंभ यानी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा किया जा रहा है ताकि उज्जैन जाने वाले श्रद्धालुओं का कीमती समय और व्हीकल का फ्यूल दोनों बच सकें। फिलहाल अरविंदो अस्पताल से लेकर बाणगंगा तक जाने वाली इसकी 1 साइड को पब्लिक के लिए खोल दिया गया है और शेष काम भी अपने फाइनल स्टेज में चल रहा है।

मॉडर्न इंजीनियरिंग का मास्टरपीस और हैवी स्ट्रक्चर

अगर इस शानदार फ्लाइओवर के कंस्ट्रक्शन डिटेल्स पर नजर डालें तो यह किसी भी इंजीनियरिंग मार्वल से बिल्कुल भी कम नहीं है। कुल 1450 मीटर की लंबी दूरी तय करने वाले इस स्ट्रक्चर में बेहद आधुनिक और मजबूत स्टील का इस्तेमाल किया गया है। जमीन से लगभग 22 मीटर की ऊंचाई पर इसके 65 मीटर लंबे और 24 मीटर चौड़े स्पान के ऊपर 400 और 400 टन वजन वाले 2 हैवी स्टील बो स्ट्रिंग गर्डर बहुत ही एक्सपर्ट तरीके से इंस्टॉल किए गए हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण में कुल मिलाकर 800 टन सॉलिड स्टील का उपयोग हुआ है, जो इस ब्रिज की मजबूती और लाइफ को कई गुना बढ़ा देता है। इसे राज्य की सबसे प्रमुख और सफल इंजीनियरिंग अचीवमेंट्स में शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि इंदौर शहर हमेशा से ही अर्बन डेवलपमेंट में नए बेंचमार्क सेट करता आया है और यह डबल डेकर ब्रिज उसी विकास यात्रा का 1 बहुत अहम हिस्सा है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर 3.5 करोड़ लोगों का फीडबैक

इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा मुख्यमंत्री का यह इंदौर दौरा यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी बिल की कामयाबी को सेलिब्रेट करने के लिए भी बेहद खास रहा। एयरपोर्ट पर शहर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव, कई लोकल विधायकों, पुलिस कमिश्नर और अलग अलग कम्युनिटीज के रिप्रेजेंटेटिव्स ने सीएम का पूरे जोश के साथ स्वागत किया। मीडिया से विस्तार में चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस बिल को कानून का रूप देने से पहले जनता के साथ सीधा संवाद कायम किया था। पूरे राज्य में लगभग 3.5 करोड़ से भी ज्यादा नागरिकों के साथ इस संवेदनशील विषय पर चर्चा की गई, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन को आम जनता की तरफ से 10 लाख से भी अधिक जरूरी सजेशंस और फीडबैक प्राप्त हुए। इसी स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन को बेस बनाकर बिल का फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया गया और उसे विधानसभा से पास कराया गया।

जेंडर जस्टिस की दिशा में कदम और पॉलिटिकल विरोध

नया यूसीसी कानून लागू होने के बाद शादी, तलाक, गुजारा भत्ता और प्रॉपर्टी के बंटवारे जैसे सभी पर्सनल मामलों में पूरे प्रदेश के अंदर 1 ही कॉमन लीगल फ्रेमवर्क लागू हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से डिक्लेयर किया कि यह नया कानून हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन, पारसी और बाकी सभी धर्मों पर बिना किसी भेदभाव के 1 समान रूप से लागू होगा। उन्होंने इस बड़े ऐतिहासिक रिफॉर्म का पूरा क्रेडिट देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसे ही 1 समान भारत का सपना देखा था जो अब जाकर सच साबित हो रहा है। सत्ताधारी पार्टी इसे जेंडर जस्टिस और वुमन एंपावरमेंट की दिशा में 1 बहुत बड़ा गेम चेंजर मान रही है। हालांकि, दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा में इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए सरकार पर इल्जाम लगाया है कि यह कानून भारत की डाइवर्सिटी और पुरानी परंपराओं को डैमेज करेगा और यह सिर्फ 1 खास पॉलिटिकल एजेंडे को पुश करने की कोशिश है।

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