एजेंसी, भोपाल। MP Cabinet Reshuffle : मध्य प्रदेश की राजनीति के गलियारों से इस वक्त की एक बहुत ही चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अचानक एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस आकस्मिक फैसले के तहत कैबिनेट मंत्री लखन पटेल से उनके सबसे महत्वपूर्ण विभाग यानी पशुपालन एवं डेयरी विभाग की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इस बड़े बदलाव के बाद अब इस पूरे विभाग की कमान सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद अपने हाथों में संभालेंगे। वहीं दूसरी ओर मंत्री लखन पटेल के पास अब केवल अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण माना जाने वाला आनंद विभाग ही शेष बचेगा। सरकार के इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से ही पूरे राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में तमाम तरह की अटकलों और सुगबुगाहटों का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
Bhopal, Madhya Pradesh: Chief Minister Mohan Yadav took over the Animal Husbandry and Dairy Department from Minister of State (Independent Charge) Lakhan Patel, whose portfolio has been reduced to the Anand Department only pic.twitter.com/6swaSpK3Sl
— IANS (@ians_india) July 15, 2026
मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना
मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में एक आधिकारिक गजट अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। जारी किए गए सरकारी आदेश के अनुसार, मंत्री लखन पटेल के विभागीय प्रभार में तत्काल प्रभाव से आंशिक संशोधन किया गया है। अब उनके पास जो पशुपालन एवं डेयरी विभाग था, उसे मुख्यमंत्री सचिवालय के अधीन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण विभाग के दैनिक कामकाज की समीक्षा खुद करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस बड़े फैसले के बाद लखन पटेल के पास विभागीय तौर पर काफी कम काम बचेगा, क्योंकि अब वे केवल राज्य के आनंद विभाग का ही प्रतिनिधित्व करेंगे।
विभाग वापस लिए जाने के असल कारणों पर सरकार ने साधी चुप्पी
मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य सरकार की ओर से इस कैबिनेट फेरबदल को लेकर अभी तक कोई भी स्पष्ट और आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। सरकार की इस रहस्यमयी चुप्पी के कारण राजनीतिक विश्लेषक और मीडिया जगत इस फैसले के अलग-अलग मायने निकालने में जुटे हुए हैं। कुछ वरिष्ठ विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत विभागों के कामकाज को बेहतर और सुचारु बनाने का प्रयास किया गया है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा इसे विभागीय कामकाज की समीक्षा और लखन पटेल के प्रदर्शन से जोड़कर देख रहा है। हालांकि, जब तक मुख्यमंत्री या पार्टी संगठन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
बुंदेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं में शुमार हैं लखन पटेल
विभागीय जिम्मेदारी खोने वाले लखन पटेल भारतीय जनता पार्टी के बेहद वरिष्ठ और जमीनी नेताओं में गिने जाते हैं। वे लंबे समय से बुंदेलखंड अंचल और विशेष रूप से दमोह जिले की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा संगठन ने उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए वर्ष 2013 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें पहली बार पथरिया विधानसभा सीट से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशी कुंवर पुष्पेंद्र सिंह हजारी को 7,315 मतों के अंतर से पराजित किया था। उस चुनाव में लखन पटेल को कुल 60,083 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार केवल 52,768 वोट ही हासिल कर सके थे।
वर्ष 2018 के चुनाव में मिली थी बेहद करीबी और अप्रत्याशित शिकस्त
अपनी पहली जीत के बाद क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने के बावजूद लखन पटेल को वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बेहद कड़े और त्रिकोणीय मुकाबले में अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। उस समय बहुजन समाज पार्टी की फायरब्रांड उम्मीदवार रामबाई गोविंद सिंह ने उन्हें महज 2,205 वोटों के बेहद नजदीकी अंतर से चुनाव हरा दिया था। उस कांटे की टक्कर वाले चुनाव में लखन पटेल के खाते में जहां 37,062 वोट आए थे, वहीं विजयी बसपा उम्मीदवार रामबाई गोविंद सिंह को कुल 39,267 वोट प्राप्त हुए थे। इस करीबी हार के बाद भी लखन पटेल ने जमीन पर अपनी सक्रियता कम नहीं की और लगातार पार्टी के लिए काम करते रहे।
वर्ष 2023 के चुनाव में बंपर जीत के साथ की थी दमदार वापसी
अपनी पुरानी हार का बदला लेते हुए लखन पटेल ने वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक बार फिर शानदार और बेहद दमदार वापसी की। भाजपा ने उन पर दोबारा भरोसा जताते हुए पथरिया सीट से टिकट दिया, जिसे उन्होंने पूरी तरह सही साबित कर दिखाया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के राव ब्रजेंद्र सिंह को 18,159 मतों के एक बहुत ही विशाल अंतर से शिकस्त दी। चुनाव परिणामों के अनुसार, लखन पटेल को रिकॉर्ड 82,603 वोट हासिल हुए थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 64,444 वोट ही मिल सके थे। इसी शानदार जीत के ईनाम के रूप में उन्हें मोहन यादव कैबिनेट में मंत्री पद और महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें से अब एक विभाग उनसे वापस ले लिया गया है।
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