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आतंकवाद पर गुजरात एटीएस का बड़ा प्रहार : जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल के 5 और संदिग्ध गिरफ्तार, टाइम बम बनाने की फिराक में थे आरोपी

गुजरात देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, पाटण। Gujarat ATS Jaish Module : गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने देश की सुरक्षा को चूना लगाने की साजिश रचने वाले वैश्विक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। सुरक्षा एजेंसी ने अत्यंत सतर्कता बरतते हुए इस खूंखार मॉड्यूल से जुड़े 5 और संदिग्ध आतंकियों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। इन सभी देशद्रोहियों को गुजरात के पाटण जिले के अंतर्गत आने वाले सिद्धपुर तालुका के खाडियाल नामक गांव से खुफिया इनपुट के आधार पर घेराबंदी करके पकड़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियों की इस त्वरित कार्रवाई से राज्य में किसी बड़ी और अनहोनी आतंकी घटना को समय रहते टाल दिया गया है।

गिरफ्तार किए गए सभी 5 संदिग्धों की हुई आधिकारिक पहचान

आतंकवाद निरोधी दस्ते द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए इन पांचों आरोपियों की पहचान पूरी तरह स्थापित कर ली गई है। पकड़े गए संदिग्धों के नाम बिलाल आबिदभाई शेरा, मोहम्मद अयूब कादीवाला, मोहम्मद पालनपुरी उर्फ खाली अयूब सुनसारा, शफिया रईस मुख्ती और मोहम्मद हसन कार्डिया बताए गए हैं। ये सभी आरोपी सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर स्थानीय स्तर पर अपना एक स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार कर रहे थे और युवाओं को बरगलाने के काम में जुटे हुए थे।

कोर्ट ने सभी आरोपियों को 24 जुलाई तक एटीएस की हिरासत में भेजा

गिरफ्तारी की कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के तुरंत बाद गुजरात एटीएस की टीम ने इन पांचों संदिग्धों को मेहसाणा जिले के कढ़ी कस्बे में स्थित अदालत में पेश किया। वहां न्यायिक मजिस्ट्रेट आरएम भाटिया के समक्ष इन आरोपियों की भारी सुरक्षा के बीच पेशी कराई गई। सरकारी जांच एजेंसी ने अदालत से आरोपियों की लंबी कस्टडी की मांग की, ताकि इनके पूरे नेटवर्क और भविष्य की खतरनाक साजिशों का पर्दाफाश किया जा सके। अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए सभी पांचों आरोपियों को 24 जुलाई तक के लिए एटीएस की रिमांड और हिरासत में भेजने का सख्त आदेश जारी कर दिया।

3 जुलाई की कार्रवाई के बाद मिला था बड़ा सुराग

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस बड़ी कामयाबी की नींव कुछ दिन पहले ही रख दी गई थी। इससे पहले 3 जुलाई को सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 8 अन्य संदिग्ध आतंकियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किया था। इन 8 आरोपियों को गुजरात और मध्य प्रदेश के विभिन्न ठिकानों से दबोचा गया था। हिरासत में लिए गए उन आठों आरोपियों से जब केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियों ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने पाटण जिले में छिपे अपने इन 5 अन्य साथियों के ठिकानों और गुप्त मंसूबों का खुलासा कर दिया, जिसके बाद एटीएस ने यह त्वरित छापेमारी की।

टाइम बम बनाने के असफल प्रयोग का कोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे सरकारी वकील पीआर दंतनी ने एटीएस की जांच रिपोर्ट के हवाले से कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने माननीय जज को अवगत कराया कि पकड़े गए आरोपियों में से एक बेहद शातिर दिमाग है और उसने हाल ही में एक घातक टाइम बम बनाने का बाकायदा प्रयास भी किया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का चक्रव्यूह मजबूत होने और तकनीकी खराबी के कारण उसका यह पहला बम प्रयोग पूरी तरह से असफल साबित रहा। यदि यह प्रयोग सफल हो जाता, तो राज्य के किसी भीड़भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाया जा सकता था।

जिहादी किताबें और बम सामग्री बरामद करने की कवायद तेज

सरकारी वकील पीआर दंतनी ने अदालत को यह भी बताया कि एटीएस की टीम अब रिमांड अवधि के दौरान इन आरोपियों को उन गुप्त ठिकानों पर लेकर जाएगी जहां इन्होंने बम बनाने के उपकरण और कच्चे रसायन छिपाकर रखे हैं। पुलिस को अभी भारी मात्रा में बम बनाने का सामान और उर्दू भाषा में लिखा हुआ जैश-ए-मोहम्मद का कट्टरपंथी साहित्य बरामद करना बाकी है। एटीएस इस बात की गहराई से तफ्तीश करना चाहती है कि इन आरोपियों को बम बनाने का सामान किस माध्यम से सप्लाई किया गया था और इन्हें जिहादी किताबें बांटने के लिए फंड कहां से मुहैया हो रहा था।

पाकिस्तानी हैंडलर अब्दुल्ला साहब के सीधे संपर्क में थे सभी आरोपी

गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पर्दाफाश करते हुए बताया कि ये सभी 5 संदिग्ध आरोपी इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीमा पार बैठे पाकिस्तान के एक शातिर हैंडलर के सीधे संपर्क में थे। उस पाकिस्तानी हैंडलर की पहचान ‘अब्दुल्ला साहब’ के रूप में हुई है, जो इन्हें लगातार भारत विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहा था। इसी हैंडलर के इशारे पर ये सभी आरोपी गुजरात के शांत माहौल को बिगाड़ने और यहां अपना एक बेहद मजबूत अंडरग्राउंड नेटवर्क खड़ा करने की कोशिशों में दिन-रात लगे हुए थे।

मदरसे को बनाया था ठिकाना और मिली थी 3 लाख रुपये की विदेशी फंडिंग

डीआईजी सुनील जोशी ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इन देशद्रोहियों को स्थानीय स्तर पर अपनी गतिविधियों को बढ़ाने और साजिश रचने के लिए एक अज्ञात जरिया इस्तेमाल करके 3 लाख रुपये की पहली किश्त भी ट्रांसफर की गई थी। ये सभी पांचों संदिग्ध आरोपी समाज की नजरों से बचने के लिए गुजरात के पाटण में स्थित एक स्थानीय मदरसे में शरण लिए हुए थे और वहीं रहकर अपनी रणनीतियां बना रहे थे। छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों ने उस मदरसे से भारी मात्रा में भड़काऊ साहित्य, देश विरोधी पर्चे और कई संदिग्ध दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है।

26 साल पहले खूंखार आतंकी मसूद अजहर ने बनाया था यह संगठन

जैश-ए-मोहम्मद मुख्य रूप से पड़ोसी देश पाकिस्तान की धरती से संचालित होने वाला एक बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है। इस खूंखार संगठन की स्थापना कुख्यात आतंकी मौलाना मसूद अजहर ने साल 2000 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर शहर में की थी, जहां आज भी इसका मुख्य मुख्यालय और नियंत्रण केंद्र स्थित है। यह संगठन पाकिस्तान के विभिन्न अशांत इलाकों में बेखौफ होकर ट्रेनिंग कैंप चलाता है और युवाओं को भारत के खिलाफ जिहाद के नाम पर हथियार उठाने की कसम दिलाता है। इस संगठन पर भारत की संसद और जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में बड़े और घातक आत्मघाती हमलों को अंजाम देने के गंभीर आरोप हैं।

विमान अपहरण कांड के बदले भारत सरकार को छोड़ना पड़ा था मसूद अजहर को

इस संगठन के मुखिया मसूद अजहर का इतिहास भारत की जेलों से भी जुड़ा रहा है। उसे भारतीय सुरक्षा बलों ने साल 1994 में जम्मू-कश्मीर के इलाके से आतंकवाद फैलाने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया था और वह भारत की जेल में बंद था। लेकिन दिसंबर 1999 में आतंकवादियों ने इंडियन एयरलाइंस के काठमांडू से दिल्ली आ रहे विमान ‘आईसी-814’ का अपहरण कर लिया था और उसे बंधकों समेत अफगानिस्तान के कंधार ले गए थे। उस वक्त विमान में सवार भारतीय नागरिकों और मासूम यात्रियों की जान बचाने के बदले भारत सरकार को मजबूरन मसूद अजहर समेत 3 खूंखार आतंकियों को रिहा करना पड़ा था, जिसके बाद उसने पाकिस्तान जाकर इस नए आतंकी संगठन की नींव रखी थी।

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