एजेंसी, अमरावती। Andhra Pradesh COVID Cases : देश में महामारी के दौर की कड़वी यादें एक बार फिर ताजा होने लगी हैं। आंध्र प्रदेश राज्य में पिछले कुछ दिनों के भीतर कोरोना संक्रमण के 12 नए पुष्ट मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आने से 4 गंभीर रूप से बीमार मरीजों की असामयिक मौत भी हो चुकी है। राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायरस के वास्तविक रूप और उसके घातक जेनेटिक म्यूटेशन का सटीक पता लगाने के लिए संक्रमितों के 5 मुख्य सैंपल तुरंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे की प्रयोगशाला में भेज दिए हैं। आंध्र प्रदेश की इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए पड़ोसी राज्य कर्नाटक ने भी अपनी सीमाओं पर सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
VIDEO | “We have taken all necessary measures; there is no need to panic,” says Andhra Pradesh Health Minister Satya Kumar on reports of rising COVID-19 cases.
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— Press Trust of India (@PTI_News) July 17, 2026
सह-रुग्णता से पीड़ित मरीजों ने संक्रमण के कारण तोड़ा दम
आंध्र प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव और कमिश्नर वीरा पांडियन ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि जिन 4 संक्रमित मरीजों की मौत हुई है, उनकी शारीरिक स्थिति पहले से ही काफी कमजोर थी। ये सभी मृतक पहले से ही कुछ अन्य गंभीर और जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे थे, जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में को-मॉर्बिडिटी यानी सह-रुग्णता कहा जाता है। इन मरीजों को लंबे समय से अत्यधिक उच्च रक्तचाप, अनियंत्रित मधुमेह और किडनी यानी गुर्दे की गंभीर बीमारियां थीं। कोरोना वायरस के संक्रमण ने उनके शरीर के मुख्य अंगों पर सीधा हमला किया, जिसके कारण उनके जीवन को नहीं बचाया जा सका।
राज्य के चार प्रमुख जिलों में बिखरे हुए मिले मरीज
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सामने आए 12 संक्रमित मरीज किसी एक विशेष जगह पर नहीं पाए गए हैं, बल्कि वे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिखरे हुए हैं। भौगोलिक स्थिति की बात करें तो सबसे अधिक 8 मामले अकेले कडपा जिले में दर्ज किए गए हैं, जबकि गुंटूर जिले में 2 मरीजों की पहचान हुई है। इसके अलावा तटीय क्षेत्र विशाखापत्तनम और काकीनाडा जिलों में भी 1-1 मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ये सभी मामले पूरी तरह से अलग-अलग इलाकों के हैं और राज्य में कहीं भी संक्रमितों का कोई सामूहिक समूह यानी क्लस्टर नहीं बना है, जो कि एक राहत की बात है।
निजी और सरकारी लैब की दोहरी जांच में हुई संक्रमण की पुष्टि
संक्रमित मरीजों के इलाज और उनकी पहचान को लेकर विशाखापत्तनम के केजीएच अस्पताल की मुख्य सुपरिटेंडेंट डॉ. वाणी ने मीडिया को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आए एक विशिष्ट मरीज में कोरोना जैसे शुरुआती लक्षण दिखने पर डॉक्टरों की टीम ने उसे तुरंत आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने की सख्त सलाह दी थी। मरीज ने पहले एक प्रतिष्ठित निजी लैब में अपनी जांच कराई जहां उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए सरकारी केजीएच अस्पताल की आधुनिक लैब में उसकी दोबारा जांच करवाई। इस दोहरी जांच प्रक्रिया में भी मरीज की रिपोर्ट पूरी तरह से कोरोना पॉजिटिव पाई गई, जिसके बाद उसे विशेष वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया।
कुछ मरीज ठीक होकर घर लौटे, तो कुछ अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में
वर्तमान समय में राज्य के भीतर उपचाराधीन मरीजों की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि 12 संक्रमितों में से 3 मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं और अपने घर लौट गए हैं। शेष बचे मरीजों में से 3 लोगों को उनके घरों में ही होम आइसोलेशन में रखा गया है, जहां स्वास्थ्य कर्मी लगातार उनके संपर्क में हैं। इसके अतिरिक्त 2 मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की तमाम आपातकालीन सुविधाएं मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि देशभर में 1 जुलाई से अब तक कुल 339 कोरोना मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 12 मरीज अकेले आंध्र प्रदेश से संबंधित हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में कर्नाटक प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी
आंध्र प्रदेश में पैर पसारते कोरोना संक्रमण का सीधा असर उसके पड़ोसी राज्य कर्नाटक पर भी साफ देखने को मिल रहा है। कर्नाटक के तुमकुरु जिले की डिप्टी कमिश्नर शुभा कल्याण ने इस विषय पर एक आपातकालीन बैठक बुलाई। उन्होंने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि चूंकि हमारे तुमकुरु जिले की कुछ महत्वपूर्ण तहसीलें, विशेषकर पावागड़ा तहसील, सीधे तौर पर आंध्र प्रदेश की भौगोलिक सीमाओं से सटी हुई हैं, इसलिए संक्रमण को अपने राज्य में फैलने से रोकने के लिए हमने सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग और एहतियाती सुरक्षा संबंधी कड़े उपाय तुरंत प्रभाव से लागू करने का फैसला किया है। सीमा पार से आने वाले संदिग्ध लक्षणों वाले यात्रियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश और जनता से पैनिक न होने की अपील
आंध्र प्रदेश प्रशासन की मुख्य स्वास्थ्य सचिव वीरा पांडियन ने राज्य की आम जनता से बेहद भावुक और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को इस स्थिति से बिल्कुल भी घबराने या पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, उन्होंने लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने और उचित सामाजिक दूरी का पालन करने जैसी बुनियादी सावधानियां बरतने की सलाह जरूर दी है। सरकार ने राज्यभर के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों समेत समस्त पैरामेडिकल स्टाफ को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के आदेश जारी कर दिए हैं।
हजारों वैरिएंट के बीच ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स ने बढ़ाई चिंता
चिकित्सा अनुसंधान के इतिहास पर नजर डालें तो वैश्विक महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक कोरोना वायरस अपनी संरचना में बदलाव करके हजारों अलग-अलग वैरिएंट्स और स्ट्रेन्स के रूप में दुनिया के सामने आ चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायरस की घातकता के आधार पर अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन जैसे कुछ चुनिंदा वैरिएंट्स को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ यानी विशेष चिंताजनक श्रेणी में वर्गीकृत किया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ओमिक्रॉन वैरिएंट ने समय-समय पर म्यूटेट होकर जेएन.1, एक्सएफजी और एनबी.1.8.1 जैसे कई अत्यधिक संक्रामक सब-वैरिएंट्स को जन्म दिया है। पुणे की प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आंध्र प्रदेश में फैला यह वायरस कितना नया और संक्रामक है।
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