Rohingya Boat Capsized

बंगाल की खाड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों की नावें डूबने से महासंकट : 500 से अधिक लोगों के मारे जाने की भीषण आशंका

अंतर्राष्ट्रीय म्यांमार

एजेंसी, म्यांमार। Bay Of Bengal Rohingya Boat Capsized : बंगाल की खाड़ी में म्यांमार के तटीय इलाके के समीप एक बेहद ही दर्दनाक और दिल दहला देने वाला बड़ा समुद्री हादसा सामने आया है। गृहयुद्ध और भीषण हिंसा से जूझ रहे म्यांमार के रखाइन प्रांत से सुरक्षित जीवन की तलाश में निकले सैकड़ों शरणार्थियों से भरी 2 बड़ी नावें गहरे समुद्र में पूरी तरह से पलटकर डूब गईं। शुरुआती खुफिया और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन दोनों अभागे जहाजों पर 500 से भी ज्यादा लोग सवार थे, जिनके समुद्र की उफनती लहरों में समा जाने की बेहद गंभीर आशंका जताई जा रही है। इस भयावह तबाही के बाद गहरे समंदर के बीचों-बीच चीख-पुकार मच गई और लापता हुए सैकड़ों लोगों को बचाने के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

जून महीने के आखिरी दिनों में म्यांमार के अशांत रखाइन प्रांत से रवाना हुई थीं नावें

प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, इन दोनों अभागे जहाजों में सवार अधिकांश लोग म्यांमार के प्रताड़ित रोहिंग्या समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। म्यांमार के भीतर लंबे समय से जारी हिंसक आंतरिक सैन्य संघर्ष और बेहद खराब मानवीय परिस्थितियों के कारण यह लोग अपने मूल निवास स्थान रखाइन प्रांत को छोड़ने के लिए पूरी तरह मजबूर हुए थे। यह सभी शरणार्थी जून 2026 महीने के अंतिम दिनों में सुरक्षित ठिकानों की तलाश में समुद्र के रास्ते निकले थे। हालांकि, अभी तक इस भीषण जल हादसे में आधिकारिक तौर पर मारे गए लोगों की सही संख्या का आंकड़ा सामने नहीं आ सका है, लेकिन स्थानीय जानकारों का कहना है कि नावों की जर्जर स्थिति को देखते हुए किसी भी यात्री का बचना बेहद मुश्किल है।

संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक एजेंसियों ने मौसम की मार और भारी बाढ़ को बताया मुख्य वजह

इस अंतरराष्ट्रीय मानवीय त्रासदी पर संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च शरणार्थी एजेंसी यानी यूएनएचसीआर और इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन यानी आईओएम ने एक संयुक्त आधिकारिक बयान जारी कर बेहद गहरी चिंता व्यक्त की है। वैश्विक संस्थाओं ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया है कि हाल के दिनों में इस पूरे तटीय और समुद्री इलाके में हुई मूसलाधार बारिश, चक्रवाती हवाओं और भयंकर बाढ़ की वजह से समुद्र के भीतर नौवहन की स्थितियां अत्यंत खतरनाक और जानलेवा हो चुकी थीं। ऐसे बेहद खराब मौसम में रोहिंग्या शरणार्थियों द्वारा की जा रही यह अनधिकृत समुद्री यात्राएं पहले से कहीं ज्यादा जोखिम भरी और आत्मघाती साबित हुईं।

दुनिया के सबसे बड़े और सबसे भयानक समुद्री हादसों में शामिल होने की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने इस घटनाक्रम को लेकर दुनिया भर के देशों को आगाह करते हुए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। वैश्विक निकाय का मानना है कि यदि लापता चल रहे सभी लोगों की मौत की पुष्टि हो जाती है, तो यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े और भीषण समुद्री हादसों की सूची में शुमार हो जाएगा। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने साफ तौर पर कहा है कि इतनी बड़ी संख्या में इंसानी जिंदगियों के समंदर में डूबने की खबर से पूरा विश्व समुदाय स्तब्ध और बेहद चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने और जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने में जुट गया है।

म्यांमार में बदतर होते हालात और सुरक्षित भविष्य की चाह में जान दांव पर लगाने की मजबूरी

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर दक्षिण-पूर्व एशिया में शरणार्थियों के संकट को वैश्विक पटल पर लाकर खड़ा कर दिया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पड़ोसी देश बांग्लादेश में इस समय लगभग 12 लाख रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में शिविरों के भीतर रह रहे हैं, जबकि म्यांमार के भीतर भी लाखों रोहिंग्या नागरिकों को डिटेंशन सेंटरों और कड़ी कैद में रखा गया है। बुनियादी अधिकारों और सुरक्षा के अभाव के कारण यह लोग अक्सर मानव तस्करों के जाल में फंसकर बेहद छोटी, लकड़ी की कमजोर और असुरक्षित नावों के जरिए मलेशिया, इंडोनेशिया तथा थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने के लिए अपनी जान दांव पर लगा देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे विनाशकारी हादसे देखने को मिलते हैं।

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